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बर्बादी का दूसरा नाम है नशा….

ड्रग्स करता है जीवन को नष्ट

नशा व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक आर्थिक तौर पर अपंग बना देता है। नशे से विकृत मानसिकता के कारण व्यक्ति अपराध की ओर अग्रसर हो जाता है। नशे को समाज से मिटा देना ही सभी का लक्ष्य होना चाहिए। केवल कुछ व्यक्ति ही नशे जैसी बुराई को समाज से खत्म नहीं कर सकते। इसके लिए समाज को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान के तहत विभिन्न जगहों पर समाज के लोगों को बुलाकर इस बुराई के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। देश की युवा शक्ति को नशे जैसी बुरी आदत से छुटकारा दिलाने की जरूरत है। समाज के लोग नशा करने वालों से घृणा करके उनको विश्वास में लेकर इस आदत से छुटकारा दिलाएं। बर्बादी का दूसरा नाम है नशा, इसलिए जरूरी है कि इंसान नशे से दूर रहे और अगर लत लग ही जाए तो पूरी कोशिश कर इसके चंगुल से आजाद हो जाएं। ऐसा करना मुश्किल जरूर है, पर नामुमकिन नहीं।

ड्रग्स नर्वस सिस्टम को करता है सुस्त

ड्रग्स नर्वस सिस्टम को सुस्त कर देते हैं। इनके इस्तेमाल से दर्द और दूसरी समस्याएं जड़ से खत्म नहीं होती। बस थोड़े समय के लिए इनसे राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोग इनके आदी हो जाते हैं और उन्हें नशे की लत लग जाती है। नशे के शिकार आदमी के काम करने की क्षमता कम होती जाती है। नशे के चक्कर में लोग घर-बार बेच डालते हैं और समाज से उनका नाता टूट जाता है। नशे के लिए कई ऐसी चीजों का सेवन करते हैं, जिससे उन्हें कई तरह के इन्फेक्शन हो जाते हैं। इस्तेमाल किया हुआ इंजेक्शन लगाने से एचआईवी, हेपटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

एक जिम्मेदारी युवाओं की…..

कई बार ऐसा होता है कि युवा अपने दोस्तों के दबाव में आकर किसी बात के लिए मना नहीं कर पाते और वे गलत काम में भी उनका साथ देने लगते हैं। लेकिन ध्यान रहे यह आपकी जिंदगी है, गलत व सही की पहचान करना सीखें। और गलत चीजों को सख्ती से विरोध करने में कोई बुराई नहीं। मादक पदार्थों का सेवन से आपको किसी तरह की खुशी नहीं मिलेगी यह स्वयं तय करें। अगर आपको मादक पदार्थों के अवैध इस्तेमाल के बारे में पता है तो इसकी सूचना पुलिस को जरूर दें।

अभिभावकों की जिम्मेदारी

युवाओं को नशे की दुनिया से दूर रखने में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है। अगर कोई युवा नशे की दुनिया से बार आना चाहता है तो उसके लिए इलाज के साथ-साथ परिवार का सहयोग भी जरूरी है। जब आपका बच्चा किशोरावस्था व युवावस्था में पहुंच जाए तो उसे बड़ा समझ कर उसे हाल पर नहीं छोड़ें। उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उसके दोस्तों स्कूल व कॉलेज के बारे में उससे बात करें। बच्चों को बेवजह डांटे नहीं इससे वे जिद्दी हो जाएंगे और आपकी बात नहीं मानेंगे। अपने बच्चे की चिंता का कारण जानने की कोशिश करें और उनके साथ मिलकर उसका हल निकालें। अगर बच्चा मादक पदार्थों का सेवन कर रहा है तो उसे उपचार व परमार्श के माध्यम से इस दुनिया से बाहर निकालें।

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