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Sunday, July 21, 2019

एक प्रयास से कचरे का ढेर बना , 2 एकड़ का खूबसूरत पार्क -

Sunday, July 21, 2019

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Saturday, July 20, 2019

नगर निगम के अब नही काटने पड़ेंगे माता-पिता को चक्कर , जानिए ख़बर -

Saturday, July 20, 2019

पश्चिमी यूपी से आ रहे अपराधियों को रोकना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती -

Saturday, July 20, 2019

समाजिक आर्थिक उन्नयन से आयेगी समाज में जागृति : मुख्यमंत्री -

Saturday, July 20, 2019

सीएम त्रिवेंद्र ने फ्री मेडिकल कैम्प का किया शुभारंभ -

Saturday, July 20, 2019

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परिवहन के क्षेत्र में जनता के प्रति सीएम त्रिवेंद्र रहे अटल -

Friday, July 19, 2019

जल संरक्षण सरकार की प्राथमिकताः सीएम त्रिवेंद्र -

Friday, July 19, 2019

होम स्टे योजना की जानकारी देने दूरस्थ गांव पहुंचे डीएम -

Friday, July 19, 2019

पांचवे देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रवेश आमंत्रण, जानिए खबर -

Friday, July 19, 2019

हिमालयन कान्क्लेवः हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि अपने अनुभवों को करेंगे साझा : सीएम -

Friday, July 19, 2019

गरीब छात्रों की मदद के लिए किताबें एकत्र करता है यह युवक -

Friday, July 19, 2019

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Friday, July 19, 2019

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Thursday, July 18, 2019

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Thursday, July 18, 2019

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Thursday, July 18, 2019

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Thursday, July 18, 2019

सिंधु की क्वॉर्टर फाइनल में एंट्री, जानिए ख़बर -

Thursday, July 18, 2019

आयुर्वेद की अमृता यानी गिलोय के औषधीय लाभ, जानिए खबर

पिछले दिनों जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा तो लोग आयुर्वेद की शरण में पंहुचे। इलाज के रूप में गिलोय का नाम खासा चर्चा में आया। गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है। गिलोय की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में लाया जाता है। गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ साथ स्वाद में कडवा और हल्की झनझनाहट लाने वाला होता है। गिलोय के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। इसमें सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता है। इसे नीम और आंवला के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं। इसे खून की कमी, पीलिया और कुष्ठ रोगों के इलाज में भी कारगर माना जाता है। सूजन कम करने के गुण के कारण, यह गठिया और आर्थेराइटिस से बचाव में अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय के पाउडर को सौंठ की समान मात्रा और गुगुल के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से इन बीमारियों में काफी लाभ मिलता है। इसी प्रकार अगर ताजी पत्तियां या तना उपलब्ध हों तो इनका ज्यूस पीने से भी आराम होता है। आयुर्वेद के हिसाब से गिलोय रसायन यानी ताजगी लाने वाले तत्व के रुप में कार्य करता है। इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाता है। यह शरीर को बैक्टिरिया जनित रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग सेक्स संबंधी रोगों के इलाज में भी किया जाता है। लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से बचा जा सकता है। गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए। शरीर में पाचनतंत्र को सुधारने में गिलोय काफी मददगार होता है। गिलोय के चूर्ण को आंवला चूर्ण या मुरब्बे के साथ खाने से गैस में फायदा होता है। गिलोय के ज्यूस को छाछ के साथ मिलाकर पीने से अपाचन की समस्या दूर होती है साथ ही साथ बवासीर से भी छुटकारा मिलता है। गिलोय में शरीर में शुगर और लिपिड के स्तर को कम करने का खास गुण होता है। इसके इस गुण के कारण यह डायबीटिज टाइप 2 के उपचार में बहुत कारगर है।गिलोय एडाप्टोजेनिक हर्ब है अतरूमानसिक दवाब और चिंता को दूर करने के लिए उपयोग अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय चूर्ण को अश्वगंधा और शतावरी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें याददाश्त बढ़ाने का गुण होता है। यह शरीर और दिमाग पर उम्र बढ़ने के प्रभाव की गति को कम करता है। अपने अनगिनत गुणों के साथ गिलोय सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है परंतु कुछ लोगों में इससे विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे कुछ लोगों की पाचन क्रिया खराब हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।

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