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29 बार लड़े चुनाव, जीत मिली नही, राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ पाने का मलाल

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जिले के झसियापुरा निवासी चमन लाल बाबरा ग्राम प्रधान, नगरपालिका से लेकर विधानसभा और लोकसभा सहित कुल 29 बार चुनाव लड़े, लेकिन एक में भी उन्हें जीत नसीब नहीं हुई। हालांकि, खास बात ये है कि जिले के लोग इनकी भाषण के दीवाने थे। आलम ये था कि स्‍पीच सुनने के लिए लोग चंदा वसूलकर सभा करते थे। ऐसे में अभी भी इलाके में ‘भाषण वाले बाबरा’ के नाम से मशहूर हैं।ललितपुर लौटने के बाद उन्होंने यहां चुनाव लड़ना शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने नगर पालिका का चुनाव लड़ा। इसमें वह हार गए, लेकिन अच्छा भाषण देने वाले नेता के रूप में पहचाने जाने लगे। अपने गांव से ग्राम प्रधानी के चुनाव में वह 7 बार मैदान में उतरे, लेकिन हर बार हार मिली। इस बीच वह दूसरे बड़े चुनाव भी लड़ते रहे। उन्होंने 10 बार विधानसभा, 8 बार लोकसभा और 4 बार नगर पालिका का चुनाव भी लड़ा। वह हमेशा स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़े, किसी पार्टी से चुनाव के लिए टिकट नहीं मांगा। 2012 में 77 की उम्र में जब महरौनी विधानसभा चुनाव में पर्चा दाखिल किया तो वह इलाके के सबसे ज्यादा चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति बन गए। चमनलाल बाबरा कहते हैं कि उन्हें हार का अफ़सोस नहीं है, क्‍योंकि उन्होंने कभी एक रुपया भी चुनाव खर्च नहीं किया।हालांकि, अब तक राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ पाने का मलाल है। वह राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन अब चुनाव महंगा हो गया है।

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