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नहीं चेते तो 10 साल में नहीं दिखेगी गोरैया

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नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ रहा प्रदूषण, संचार साधनो का बेतहाशा उपयोग, भोजन और ठहरने की निरंतर होती जा रही कमी पक्षियों की जान ले रही है। इस समस्या से गोरैया सहित दुर्लभ पक्षी या तो लुप्त हो चुके हैं या फिर लुप्त होने के कगार पर हैं। दिल्ली वन विभाग के आंकड़ों में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में दुर्लभ पक्षियों की 5 प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं। सात प्रजातियां लुप्त होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यदि यही हाल रहा तो आने वाले 10 सालों में गोरैया व बची हुई अन्य प्रजातियां भी लुप्त हो चुकी होंगी। सरकार इस समस्या से दिल्ली सरकार अनभिज्ञ नहीं है, मगर सरकार का कहना है कि हालात ऐसे हो चुके हैं कि इस क्षेत्र में सरकार के स्तर पर ही सभी कुछ संभव नहीं दिख रहा है। दिल्ली के वन एवं पर्यावरण मंत्री कहते हैं कि पक्षियों की होती कमी चिंता का विषय है। मगर इनके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। गोरैया और अन्य पक्षियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दिल्ली सरकार असोला भाटी वन्य जीव अभयारण्य में कार्यक्रम का आयोजन करती है। इस दौरान नेचर वकिं भी आयोजित की जाती है। राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने एवं वहां की हरियाली को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में 9 किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ाया गया है। वन क्षेत्रों में जलाशयों का विकास किया गया है। इस सब के पीछे का उद्देश्य पक्षियों को बचाना है। वहीं पक्षियों के संरक्षण के लिए काम कर रहे फैयाज कुदसर कहते हैं कि पक्षी कैसे बचेंगे आज सबसे बड़ी चुनौती उनके भोजन और आवास को लेकर है। गोरैया जैसे छोटे पक्षियों के लिए न ही रहने की ठौर बची है और न ही उनके लिए भोजन की व्यवस्था बची है। खेत खलिहान नहीं हैं। संचार के साधनो का हो रहा बेतहाशा उपयोग पक्षियों की जान ले रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो 10 साल में गोरैया सहित अन्य कई पक्षियों का नामोनिशान ही मिट चुका होगा। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से विलुप्त हो चुके पक्षी। देशी गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध, राज गिद्ध, काला गिद्ध व सफेद गिद्ध। कुछ साल पहले तक दिल्लीएनसीआर क्षेत्र में काला गिद्ध देखा गया है, अब नहीं है।

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