Breaking News:

देहरादून देश के दस शीर्ष रेलवे स्टेशनों की सूची में , जानिए खबर -

Wednesday, August 15, 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के न्यू इंडिया के सपने को करना है साकार : सीएम त्रिवेंद्र -

Wednesday, August 15, 2018

प्रदेश में हरेला पर्व हो सरकारी तौर पर आयोजित -

Wednesday, August 15, 2018

पत्रकार चारूचन्द के स्वास्थ्य का हाल जानने पहुंचे महानिदेशक सूचना दीपेन्द्र चौधरी एवं मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट -

Tuesday, August 14, 2018

शहीद प्रदीप सिंह रावत की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब -

Tuesday, August 14, 2018

उत्तराखंड : निष्कासित कर्मचारियों का उग्र आन्दोलन की चेतावनी -

Tuesday, August 14, 2018

उत्तराखंड : 343 किस्म की दवाओं को बेचने पर रोक -

Tuesday, August 14, 2018

त्रिवेंद्र सरकार की पर्यटन नीतियों के बदौलत पर्यटकों में आपार वृद्धि , जानिए खबर -

Tuesday, August 14, 2018

‘पलटन’ फिल्म के नए गीत के साथ आजादी का जश्न -

Tuesday, August 14, 2018

सूचना महानिदेशक दीपेन्द्र चौधरी नज़र आये शिक्षक की भूमिका में, जानिए खबर -

Monday, August 13, 2018

सीएम त्रिवेंद्र शहीद जवान प्रदीप सिंह रावत को दी श्रद्धांजलि -

Monday, August 13, 2018

उत्तराखंड : खिलाड़ी गरिमा जोशी को दवाओं के साथ दुआवों की जरूरत, जानिए खबर -

Monday, August 13, 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आधारित लघु फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग में सीएम हुए शामिल -

Monday, August 13, 2018

माँ ने कपड़े सिलकर दूध बेचकर बेटी को पाला आज देश की है टॉपर एथलीट, जानिए खबर -

Monday, August 13, 2018

मनुष्य जीवन अपने तक न हो सीमित,सबके सहयोग में बने भागीदार : सीएम त्रिवेंद्र -

Sunday, August 12, 2018

धाविका गरिमा जोशी के ईलाज का पूरा खर्च उठाएगी त्रिवेन्द्र सरकार -

Sunday, August 12, 2018

देहरादून फैशन वीक एंड लाइफ स्टाइल शो का आयोजन , जानिए खबर -

Sunday, August 12, 2018

राजपुर वूमेंस क्लब ने मनाया तीज , जानिए खबर -

Sunday, August 12, 2018

बुजुर्ग महिला को यूबीआई को देना ही पड़ेगा हर्जाना, जानिए खबर -

Sunday, August 12, 2018

जब धान की रोपाई करने खेत में उतरे मुख्यमंत्री ,जानिए खबर -

Sunday, August 12, 2018

अब पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के टैलेंट को भी दिया जाएगा महत्व जानिए ख़बर

narendra-modi

मोदी सरकार ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है, मोदी सरकार ने लैटरल एंट्री के माध्यम से 10 संयुक्त सचिव (जॉइंट सेक्रेटरी) पद के लिए अधिसूचना जारी करते हुए आवेदन आमंत्रित किए हैं. सरकार के इस फैसले के बाद अब संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से आयोजित होने वाली सिविल सर्विसेज परीक्षा पास किए बिना भी योग्य उम्मीदवार सरकार में वरिष्ठ अधिकारी बन सकते हैं. लेकिन इस कवायद की राजनीतिक गलियारे में विपक्ष की ओर से जमकर आलोचना की जा रही है तो वहीं अपनी ईमानदारी के लिए खासे चर्चित रहे आईएएस अशोक खेमका ने इस कदम का समर्थन किया है. पूर्व आईएएस और कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की और इसकी मंशा पर सवाल भी उठाया. नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को लेकर उन्होंने कहा, ‘यह गलत है. इसमें इंडियन नेशनल का जिक्र किया गया है, इंडियन सिटीजन नहीं. तो क्या बाहर रहने वालों को भी बनाएंगे. उन्होंने कहा, सरकार बीजेपी और संघ के लोगों को बैकडोर से घुसेड़ना चाहती है. सरदार पटेल ने अधिकारियों की इस श्रेणी को स्टील फ्रेम कहा था. उनका मानना था कि नेता और सरकारें आती जाती रहेंगी, लेकिन इस श्रेणी के अधिकारियों पर उसका कोई प्रभाव नहीं होना चाहिए, यह उनके विजन के साथ भी खिलवाड़ है. आरजेडी के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना की है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि यह मनुवादी सरकार यूपीएससी को दरकिनार कर बिना परीक्षा के नीतिगत और संयुक्त सचिव के महत्वपूर्ण पदों पर मनपसंद व्यक्तियों को कैसे नियुक्त कर सकती है? यह संविधान और आरक्षण का घोर उल्लंघन है. कल को ये बिना चुनाव के प्रधानमंत्री और कैबिनेट बना लेंगे. इन्होंने संविधान का मजाक बना दिया है. हालांकि विख्यात आईएएस अशोक खेमका ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट किया कि इससे सार्वजनिक सेवाओं में बाहर की प्रतिभाओं के इस्तेमाल किया जा सकेगा. सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार इन पदों के लिए वही आवेदन कर सकते हैं, जिनकी उम्र 1 जुलाई तक 40 साल हो गई है और उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना आवश्यक है. उम्मीदवार को किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी निजी कंपनी में 15 साल का अनुभव होना भी जरुरी है. इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति तीन साल तक के लिए की जाएगी. सरकार इस करार को 5 साल तक के लिए बढ़ा भी सकती है. नौकरशाही में लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी, लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया. फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई. लेकिन इस संबंध में पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई.

Leave A Comment