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कोरोना कहर : उत्तराखंड में कोरोना मरीजों की संख्या पहुँची 500 -

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टीवी अभिनेत्री का सड़क हादसे में हुई मौत -

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बिहार की बेटी ज्योति के मुरीद हुए विदेशी भी, जानिए खबर -

Thursday, May 28, 2020

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’’ का शुभारंभ हुआ -

Thursday, May 28, 2020

उत्तराखंड : कोरोना मरीजो की संख्या हुई 493 -

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Wednesday, May 27, 2020

देहरादून से विशेष ट्रेन द्वारा हज़ारो मजदूर बिहार एंव उत्तर प्रदेश के लिए रवाना, जानिए खबर -

Wednesday, May 27, 2020

उत्तराखंड : कोरोना मरीजो की संख्या हुई 469, आज 69 मरीज मिले कोरोना के -

Wednesday, May 27, 2020

ऋषिकेश-धरासू हाइवे पर 440 मीटर लंबी टनल हुई तैयार, सीएम त्रिवेंद्र ने जताया आभार -

Wednesday, May 27, 2020

कोरोना का कहर : उत्तराखंड में कोरोना मरीज हुए 438 -

Wednesday, May 27, 2020

उत्तराखंड : राज्य में कोरोना मरीजो की संख्या हुई 401 -

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Tuesday, May 26, 2020

उत्तराखंड : प्रदेश भाजपा ने विभिन्न समितियों का गठन किया -

Tuesday, May 26, 2020

कोरोना संक्रमित लोगों की जाँच कर रहे अस्पतालो को मिलेगा 50 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि -

Tuesday, May 26, 2020

उत्तराखंड : 51 कोरोना मरीज और मिले, संख्या हुई 400 -

Tuesday, May 26, 2020

नेक कार्य : पर्दे के हीरो से रियल हीरो बने सोनू सूद -

Monday, May 25, 2020

संक्रमण का दौर है सभी जनता अपनी जिम्मेदारियों को समझे : सीएम त्रिवेंद्र -

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ज्योति चाहर ने ब्लॉगिंग से जीती दुनिया

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यह सत्य है जहां चाह वहां राह और इसको सच किया है ज्योति चाहर ने | बेहद बुरे वक्त में भी हिम्मत नहीं हारी और अपने पैशन को ही प्रोफेशन बना लिया अगर आप वाकई कुछ कर गुज़रना चाहते हैं तो आपके लिए रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ ज्योति चाहर के साथ, ज्योति चाहर का परिवार 90 के दशक में हरियाणा के एक छोटे से गांव से आकर दिल्ली के नज़फगढ़ इलाके में बस गया. यह वह दौर था जब उनके यहां बेहद कम उम्र में ही लड़कियों की शादी कर दी जाती थी. चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी ज्योति के कंधों पर परिवार जिम्मेदारियों का बोझ था. जल्द से जल्दी नौकरी ढूंढन उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी. नौकरी न मिलने की सूरत में घरवाले रिश्तेदारों और पड़ोसियों के दबाव में उनकी भी शादी करा देते. हालांकि उनके घरवालों ने उन्हें आगे पढ़ाने का फैसला लिया. ग्रेजुएशन करने के बाद ज्योति ने 6-7 महीने बिना पैसों के ही काम किया. आखिरकार उन्हें एक नौकरी मिली जिससे किसी तरह गुज़ारा चल रहा था. ज्योति अपने हालातों से जूझ ही रही थीं कि किस्मत ने उन्हें सबसे बड़ा झटका दे दिया जिससे संभल पाना आसान नहीं था.

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