Breaking News:

जरा हट के : ब्याज पर पैसे लेकर ग्रामीणों ने खुद बनाई डेढ़ सौ मीटर लम्बी सड़क -

Sunday, November 18, 2018

देहरादून : दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली युवती के सोमवार को दर्ज होंगे बयान -

Saturday, November 17, 2018

वरिष्ठ पत्रकार अनूप गैरोला का निधन -

Saturday, November 17, 2018

मिस उत्तराखंड : मिस रेडिएंट स्किन एंड ब्यूटीफुल हेयर सब प्रतियोगिता का आयोजन -

Saturday, November 17, 2018

सभी नागरिक अपने मताधिकार का करे प्रयोग : सीएम -

Saturday, November 17, 2018

मतदाता चुनेेंगे शहर की सरकार …. -

Saturday, November 17, 2018

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम -

Friday, November 16, 2018

चैटर्जी बहनों द्वारा बांसुरी प्रदर्शन का आयोजन -

Friday, November 16, 2018

आखिरी दिन कांग्रेस ने रोड शो में झोंकी ताकत -

Friday, November 16, 2018

स्टिंग ऑपरेशन केस : उमेश शर्मा को मिली जमानत -

Friday, November 16, 2018

त्रिवेंद्र एवं अजय भट्ट ने मांगे भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट -

Friday, November 16, 2018

निकाय चुनाव : 9399 लाइसेंसी शस्त्रों को किया गया जमा -

Friday, November 16, 2018

भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका : सीएम -

Thursday, November 15, 2018

स्टिंग मामला : नार्को व ब्रेन मैपिंग टेस्ट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक -

Thursday, November 15, 2018

हिमालया ने लॉन्च किया ‘‘खुश रहो, खुशहाल रहो’’ -

Thursday, November 15, 2018

नजूल भूमि पर बसे किसी भी परिवार को उजड़ने नहीं दिया जायेगा : सीएम -

Thursday, November 15, 2018

मेयर प्रत्याशी सुनील उनियाल गामा ने जनसंपर्क कर मांगे वोट -

Wednesday, November 14, 2018

भ्रष्टाचार तथा ब्लैकमनी पर बनाई गई पेंटिंग को खूब सराहा गया , जानिए खबर -

Wednesday, November 14, 2018

मधुमेह बढ़ाता है दिल के दौरे का खतरा ….. -

Wednesday, November 14, 2018

यूनाईटेड नेशस डेवलपमेंट प्रोग्राम के सदस्यों ने सीएम से की भेटवार्ता -

Wednesday, November 14, 2018

अपने आक्रोश को बनाया अपना हथियार बनीं पैरा ऐथलीट चैंपियन

kanchan lakhani

कंचन लखानी ने अपने आक्रोश को अपना हथियार बना लिया। 4 सितंबर 2008 को हुए एक हादसे ने अचानक उनकी जिंदगी बदल कर रख दी। एक रेल हादसे में उनका हाथ कट गया और स्पाइनल इंजरी के चलते कमर से नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद वह निराशा में डूब गईं, उनके मन में आत्महत्या करने के खयाल आने लगे। एक दिन वह अपने जीवन के बारे में सोच रही थीं। उस समय उन्होंने अपने अवसाद से बाहर निकलकर अपनी तकदीर खुद लिखने का फैसला कर लिया। उन्होंने कड़े परिश्रम के बाद राष्ट्रीय स्तर की पैरा ऐथलीट बनकर 2017 में उन्होंने राष्ट्रीय पैरा ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीते। जिसे दुनिया कमजोरी समझती थी, उसे उन्होंने चुनौती के तौर पर लिया और दुनिया के सामने एक उदाहरण बनकर सामने आईं। कंचन लखानी के मुताबिक 2008 से पहले वह रावल इंटरनैशनल स्कूल में प्राथमिक कक्षा के बच्चों को पढ़ाती थीं, लेकिन निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल दी। हादसे में उन्होंने अपना एक हाथ खो दिया। स्पाइनल इंजरी की वजह से कमर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। जब होश आया तो उन्होंने खुद को हॉस्पिटल में पाया। जब पता लगा कि पूरी जिंदगी वीलचेयर पर रहना पड़ेगा तो वह अवसाद का शिकार हो गईं। अस्पताल से जब वह घर पहुंचीं तो अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थीं। जब भी वीलचेयर पर बैठाया जाता था तो वह रोने लगतीं। कंचन ने बताया, ‘मैंने करीब 5-6 साल तक अपने आप को एक कमरे में एक तरह से बंद रखा और बहुत कम समय ही परिवार के साथ बिताती थी। बाहर से मिलने के लिए आने वाले लोग व रिश्तेदार तरह-तरह की बात करते थे और सहानुभूति जताते, जो मुझे तानों की तरह चुभते थे, लेकिन परिवार ने मेरा साथ नहीं छोड़ा और हिम्मत बढ़ाते रहे। काफी साल बीतने पर सोचा कि ऐसी ही रोती रहूंगी तो जिंदगी काटना मुश्किल होगा और डिप्रेशन से निकलने के प्रयास शुरू कर दिए। खुद को चुनौती दी और ऐसा करने की ठानी जिससे दुनिया मुझे जान सके।’ इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू करने के साथ ही कविताएं लिखना शुरू किया और फैशन शो में भी भाग लिया। कंचन ने बताया कि उन्होंने आत्मचिंतन के बाद भविष्य में आने वाली परेशानियों का सामना करने के लिए खुद को तैयार किया। सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेने के लिए मिशन जागृति से जुड़ीं और स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक करने के साथ ही स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पर्यावरण बचाओ जैसे अभियानों का भी हिस्सा बनीं। कंचन कहती हैं कि जिसे दुनिया ‘सामान्य’ होना कहती है, उस जिंदगी में शायद यह उपलब्धियां नहीं मिलतीं, लेकिन रेल हादसे में जीवन को नई दिशा दी और बताया कि कैसे बेफिकर होकर जीते हुए अपने मुकाम को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 2020 में पैरा ओलिंपिक होने वाले हैं। उसमें हिस्सा लेकर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना कंचन का ख्वाब है।

Leave A Comment