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लोगों के घरों में काम करके अपनी पढ़ाई और घर की जिम्मेदारी उठा रही यह मासूम

pehchan -aap

गाजियाबाद | अगर दिल में जज्बा हो तो कोई भी कार्य आसानी से पूरा किया जा सकता है ऐसे ही एक मासूम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद खेलने की उम्र में अपने परिवार का सहारा बनीं हैं। उम्र मात्र 11 साल लेकिन जज्बा किसी बड़ो से कम नहीं है।बात हो रही है स्लम एरिया में रहने वाली एक मासूम बच्ची का | जो अपने 9 भाई-बहनों को पालने में पिता की सहायता करती है। इन सभी कार्यों के बावजूद पूजा ( बदला हुआ नाम ) रोज 2 घंटे पढ़ने का समय निकालती है। वह रोजाना सुबह 11 से 1 बजे तक पढ़ाई के लिए सेंट्रल पार्क जाती है। पूजा (बदला हुआ नाम) घरों में काम करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी कर रही है। घरों में काम करने से उसकी पढ़ाई और परिवार के खर्च निकलते रहते हैं। पढ़ाई का शौक रखने वाली सुनीता सुबह 5 बजे उठकर पहले अपने घर के काम करती है, फिर लोगों के घरों में काम करने जाती है। इसके बाद वह सुबह 10 बजे से स्कूल चली जाती है। इसके बाद दोपहर 2 बजे वह अपने पिता की दुकान पर काम करती है और शाम को फिर से लोगों के घरों में काम करती है। सीमा की उड़ान को अगर लोगों की सहायता की हवा मिल जाए, तो वो भी कुछ अलग कर सकती है। सीमा का सपना है कि उसके परिवार अपना घर हो।

 

 

 

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