Breaking News:

कांटों वाले बाबा को हर कोई देख है दंग … -

Wednesday, January 17, 2018

फिल्म पद्मावत फिर पहुंची एक बार कोर्ट, जानिए खबर -

Wednesday, January 17, 2018

बालिकाओ ने जूडो, बैडमिंटन, फुटबाल, वालीबाल, बाक्सिंग में दिखाई दम -

Wednesday, January 17, 2018

उत्तराखंड के उत्पादों का एक ही ब्रांड नेम होना चाहिए : उत्पल कुमार सिंह -

Wednesday, January 17, 2018

पर्वतीय राज्यों को मिले 2 प्रतिशत ग्रीन बोनस : सीएम -

Wednesday, January 17, 2018

सिर दर्द हो तो करे यह उपाय …. -

Monday, January 15, 2018

उत्तरायणी महोत्सव में रंगारंग कार्यक्रमों की धूम -

Monday, January 15, 2018

सौर ऊर्जा से चलने वाली कार का दिया प्रस्तुतीकरण -

Monday, January 15, 2018

सीएम ने ईको फ्रेण्डली किल वेस्ट मशीन का किया उद्घाटन -

Monday, January 15, 2018

औद्योगीकरण को बढ़ावा देने को लेकर प्रदेश में सिंगल विंडो सिस्टम लागू -

Monday, January 15, 2018

युवा क्रिकेटर के लिए भारतीय तेज गेंदबाज आरपी सिंह ने मांगी मदद -

Sunday, January 14, 2018

कक्षा सात की बालिका ने प्रधानमंत्री के लिए लिखी चिट्ठी, जानिए खबर -

Sunday, January 14, 2018

हरियाली डेवलपमेंट फाउंडेशन ने की गरीब, अनाथ एवं बेसहारा लोगो की मदद -

Sunday, January 14, 2018

रेडिमेड वस्त्रों के 670 सेंटर स्थापित किये जायेंगेः सीएम -

Sunday, January 14, 2018

सीएम ने 14 विकास योजनाओं का किया शिलान्यास -

Saturday, January 13, 2018

एयरटेल और एमेजाॅन ने मिलाया हाथ , किया मेंबरशिप पेशकश -

Saturday, January 13, 2018

किसने ठुकराया 15 करोड़ रूपये का का ऑफर …. -

Saturday, January 13, 2018

परीक्षा में टॉप कीजिए सड़क आप के नाम ….. -

Saturday, January 13, 2018

महापुरुषों में से एक थे स्वामी विवेकानंद…. -

Friday, January 12, 2018

पवित्र ग्रंथों का ‘डिजिटलाइजेशन’ करेगा IIT कानपुर -

Friday, January 12, 2018

भगवान भरोसे नहीं छोड़ सकते कश्मीर!

kashmir

जम्मू कश्मीर के हालात बेकाबू हो रहे हैं। मुश्किलों के कई स्तर बन गए हैं और समाधान की पहल किसी स्तर पर होती नहीं दिख रही है। तीन साल पहले जिस उम्मीद के साथ जम्मू कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की सरकार बनी थी, वह उम्मीद धीरे धीरे खत्म हो रही है। ऐसा लग रहा था कि घाटी के लोगों की बात करने वाली और काफी हद तक अलगाववादियों की पसंद वाली पार्टी पीडीपी के साथ जम्मू के लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली राष्ट्रवादी भाजपा की सरकार बनेगी तो हालात सुधरेंगे। लेकिन उलटा हुआ है। भाजपा के साथ सरकार बनाने की वजह से अलगाववादियों का पीडीपी से मोहभंग हुआ है। उनका भाजपा विरोध उभर कर आ गया है और उन्होंने आम लोगों को भाजपा के खिलाफ भड़काना शुरू किया है, जिसका नतीजा है कि घाटी में आम लोगों के बीच सरकार की अलोकप्रियता बढ़ी है और सरकार विरोधी प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। इसी वजह से सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ भी स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ा है, जिसका फायदा सीमा पार के आतंकवादी संगठन उठा रहे हैं।हाल की दो घटनाएं इस बदलते हालात की असली तस्वीर पेश कर रही हैं। पिछले दिनों सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकी के जनाजे में एके राइफल्स से लैस आतंकवादियों का एक जत्था घुस गया और उसने हवा में फायरिंग करके आतंकवादियों को सलामी दी। उन्होंने जिहाद के नारे भी लगाए। दूसरी घटना सेना के युवा मुस्लिम अधिकार उमर फैयाज की हत्या है। फैयाज पिछले ही साल सेना में भरती हुए थे और दो, राजपूताना राइफल्स में लेफ्टिनेंट थे। प्रदेश की मुस्लिम आवाम, मुस्लिम पुलिसकर्मियों और सेना में भरती के लिए दौड़ लगा रहे मुस्लिम जवानों को डराने के लिए इस बर्बर घटना को अंजाम दिया गया। पाकिस्तान हमारे सैनिकों के सर काटता रहे, उन्हें अगवा करके फांसी की सजा सुनाए, घुसपैठ करे और भारत उसे वार्ता के लिए बुलाए! ऐसे ही अलगाववादी पत्थरबाजों को भड़काते रहें, भारत विरोधी गतिविधिया करें और भारत उनसे वार्ता करे! ये दोनों काम एक साथ नहीं हो सकते हैं। यह घटना एक बड़े बदलाव का कारण बन सकती है अगर सरकार इसका सही तरीके से इस्तेमाल करे। पिछले दिनों आतंकवादियों ने पुलिसकर्मियों के घरों पर जाकर उनके परिजनों को चेतावनी दी थी। उस चेतावनी को इस घटना से जोड़ कर सरकार और सुरक्षा बल चाहें तो स्थानीय लोगों को भरोसा जीत सकते हैं। लेकिन यह हालात को भगवान भरोसे छोड़े रहने से नहीं होगा। इसके लिए प्रो एक्टिव पहल करनी होगी।किसी जमाने में जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद की शुरुआत हुई थी तब बाहर से आए भाड़े के आतंकवादियों को स्थानीय लोगों के यहां शरण मिलती थी। धीरे धीरे आतंकवादियों की ज्यादती से लोगों ने उन्हें अपने यहां रखना बंद किया और उनकी सूचना सुरक्षा बलों को देनी शुरू की। इससे आतंकी वारदातों में कमी आई और कश्मीर घाटी में गिने चुने आतंकवादी ही बच गए थे। स्थानीय आतंकवादियों की संख्या बहुत मामूली है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि फिर से स्थानीय लोग आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी दिखा रहे हैं। उनके साथ मुठभेड़ के दौरान वे सुरक्षा बलों पर पथराव करते हैं और उनके जनाजे में बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।लेफ्टिनेंट फैयाज की हत्या पुलिसकर्मियों और सेना में भरती होने के लिए दौड़ लगा रहे मुस्लिम युवाओं को डराने की कोशिश। अगर इसे अभी नहीं रोका गया तो इसका बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके लिए सरकार को यथास्थितिवादी नजरिया छोड़ना होगा। पिछले दिनों ऐसा लग रहा था कि केंद्र सरकार हालात को लेकर गंभीर हुई है। श्रीनगर सीट पर लोकसभा के उपचुनाव में जैसी हिंसा हुई थी उसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगाए जाने की चर्चा चलने लगी थी। कहा जा रहा था कि राज्यपाल को बदला जाएगा और विधानसभा निलंबित करके राज्यपाल शासन लगाया जाएगा। लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती दिल्ली पहुंची और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से मुलाकात की।दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान सिर्फ नरेंद्र मोदी कर सकते हैं। लेकिन यह समझ लेने की बात है कि मेहबूबा मुफ्ती के बताए रास्ते पर चल कर कर कश्मीर समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। वे अगर कह रही हैं कि मोदी ही समस्या का समाधान कर सकते हैं तो वे अपने लिए समय ले रही हैं और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। उनको पता है कि इस बयान के बाद उनको समय मिल जाएगा और राज्यपाल शासन लगाने का विचार थोड़े समय के लिए स्थगित हो जाएगा। अगर इंतजार में गर्मियां निकल गईं तो सर्दियों में वैसे भी अपेक्षाकृत शांति बहाल हो जाती है।इसलिए मेहबूबा की तारीफ से खुश होकर कोई भी कदम उठाने से पहले उसके असर का आकलन जरूरी है। उनकी पार्टी का कहना है कि पाकिस्तान और हुर्रियत को साथ लिए बगैर वार्ता का कोई मतलब नहीं है। यानी इनको साथ लेकर केंद्र सरकार कश्मीर पर वार्ता करे। सवाल है कि पाकिस्तान हमारे सैनिकों के सर काटता रहे, उन्हें अगवा करके फांसी की सजा सुनाता रहा, घुसपैठ करता रहे और भारत उसे वार्ता के लिए बुलाए! इसी तरह अलगाववादी पत्थरबाजों को भड़काते रहें और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहें और भारत उनसे वार्ता करे! एक तरफ मोदी की तारीफ और दूसरी ओर पाकिस्तान व अलगाववादियों के भारत विरोधी कामों पर परदा डालने की राजनीति एक साथ कैसे चल सकती है? यह बात मान लेनी चाहिए मेहबूबा की सरकार घसीट घसीट कर चल रही है और वह संकटग्रस्त इस राज्य का भला नहीं कर सकती है। दूसरे, वार्ता का उसका सुझाव भारत को बैकफुट पर ला देगा। इसलिए मौजूदा स्थिति बनाए रखते हुए यानी प्रदेश को भगवान भरोसे छोड़ कर कश्मीर समस्या के समाधान की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

Leave A Comment