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ईवीएम में छेड़छाड़ पर राजनीतिक दलों को माननी होगीं चुनाव आयोग की 10 शर्तें

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नई दिल्ली। देश में ईवीएम को लेकर कई राजनीतिक दलों ने आवाज उठाई और आरोप लगाया कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है, चुनाव आयोग लगातार इन आरोपों को नकारता रहा है। चुनाव आयोग का दावा है कि ईवीएम से छेड़छाड़ संभव नहीं है। अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है। लेकिन आरोप लगाने वाले दलों ने चुनाव आयोग की नहीं मानी। वहीं दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने विधानसभा में ईवीएम जैसी एक मशीन को लाकर छेड़छाड़ दिखाने की कोशिश की। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे हैकर हैं जो यह साबित करेंगे कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है या फिर इससे मनचाहे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। वहीं, इन सब आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने ईवीएम में छेड़छाड़ साबित करने के लिए राजनीतिक दलों को खुली चुनौती पेश की है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि यह चुनौती कुछ शर्तों के साथ हैं। आइए देखें क्या हैं ये शर्तें।

1-राजनीतिक पार्टियां हालिया विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनों का इस्तेमाल कर सकती हैं लेकिन विदेशी विशेषज्ञों के इसमें भाग लेने की पाबंदी है।
2-यह चुनौती सिर्फ राष्ट्रीय और राज्य पार्टियों के लिए खुली होगी जिन्होंने पांच राज्यों – उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड , मणिपुर, गोवा और पंजाब में हुआ चुनाव लड़ा था।
3-उन्हें ईवीएम की मदरबोर्ड बदलने और गड़बड़ी को बाद की तारीख में साबित करने के लिए उसे घर ले जाने की इजाजत नहीं होगी। आयोग ने कहा कि बदली हुई चिप के साथ ईवीएम चुनाव आयोग की ईवीएम नहीं होगी, बल्कि उस जैसी दिखेगी।
4-प्रतिभागियों ह्हर पार्टी से तीन सदस्यΩ को ईवीएम की पड़ताल की इजाजत होगी ताकि वे सर्किट, चिप और मदरबोर्ड की जांच कर सके। पांच राज्यों की विधानसभा सीटों से उनकी पंसद की चार ईवीएम उन्हें दी जाएंगी।
5-चुनौती के बारे में फैसला मुख्य रूप से आयोग की तकनीकी विशेषज्ञ समिति के सदस्य करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का पालन हो और मशीनें क्षतिग्रस्त ना हो।
6-चुनौती करीब 4-5दिन चलेगी, जो प्रतिभागियों की संख्या पर निर्भर है। इसके लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 26 मई है।
7-हर प्रतिभागी समूह को मशीन हैक करने के लिए चार घंटे का व७ दिया जाएगा।
8-वर्ष 2009 की चुनौती का आयोजन विज्ञान भवन में हुआ था लेकिन इस बार इसका आयोजन स्थल निर्वाचन सदन होगा जो आयोग का मुख्यालय है।
9-जैदी ने कहा कि यह दो भागों में होगा। पहले भाग में पार्टियों को यह साबित करना होगा कि किसी खास उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम से छेड़छाड़ हुई थी और मशीन में दर्ज नतीजों में बदलाव कर ऐसा किया गया था।
10-वहीं, चुनौती के दूसरे भाग में प्रतिभागियों को यह साबित करना होगा कि इन ईवीएम में मतदान के दिन या उस दिन के पहले गड़बड़ी की गई थी।

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