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JIO : एक साल के लिए फ्री सर्विस -

Monday, January 22, 2018

नई ‘कुतुब मीनार’ कचरे से हुई तैयार, जानिए खबर -

Monday, January 22, 2018

उत्तराखंड राज्य को सांस्कृतिक दल का पुरस्कार -

Monday, January 22, 2018

समाज के लिए कार्य करना एक चुनौती,इस चुनौती को करें स्वीकार : मदन कौशिक -

Monday, January 22, 2018

समाजिक कार्य के योगदान पर समाजसेवी हुए सम्मानित -

Monday, January 22, 2018

पासपोर्ट बनवाने वालो के लिए आई यह खबर … -

Sunday, January 21, 2018

“आप” के समर्थन में विपक्ष हुआ एकजुट -

Sunday, January 21, 2018

ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता भारत -

Sunday, January 21, 2018

सुपर डांसर्स शो : दून क्लेमेनटाउन निवासी आकाश थापा को जरूरत वोट की -

Saturday, January 20, 2018

डीएम ईवा ने सुनीं जनसमस्याएं -

Saturday, January 20, 2018

आइडिया के अनलिमिटेड रिचार्ज पर पाएं 3300 रूपये का कैशबैक -

Saturday, January 20, 2018

फेसबुक माध्यम से बजट के लिए लोगों से मांगे सुझाव -

Saturday, January 20, 2018

दर – दर भटक रही है अपने बच्चे के साथ यह महिला, जानिए खबर -

Thursday, January 18, 2018

बिग बॉस के इस प्रतिभागी का चेहरा सर्जरी से हुआ खराब, जानिए है कौन -

Thursday, January 18, 2018

प्रदेश में भू कानून में परिवर्तन की मांग को लेकर “हम” का धरना -

Thursday, January 18, 2018

शासकीय योजनाओं का हो व्यापक प्रचार-प्रसार : डाॅ.पंकज कुमार पाण्डेय -

Thursday, January 18, 2018

केंद्रीय वित्तमंत्री के समक्ष सीएम ने रखी ग्रीन बोनस की मांग -

Thursday, January 18, 2018

कांटों वाले बाबा को हर कोई देख है दंग … -

Wednesday, January 17, 2018

फिल्म पद्मावत फिर पहुंची एक बार कोर्ट, जानिए खबर -

Wednesday, January 17, 2018

बालिकाओ ने जूडो, बैडमिंटन, फुटबाल, वालीबाल, बाक्सिंग में दिखाई दम -

Wednesday, January 17, 2018

चुनाव न समझ महापर्व समझे ….

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हम सभी अब सबसे बड़ा महापर्व मनाने की और है | यह पर्व न ही हिन्दू का है , न ही मुस्लिम का है और न ही सिख और ईसाई का है , यह पर्व सम्पूर्ण धर्म एवम् जाति का मिला हुआ समावेश है जिसको हम लोग बड़ी ही सादगी से मनाते है | तभी तो कहा गया है कि भारत की संस्कृति में विविधता में भी एकता है | हम सभी इस महापर्व की विवेचना करे तो तो इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि हम कितने सच्चाई से इस महापर्व को मनाते है | हम जिस सौहार्द से ईद…

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”अब फेंकना बंद करो खोजना शुरू करो”

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भैया लोग जिसको झंडा फहराना था फहरा लिये, जिसको भाषण जरूरत से अधिक देना था दे दिए , जिसको फेसबुक व्हाट्सअप पर स्वतंत्रता दिवस मनाना था मना लिये, अब तो २५ दिन होने को है पर अबतक भारतीय वायुसेना के मालवाहक विमान एएन-३२ के बारे में कोई सुराग नहीं मिला है, उसमें २९ लोग सवार थे। ये विमान २५.७.२०१६ को सुबह ८.३० बजे चेन्नई एयरपोर्ट से पोर्ट ब्लेयर जाने के लिए उड़ी थी । अब तो लगो आपलोग इस अभियान में…. , ये मीडिया वाले, राष्ट्रवादी, मंत्री-संत्री, बाबा-तांत्रिक, सब कहाँ सो गये है !!! कुम्भकरण के पताल का रास्ता खोजने…

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क्या है लोकतंत्र ७० साल मे न लोक जान पाये न तंत्र….

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कल एक सरकारी स्कुल का 12-13 वर्ष का विद्यार्थी हाथ में तिरंगा झंडा लेकर जा रहा था, मैंने कौतूहलवश पूछा कि ये क्या है, उसने कहा ‘अंकल 15 अगस्त को मैं और मेरी छोटी बहन अपने टपरे पर झंडा वंदन करेंगे’ मैंने कहा “बेटा ये तो बहुत अच्छी बात है, एक बात और बताओ, लोकतंत्र का मतलब समझते हो…???”उसका जवाब सुनकर मेरे पैरोँ तले जमींन ही खसक गयी, पढ़िए उसका जवाब क्या था | “अंकल,15 अगस्त 47 को हमारा देश आजाद हुआ था,उसके बाद हमारे यहाँ लोकतंत्र आया, दादाजी बताते है की अंग्रेजो ने बहुत अत्याचार किये, लेकिन अंग्रेज़ो में…

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मन व्यथित है, घृणा से भरा है ….

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बुलंदशहर हाईवे पर हुई गैगरेप की घटना ने समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठ पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है !!!!आखिर इंसान किस स्तर तक गिर गया है !!क्या देश के ये कानून रोक पाएँगे बलात्कार जैसी घटनाएं ?? आखिर कितनी दामिनी और बनाएगा ये निच पशु समाज….सोच कर रूह काँप उठती है की क्या गुजरा होगा उस परिवार के साथ…एक पिता के सामने उसकी पत्नी और पुत्री के साथ रेप…घृणा हो रही है… थूकने को मन…थू थू थू थू…. सारे आरोपियों को बिच चौराहे पर बोटी-बोटी काट दिया जाए तो भी कम है….गैंगरेप की शिकार हुई नाबालिग बेटी के पिता…

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शिक्षा का होता व्यापार, जनता है लाचार

एक ओर देश के प्रधानमंत्री जहां देश में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान को चलाकर शिक्षा पर जोर दे रहे हैं। दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री निजी स्कूलों में भी गरीब बच्चों के दाखिले देने की बात कर रहे हैं, रि-एडमिशन बंद करने की बात कर रहे हैं । लेकिन इसके उलट इन स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले तो दूर बल्कि अमीर लोगों को भी शिक्षा के मन्दिर के नाम पर खोली हुई इन दुकानों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पसीने आ रहे हैं। आपको बता दें कि देश के अन्दर ऐसे दर्जनों स्कूल हैं जो सरकार के…

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जागरूकता केवल दिवस पर ही क्यों ?

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देश में जब भी जागरूकता रूपी दिवस मनाई जाती है उस दिवस पर जो भी जागरूकता का संदेश या कार्य संदेश होता है वह उसी दिन के लिए क्यों सिमट जाती है यह एक सोचनीय विषय है | वैसे तो देश में जागरूकता रूपी दिवस अधिकांशतः मानते है परन्तु हम बात करेंगे मुख्यतः अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस , विश्व नशा मुक्ति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर | सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की बात करें तो देश में सरकारी और गैर सरकारी संगठन पौधे लगाने के साथ साथ पेड़ को न काटने रूपी संदेश और इस पर उस दिन अधिकाधिक संख्या…

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अधिकारी , राजनीतिक दबाव और राजनेता

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देश में जिस तरह से राजनीतिक दबाव अपनी पैर पसार रही है यह देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है | देश में लगभग सभी विभागों में राजनीतिक दबाव इतनी हावी होती जा रही है जिसका अंदाजा आने वाले समय में लगाना बहुत ही कठिन होगा | देश में राजनीतिक दबाव का सबसे बड़ा असर पुलिस विभाग में होता है | दबाव के रास्ते से देश के नेताओ द्वारा खुद ही सही गलत का निर्णय लेना कितना उचित है यह आप वर्तमान समय में देख ही रहे है | उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारियों का अधिकारी…

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पार्टी सदस्य बनाम सामाजिक सदस्य

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हाल ही में देश में सम्पन्न हुए राज्य सभा चुनाव में बहुत कुछ देखने और सिखने को मिला | यहा देखने का अभिप्राय राजनीतिक पार्टियों का एक दूसरे को पटकनी देने के लिए किस हद तक जा सकते है उससे है वही सिखने का अभिप्राय पार्टियों द्वारा नेताओ को ही राज्य सभा भेजने से है | इसी होड़ में राज्यो की समस्या और मुद्दे एक डिब्बे में बन्द के बराबर है | क्यों न ऐसा हो लोक सभा का जिस तरह से अधिकाँश सदस्य राजनीतिक पार्टियों के सदस्य होते है इसी क्रम में राज्य सभा के अधिकतर सदस्य जमीन से…

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खेल संगठनों में ना हो राजनीति का “फिक्स” खेल

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सम्पादक – अरुण कुमार यादव देश के हर क्षेत्र में नेताओ का प्रभुत्व बढ़ना किस हद तक सही है यहा हर क्षेत्र का मतलब खेल संगठन , कला संगठन से है | खेल संगठनो में क्रिकेट क्षेत्र की बात करे तो इस संगठन में अध्यक्ष पद पर मानो राजनीति दल से जुड़े नेताओ के लिए आरक्षित हो | क्रिकेट का सही ज्ञान तो दूर की बात क्रिकेट के सभी नियम तक मालुम नही होते है वह क्या एक अच्छे खिलाड़ियों के साथ इन्साफ दे सकते है जवाब नही का ही आएगा | प्रातिभा गुरु के चरण मागती है पर यहाँ…

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ईमानदार पत्रकारो पर लगी राजनीति नज़र

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अरुण कुमार यादव ( सम्पादक ) देश में जहा लोगो की शुरुआत पत्रकार द्वारा किये मेहनत से होती है अर्थात मीडिया द्वारा अख़बार के माध्यम से देश की जनता को उनके अधिकार , सामाजिक घटना चक्र , के साथ साथ देश में फैले भ्रष्टाचार का उजागर करती है | जिस पर जनता फिर अपनी कहानी लिखती है | परन्तु वर्तमान समय में जिस तरह से पत्रकारो पर हमले हो रहे है यह देश के लिए अच्छा संकेत नही है | बिहार में जिस तरह से सारेआम पत्रकार रंजन की गोली मार कर हत्या हो जाती है यह समझने के लिए…

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