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सीएम त्रिवेंद्र उत्तराखण्ड में अतिवृष्टि को लेकर अमित शाह से की भेंट -

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अप्रत्याशित फीस बढ़ाने पर भड़के संयुक्त अभिवावक संघ , जानिए खबर -

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जम्मू-कश्मीर में शहीद संदीप थापा को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने दी श्रद्धांजलि -

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उत्तरकाशी में हुई भारी बारिश, जानिए खबर -

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Sunday, August 18, 2019

युवा किसानों को रोजगारपरक प्रशिक्षण जल्द : डीएम मंगेश -

Saturday, August 17, 2019

देहरादून में गति फाउंडेशन ने किया ई-वेस्ट मैनेजमेंट पर सर्वे, जानिए खबर -

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शहीद हुए लांसनायक संदीप थापा की शहादत पर सीएम त्रिवेंद्र ने शोक व्यक्त किया -

Saturday, August 17, 2019

देहरादून का लाल संदीप थापा हुए शहीद -

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उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश के मध्य लम्बित मामलों का जल्द से जल्द हो निस्तारण : सीएम त्रिवेंद्र -

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“टिकटॉक” के साथ उत्तरखंड पुलिस ने मिलाया हाथ , जानिए खबर -

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सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक : गति फाउंडेशन -

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Friday, August 16, 2019

रिक्शा चलाने वाले का बेटा बना IAS अफसर, जानिए खबर

यह बात आज से चार साल पहले की जब बनारस शहर में एक बच्चा अपने दोस्तों के साथ खेलते-खेलते अपने ही एक दोस्त के घर में चला गया। जैसे ही उस दोस्त के पिता ने इस बच्चे को अपने घर में देखा वो गुस्से से लाल-पीले हो गये । दोस्त के पिता ने बच्चे पर चीखना-चिल्लाना शुरू किया। उसने ऊँँची आवाज़ में पूछा,” तुम कैसे मेरे घर में आ सकते हो ? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में आने की? तुम जानते हो तुम्हारा बैकग्राउंड क्या है ? तुम्हारा बैक-ग्राउंड अलग हैं ,हमारा अलग।। अपने बैक-ग्राउंड वालों के साथ उठा-बैठा करो” ये कहकर दोस्त के पिता ने उस बालक को बाहर का रास्ता दिखा दिया।दोस्त के पिता के इस व्यवहार से बच्चा घबरा गया। उसे समझ में नहीं आया कि आखिर उसने क्या गलत किया है। उसे लगा कि दूसरे बच्चों की तरह ही वो भी अपने एक दोस्त के साथ खेलते-खेलते दोस्त के घर में चला गया था। दोस्तों के घर में तो हर बच्चा जाता है , फिर उसने क्या गलत किया ? उस बच्चे के मन में अब “बैकग्राउंड” के बारे में जानने की प्रबल इच्छा पैदा हो गयी । अपनी जिज्ञासा को दूर करने के लिए वो बालक अपने एक परिचित व्यक्ति के पास गया, जो कि पढ़ा-लिखा था और किसी बड़ी परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था । इस परिचित व्यक्ति ने बालक को उसके सामजिक पृष्ठभूमि के बारे में समझाया। बालक को एहसास हो गया कि वो गरीब है और उसका दोस्त अमीर। उसके पिता रिक्शा चलाते हैं और उसकी सामाजिक परिस्थिति ठीक नहीं है। अचानक ही बालक ने उस परिचित व्यक्ति से ये पूछ लिया कि सामाजिक बैकग्राउंड को बदलने के लिए क्या किया जा सकता है , तब अनायास ही उस परिचित के मुँह से निकल गया कि आईएएस अफसर बन जाओ, तुम्हारी भी बैकग्राउंड बदल जाएगी। शायद मज़ाक में या फिर बच्चे का उस समय दिल खुश करने के लिए उस परिचित ने ये बात कही थी। लेकिन , इस बात को बच्चे ने काफी गंभीरता से लिया था। उसके दिलोदिमाग पर इस बात ने गहरी छाप छोड़ी । उस समय छठी क्लास में पढ़ रहे उस बालक ने ठान लिया कि वो हर हाल में आईएएस अफसर बनेगा। और जबसे से ही उस बालक ने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए जी-जान लगाकर मेहनत की। तरह-तरह की दिक्कतों , विपरीत परिस्थितियों और अभावों के बावजूद वो बालक आगे चलकर अपनी लगन, मेहनत , संकल्प के बल पर आईएएस अफसर बन गया।जिस घटना की यहाँ बात हुई है वो घटना गोविन्द जायसवाल के बचपन की सच्ची घटना है। रिक्शा चलाने वाले एक गरीब परिवार में जन्मे गोविन्द जायसवाल ने अपने पहले प्रयास में ही आईएएस की परीक्षा पास कर ली थी। आज वो एक कामयाब और नामचीन अफसर है। लेकिन, जिन मुश्किल हालातों और अभावों में गोविन्द ने अपनी पढ़ाई की वो किसी को भी तोड़ सकती हैं। अक्सर आम लोग इन हालातों और अभावों से हार जाते हैं और आगे नहीं बढ़ पाते। लेकिन गोविन्द ने जो हासिल कर दिखाया है वो बड़ी मिसाल है। गरीब परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे-युवा और दूसरे लोग भी गोविन्द की कामयाबी की कहानी से प्रेरणा ले सकते हैं।

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