Breaking News:

कोरोना से बचे : उत्तराखंड में आज कोरोना मरीजो की संख्या हुई 958 -

Monday, June 1, 2020

उत्तराखंड : कोरोना मरीजो की संख्या 929 हुई, चम्पावत में 15 नए मामले मिले -

Monday, June 1, 2020

जागरूकता: तंबाकू छोड़ने की जागरूकता के लिए स्वयं तत्पर होना जरूरी -

Monday, June 1, 2020

मदद : गांव के छोटे बच्चों को पढ़ा रही भावना -

Monday, June 1, 2020

नही रहे मशहूर संगीतकार वाजिद खान -

Monday, June 1, 2020

नेक कार्य : जरूरतमन्दों के लिए हज़ारो मास्क बना चुकी है प्रवीण शर्मा -

Sunday, May 31, 2020

कोरोना से बचे : उत्तराखंड में कोरोना मरीजो की संख्या पहुँची 907, आज 158 कोरोना मरीज मिले -

Sunday, May 31, 2020

सोशल डिस्टन्सिंग के पालन से कोरोना जैसी बीमारी से बच सकते है : डाॅ अनिल चन्दोला -

Sunday, May 31, 2020

कोरोंना से बचे : उत्तराखंड में मरीजो की संख्या 802 हुई -

Sunday, May 31, 2020

उत्तराखंड : 1152 लोगों को दून से विशेष ट्रेन से बेतिया बिहार भेजा गया -

Sunday, May 31, 2020

पूर्व सीएम हरीश रावत ने किया जनता से संवाद, जानिए खबर -

Sunday, May 31, 2020

प्रदेश में खेती को व्यावसायिक सोच के साथ करने की आवश्यकताः सीएम त्रिवेंद्र -

Sunday, May 31, 2020

अनलॉक के रूप में लॉकडाउन , जानिए खबर -

Saturday, May 30, 2020

कोरोना का कोहराम : उत्तराखंड में आज कोरोना मरीजो की संख्या हुई 749 -

Saturday, May 30, 2020

रहा है भारतीय पत्रकारिता का अपना एक गौरवशाली इतिहास -

Saturday, May 30, 2020

पहचान : फ्री ऑन लाइन कोचिंग दे रहे फुटबाल कोच विरेन्द्र सिंह रावत, जानिए खबर -

Saturday, May 30, 2020

एक वर्ष की सफलता ने प्रधानमंत्री मोदी को बनाया विश्व नेता : सीएम त्रिवेंद्र -

Saturday, May 30, 2020

श्री विश्वनाथ मां जगदीशिला डोली के आयोजन स्थलों पर पौधारोपण होगा : नैथानी -

Friday, May 29, 2020

हरेला पर 16 जुलाई को वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाएगाः सीएम -

Friday, May 29, 2020

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन -

Friday, May 29, 2020

धरती का सीना छलनी करके आखिर क्या मिला

आज 45वां पृथ्वी दिवस यानि 22 अप्रैल का दिन है, विश्व के 192 देश पृथ्वी के प्रति आज अपना चिंतन ब्यक्त करेंगे… जीवन दायनी पृथ्वी पर हो रहे उथल पुथल के लिए हमें तय करना होगा हम जिस प्रकार का जीवनयापन कर रहे हैं, क्या उससे आने वाली पीढियां हमें माफ़ कर पायेंगी? विश्व की जनसँख्या आज 7 अरब के पार पहुँच चुकी है, अकेले भारत पर गौर करें तो 68 वर्ष पूर्व जब भारत आजाद हुवा था तब भारत की जनसँख्या मात्र 30 करोड़ थी जो आज बढ़ कर 130 करोड़ हो चुकी है और ये सरकारी आंकड़ा है जिस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह रहता है, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल आदि देशों के भी करोड़ों लोग अवैध रूप से भारत में रहते हैं| संसाधनों की बात करें तो भारत में आज़ादी के समय से ही भुखमरी चल रही थी जबकि तब जनसँख्या मात्र 30 करोड़ थी, ऐसे में आज ये और भी सोचनीय विषय हो जाता है कि आज भारत की 130 करोड़ की जनसँख्या के लिए खाद्यान कहाँ पैदा होता होगा? कहाँ इतनी जनसँख्या रहती होगी ? क्या खाती होगी ? कहाँ चलती होगी ? और कैसे चलती होगी ? क्या हमने कभी इस ओर गौर किया ?

आज विश्व भर में 7 अरब से उपर की जनसँख्या हो चुकी है, ऐसे में गौर करने वाली बात ये है कि केवल जनसँख्या ही नहीं बढ़ी बल्कि मनुष्य की भौतिक आवश्यकताएं भी साथ-साथ बढीं हैं ? भवन, गाड़िया, सड़क, कारखाने, होटल, मॉल, दुकान, रेल, जहाज, मोबाइल, टीवी, फ्रिज, एसी, कूलर, पंखे, बल्ब, प्लास्टिक, लोहा, कांच, कोयला, तेल, गैस, चूल्हा, चिमनी, कम्प्यूटर, फैक्स, फोटो स्टेट मशीन, बिजली परियोजनायें, मोटर, बैट्री, टाइल, ईंट, सीमेंट, पेंट, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च, आश्रम खिलोने आदि ? ये सब बढ़ा है और बेतहाशा बढ़ा है और ये सब हमें किसने दिया ? हम इंसानों ने अपनी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जिस भी वस्तु की आवश्यकता हुई वो हमने पृथ्वी से हासिल की इतना ही नहीं हमें जो आवश्यक नहीं भी था वो हमने धरती का सीना छलनी करके हासिल की ? हम हिन्दू,मुसलमान,सिख,इसाई,बौध,पारसी,यहूदी चाहे किसी भी समुदाय से हों, चाहे कितने ही पूंजीपति या गरीब हों हम सबका अस्तित्व तभी तक है जब तक ये धरती और इसका पर्यावरण सुरक्षित है, यहाँ शुद्ध पीने का पानी, खाने के लिए पोष्टिक खाद्यान और साँस लेने के लिए शुद्ध हवा है | धरती को सुरक्षित रखने की नैतिक जिम्मेदारी हम मानवों पर है और हम मानव ही इसको नष्ट करने पर तुले हैं| हमें धरती के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा | हमें धरती पर कम से कम कंक्रीट, जीव-जंतुओं,पशु-पक्षियों की सुरक्षा, शुद्ध पानी के लिए वृक्षारोपण, कूड़े का जैविक निस्तारण, जैविक खेती, सौर एवं पवन उर्जा का स्त्माल, ग्रीन-हाउस गैसों में कमी लाने के लिए ठोस और कारगर कदम उठाने होंगे, तभी जाकर हम धरती को सुरक्षित रख पायेंगे |

भार्गव चन्दोला (सामाजिक कार्यकर्ता, हिमालय बचाओ आन्दोलनकारी)

Leave A Comment