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पिरूल से विद्युत उत्पादन के द्वितीय चरण के प्रस्तावों को मिली मंजूरी

देहरादून । मुख्य सचिव की अध्यक्षता में परियोजना अनुमोदन समिति की बैठक आयोजित की गई जिसमें पिरूल (चीड़ की पत्तियां) से विद्युत उत्पादन एवं ब्रिकेट बनाये जाने हेतु द्वितीय चरण में प्राप्त प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उरेडा द्वारा इस नीति में 10 कि.वा. से 250 कि.वा. क्षमता तक की विद्युत उत्पादन इकाईयों के साथ-साथ 2000 मि.टन क्षमता तक की बायोमास ब्रिकेटिंग तथा बायो आयल इकाईयों की स्थापना कराये जाने हेतु द्वितीय चरण में दिनांक 26 जून, 2019 को  त्च् िके माध्यम से प्रस्ताव आमंत्रण किये गये थे जिसके सापेक्ष अन्तिम तिथि दिनांक 30 अगस्त, 2019 तक कुल 17 प्रस्ताव विभिन्न फर्मोंध्विकासकर्ताओं द्वारा जमा कराये गये, जिसमें 385 कि.वा क्षमता के 16 प्रस्ताव पिरूल से विद्युत उत्पादन हेतु एवं 1200 मी.टन का 01 प्रस्ताव ब्रिकेट बनाये जाने हेतु प्राप्त हुआ।मुख्य परियोजना अधिकारी वैकल्पिक ऊर्जा श्री अरूण कुमार त्यागी ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में प्रति वर्ष लगभग 6 लाख मि.टन पिरूल (चीड़ की पत्तियां) उपलब्ध होती हैं, इसके अतिरिक्त लगभग 8 मि.टन अन्य बायोमास जैसे कृषि उपज अवशेष, लैन्टना आदि भी उपलब्ध है। इस प्रकार प्रति वर्ष 14 लाख मि.टन पिरूल एवं अन्य बायोमास उपलब्ध हो सकता है। इस उपलब्ध बायोमास से लगभग 150 मे.वा. विद्युत उत्पादन एवं 2000 मिट्रिक टन तक की ब्रिकेटिंग एवं बायो आयल उत्पादन की सम्भावना है। राज्य सरकार द्वारा पिरूल से विद्युत उत्पादन एवं ब्रिकेटिंग इकाईयों की स्थापना  के लिये इन क्षेत्रों में स्थित वन पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंगल दलों आदि संस्थाओं को अपने क्षेत्र में पिरूल एकत्रीकरण करने तथा सम्बन्धित उद्यमी को उपलब्ध कराये जाने के लिये रू. 1ध्- प्रति कि.ग्रा. की दर से राज सहायता के रूप में दिये जाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। सम्बन्धित संस्थाओं द्वारा एकत्रित किये गये पिरूल को उद्यमियों को विक्रय किये जाने के लिए  डवन्  किया जायेगा तथा आपसी सहमति से निर्धारित दरों पर विक्रय किया जायेगा। बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा, सचिव वित्त सौजन्या, अपर सचिव ऊर्जा आलोक शेखर तिवारी, मुख्य परियोजना अधिकारी, वैकल्पिक ऊर्जा अरूण कुमार त्यागी आदि उपस्थित थे।

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