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‘ऐम्बुलेंस मैन’ ने बचाई अब तक सैकड़ो की जान, जानिए खबर

ambulance

फ़तेहपुर | जीवन में यदि कुछ अच्छा करना है तो ‘ऐम्बुलेंस मैन’ की तरह लोगो की मदद किया जा सकता है | अस्पताल में सायरन बजाती हुए एक प्राइवेट ऐम्बुलेंस पहुंचती है। गाड़ी की ड्राइविंग सीट से उतरे शख्स ने अच्छे कपड़े पहन रखे हैं, लेकिन वह फुर्ती से एक घायल बच्ची को लेकर इमर्जेंसी में पहुंचते हैं। इशारा मिलते ही अस्पताल स्टाफ ऐम्बुलेंस की तरफ दौड़ता है और अंदर मौजूद एक स्टाफ नर्स घायल को इमरजेंसी पहुंचाता है| अशोक कहते है कई बार निजी यात्रा के दौरान भी मुझे कोई घायल दिख जाता है तो उसे अस्पताल पहुंचाना अपना फर्ज मानता हूं। इसके लिए गाड़ी में एक प्लास्टिक शीट और दस्ताने साथ रखता हूं। वह कहते हैं कि युवाओं को हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए। वह खुद अपनी रक्षा करें और जरूरत पर दूसरों की भी मदद करें। इससे बड़ी पूजा या इबादत दूसरी कोई नहीं। देखने और सुनने में यह एक सामान्य बात लगती है, लेकिन इस सेवा के पीछे हैं एक ऐसे शख्स हैं, जो लंबे समय से घायलों के लिए ‘भगवान’ बनकर लगातार दौड़ रहे हैं। फोन पर मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर यूपी में कानपुर से करीब 83 किलोमटीर दूर फतेहपुर के अशोक सिंह ‘तपस्वी’ (55) अब तक करीब 900 घायलों को समय पर इलाज दिलवा चुके हैं। वहीं 340 शवों को ससम्मान पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचा चुके हैं। यह सब वह अपने निजी खर्च से करते हैं। जुलाई-2011 में मलवां में कालका मेल भीषण एक्सिडेंट का शिकार हुई थी। रेलवे और जिला प्रशासन की ऐम्बुलेंस कम पड़ जाने के कारण अशोक सिंह ने 20 घंटे तक लगातार घायलों को अस्पताल पहुंचाया था।

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