Breaking News:

व्यंग्यः हर मानुष को पता चल गया है कि मीटू क्या है…. -

Wednesday, October 17, 2018

रामपाल समेत 15 दोषियों को उम्रकैद -

Tuesday, October 16, 2018

वित्त आयोग की बैठक में अहम निर्णय , जानिए खबर -

Tuesday, October 16, 2018

उत्तराखंड : राज्यपाल ने जरूरतमंद बच्चो एवं वृद्धजन के बीच बिताये समय -

Tuesday, October 16, 2018

दशहरा को लेकर डीएम व एसएसपी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा -

Tuesday, October 16, 2018

सिंधु, साइना डेनमार्क ओपन बैडमिंटन में भारतीय चुनौती संभालेंगी -

Tuesday, October 16, 2018

उत्तराखंड : निकाय चुनाव का मतदान 18 नवंबर को -

Monday, October 15, 2018

व्यंग्यः कितना दर्द दिया मीटू के टीटू ने…..! -

Monday, October 15, 2018

टिहरी गढ़वाल के बंगसील स्कूल में सफाई अभियान की अनोखी पहल -

Monday, October 15, 2018

गडकरी, एम्स डायरेक्टर समेत आठ लोगों के खिलाफ मातृसदन दर्ज कराएगा हत्या का मुकदमा -

Monday, October 15, 2018

साधन विहीन व निर्बल वर्ग के बच्चों को यथा सम्भव पहुंचे सहायता : राज्यपाल -

Monday, October 15, 2018

#MeToo: बॉलिवुड की अभिनेत्रियों ने आरोपियों के साथ काम करने से किया इंकार -

Monday, October 15, 2018

भारतीय टीम ने वेस्ट इंडीज को हराकर हासिल की शानदार जीत -

Monday, October 15, 2018

“मैड” के सपने को मिला नया नेतृत्व -

Sunday, October 14, 2018

देश के लिए डॉ.कलाम का अद्वितीय योगदान रहा : सीएम त्रिवेंद्र -

Sunday, October 14, 2018

डिप्रेशन विश्व में हार्ट अटैक के बाद मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण -

Sunday, October 14, 2018

रूपातंरण कार्यक्रम सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय भीः राज्यपाल -

Sunday, October 14, 2018

केदारनाथ यात्रा : 7 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या -

Sunday, October 14, 2018

“उपहार” का निराश्रित बेटियों की शादी में सराहनीय प्रयास -

Sunday, October 14, 2018

अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करे कार्य : सीएम -

Saturday, October 13, 2018

आखिर कितनी और जान लेगी दहेज प्रथा

pratha

दहेज प्रथा भारत में बहुत बडी सामाजिक बुराइयों में से एक है। आये दिन दहेज के कारण मृत्यु के समाचार सुनने को मिलते हैं। इस दहेज रूपी राक्षस द्वारा माता पिताओं की बहुत सी बेटियां उनसे छीन ली गई है। हमारे समाज में प्रचलित भ्रष्टाचार के कारणों में से अधिकतर दहेज का कारण है। लोग गैर कानूनी रूप से धन संचय करते हैं। क्योंकि उन्हें अपनी पुत्रियों की शादी में दहेज पर भारी खर्च वहन करना पडता है। यह बुराई समाज को खोखला कर रही है। और वास्तविक प्रगति अवरूद्ध हो गई है। दहेज प्रथा वर्तमान भारतीय समाज की ही प्रथा नहीं है। यह हमें हमारे भूतकाल में विरासत में मिली है। हमारी पुराण कथाओं ने माता पिता द्वारा अपनी पुत्रियों को अच्छा दहेज दिये जाने का उल्लेख है। यह प्रथा किसी रूप में विदेशों में भी प्रचलित थी। सेल्यूकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त मौर्य को अपनी पुत्री के विवाह में काफी आभूषण हाथी और अन्य सामान दिया था। दूसरे देशों में भी यह प्रथा है कि माता पिता नव विवाहित जोडे को उपहार और भेंट देते है। मातृ प्रधान प्राचीन समाजों के अतिरिक्त लगभग सभी समाजों में यह प्रथा प्रचलित है। वास्तव में देखा जाये तो प्रथा में कोई खराबी नहीं है। यदि दसको सीमा के अन्तर्गत रखा जाये तो यह स्वस्थ रिवाज है। नकदी या उपहार के रूप में नव विवाहित सम्पत्ति को जो कुछ दिया है। उससे वे आसानी से अपना जीवन प्रारम्भ कर सकते है। किन्तु समस्त बोझ लडकी के माता पिता ही क्यों उठाएं? यह प्रथा बुराई इसलिए बन गई है कि यह सीमा पार कर गई है। जबकि पहले दहेज प्रेम और स्नेह का प्रतीक था। अब तो यह व्यापार या सौदेबाजी हो गई है। सभी भावनात्मक पहलुओं को समाप्त कर इसने निन्दनीय भौतिकवादी रूप ग्रहण कर लिया है। द्यृणास्पद बुराई के द्वारा भारतीय समाज के भवन को ही खतरा पैदा हो गया है। भारतीय समाज में इस प्रथा के प्रचलन का पहला कारण महिलाओं की पुरूषों पर आर्थिक निर्भरता है। अधिकतर पत्नी अपनी जीविका के लिए पति पर पूर्णरूपेण निर्भर रहती है। और पति इसकी कीमत अपनी पत्नी के माता पिताओं से माँगता है। दूसरे महिलाओं को समाज में निम्न स्तर प्रदान किया जाता है। उनको वस्तु समझा जाता है। उसके अतिरिक्त भारतीय समाज में कौमार्य पवित्रता पर बहुत बल दिया जाता है। भारतीय माता पिता को अपनी पुत्री का विवाह एक विशेष समय पर किसी उपयुक्त लडके साथ करना होता है। चाहे कितना ही मूल्य देना या त्याग करना पडे।

Leave A Comment