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लापता व्यक्ति का शव पाषाण देवी के मंदिर पास झील से बरामद हुआ -

Saturday, April 4, 2020

देहरादून : स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 9482 भोजन पैकेट वितरित किये गये -

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उत्तराखंड में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या हुई 22 -

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सोशियल पॉलीगोन ग्रुप ऑफ कंपनी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख का चेक दिया -

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लॉकडाउन : रचायी जा रही शादी पुलिस ने रुकवाई, 15 लोगों पर मुकदमा दर्ज -

Friday, April 3, 2020

उत्तराखंड : त्रिवेन्द्र सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए जारी किये 85 करोङ रूपए -

Friday, April 3, 2020

ऋषियों का मूल मंत्र ’तमसो मा ज्योतिर्गमय’ एक अद्भुत आइडियाः स्वामी चिदानन्द सरस्वती -

Friday, April 3, 2020

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किया रक्तदान -

Friday, April 3, 2020

कोरोना वॉरियर्स का सभी करे सहयोग : सीएम त्रिवेंद्र -

Friday, April 3, 2020

किन्नरों ने लोगों को भोजन, राशन वितरित किया -

Thursday, April 2, 2020

3 अप्रैल से बैंक सुबह 8 से अपरान्ह 1 बजे तक खुले रहेंगे -

Thursday, April 2, 2020

पहल : तीन बेटियों ने डेढ़ सौ परिवारों के पास घर-घर पहुंचाया खाने का सामान -

Thursday, April 2, 2020

हम सब उत्तराखंड पुलिस को सहयोग करे: दीपक सक्सेना -

Thursday, April 2, 2020

लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जाए : सीएम त्रिवेन्द्र -

Thursday, April 2, 2020

डीडी उत्तराखंड का प्रसारण 24 घंटे का हुआ -

Wednesday, April 1, 2020

फेक न्यूज या गलत जानकारी देने पर प्रशासन द्वारा होगी कानूनी कार्रवाई -

Wednesday, April 1, 2020

लाकडाऊन के दौरान रखे संयम: पीआरएसआई देहरादून चैप्टर -

Wednesday, April 1, 2020

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Wednesday, April 1, 2020

मुंबई की सड़कों पर खाना बाँटते नज़र आये अली फजल, जानिए कैसे -

Wednesday, April 1, 2020

पितृपक्ष में क्या करे क्या ना करे , जानिये ख़बर…

partapaksha

ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष में हमारे पितर धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं. ये पितृ पशु पक्षियों के माध्यम से हमारे निकट आते हैं. जिन जीवों तथा पशु पक्षियों के माध्यम से पितृ आहार ग्रहण करते हैं वो हैं – गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी. श्राद्ध के समय इनके लिए भी आहार का एक अंश निकाला जाता है, तभी श्राद्ध कर्म पूर्ण होता है. श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं – गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के लिए. इन पांच अंशों का अर्पण करने को पञ्च बलि कहा जाता है | सबसे पहले भोजन की तीन आहुति कंडा जलाकर दी जाती है. श्राद्ध कर्म में भोजन के पूर्व पांच जगह पर अलग-अलग भोजन का थोड़ा-थोड़ा अंश निकाला जाता है. गाय, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए पत्ते पर तथा कौवे के लिए भूमि पर अंश रखा जाता है. फिर प्रार्थना की जाती है कि इनके माध्यम से हमारे पितर प्रसन्न हों.

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