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देवभूमि डायलॉग कार्यक्रम : सीएम ने समाज के लिए सराहनीय कार्य करने वालो को किया सम्मानित -

Friday, April 20, 2018

शीला रावत का अनिश्चित कालीन धरना जारी, जानिए खबर -

Friday, April 20, 2018

युवाओं को रोजगार से स्वरोजगार की ओर आना होगा आगे : सीएम -

Friday, April 20, 2018

युवा इंजीनियर भीख मांगते बच्चों का भविष्य बनाने के लिए कर रहा पदयात्रा, जानिए ख़बर -

Friday, April 20, 2018

2020 तक एक लाख युवाओं को कौशल विकास से जोड़कर रोजगार देने का लक्ष्य, जानिए ख़बर -

Friday, April 20, 2018

उत्तराखण्ड राज्य बेहतर फिल्म अनुकूल पर्यावरण के लिए विशेष उल्लेख पुरस्कार के लिए चयनित -

Thursday, April 19, 2018

सहारा समूह को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अपनी पसंद की संपत्ति बेचने का मिला अधिकार -

Thursday, April 19, 2018

सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की मौत से जुड़ी जांच याचिकाएं खारिज की -

Thursday, April 19, 2018

जब तक प्रधानमंत्री मेरी मांगें नहीं मानेंगे, मैं अनशन नहीं तोड़ूंगी: स्वाति -

Thursday, April 19, 2018

थाईलैण्ड यात्रा से राज्य में निवेश वृद्धि प्रबल : सीएम -

Thursday, April 19, 2018

भारत की ‘‘लुक ईस्ट’’ और थाईलैण्ड की ‘‘लुक वेस्ट’’ नीति एक दूसरे की पूरक : सीएम -

Wednesday, April 18, 2018

चारधाम यात्रा शुरू, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले -

Wednesday, April 18, 2018

“इण्डिया स्किल उत्तराखण्ड” पहुँचा ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, जानिए ख़बर -

Wednesday, April 18, 2018

प्रधानमंत्री मोदी मिले ब्रिटेन की पीएम से -

Wednesday, April 18, 2018

आप के राघव चड्ढा ने 2.5 रुपये मेहनताना गृह मंत्रालय को लौटाया -

Wednesday, April 18, 2018

BCCI भी आएगी RTI के दायरे में , लाॅ कमीशन ने की सिफारिश -

Wednesday, April 18, 2018

देवभूमि डायलॉग : 20 अप्रैल को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र युवाओं से करेंगे सीधा संवाद -

Wednesday, April 18, 2018

दिल्ली गैंगरेपः 20 लाख में माता-पिता ने किया आरोपियों से सौदा -

Tuesday, April 17, 2018

आसाराम केस : जेल में ही सुनाया जाएगा हाईकोर्ट का फैसला -

Tuesday, April 17, 2018

बैंकाॅक में सीएम त्रिवेंद्र ने उत्तराखंड राज्य को दिलाई एक नई पहचान -

Tuesday, April 17, 2018

देश का भविष्य पढे लिखे युवा या अनपढ़ राजनेता ?

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अरुण कुमार यादव (संपादक) देश में जहा एक तरफ पढे लिखे नवजवान युवाओ की टोली ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हो कर भी अपनी प्रातिभा को मान्य करने के लिए इधर-उधर भटकते है वही अनपढ़ या प्राइमरी पास सांसद , विधायक बन कर देश के पढे लिखे युवाओ की तक़दीर लिखते है | यह हमारे देश की वह तस्वीर है जो प्रगति के रास्ते का खोखला प्रतिबिम्ब बनाती है | यह वह देश है जहा अमीरों की अमीरी बढ़ाने के लिए उसके अंतर्गत नियमावली को रातोरात बदल दिया जाता है पर एक गरीब की ग़रीबी बदलने के उसके अधिकार और ज़मीन…

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जिम्मेदारी जनता की भी तो….

janta

सरकार यह नही कर रही सरकार वह नही कर रही पर समाज को सुधारने का जिम्मा जनता का भी तो बनता है | रोड पर कूड़ा फेकने से लेकर रोड पर ही खुले आम हत्या होना यह सब जनता के आखो के सामने होता है और फिर यही जनता आँखे बन्द कर नगर निगम से लेकर पुलिस विभाग तक को कोसते है अंत में कुछ न हुआ तो सरकार तो है ही घर का गुस्सा उतारने के लिए | माना जाए तो जिम्मेदारी सरकार और सरकारी विभाग की तो है पर जनता की भी समाज के प्रति जिम्मेदारी बनती है…

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गांव से पलायन , अधिकारी और राजनेता

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अरुण कुमार यादव (संपादक ) उत्तराखण्ड के अनेक ऐसे जगह जहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को देख कर लोग खिंचे चले आते है | उत्तराखण्ड के इन्ही प्राकृतिक सुंदरता से युक्त स्थानों पर अनेक गॉव बसे होते है एवम् साथ ही साथ उस रास्तों से अनेक गाँव की दशा और दिशा देखने को मिलती है | उत्तराखण्ड में जिस तरह से शहर तरक्की के माध्यम से आगे बढ़ रही है वैसे ईमानदारी तौर पर गाँव की तरक्की का पहिया धसी पड़ी है | इन सब का एक मात्र कारण गाँव से लोगो का पलायन और पलायन का कारण वहाँ जीवन जीने…

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गन्दी राजनीति का कारण जनता भी तो….

jantaa

अरुण कुमार यादव -संपादक | देश की राजनीति इतनी गिर जायेगी इसका पुराने पीढ़ियों को अंदाजा नही था | हमारे देश की राजनितिक पार्टिया विकास के मुद्दे की जगह धर्म , जाती , आरक्षण एवम् लोक लुभावने वस्तुओ का लालच देकर अपनी राजनीति की दुकान चमकाये रहते है , चमके का भी क्यों नही हम जैसी जनता ही तो इनको बढ़ावा दे रहे है | देश में जब भी चुनाव का विगुल बजा है धर्म को लेकर नई नई घटनाएँ देश के सामने आ खड़ी होती है | धर्म के ठेकेदार मानो जनता को मुर्ख की उपाधि दे रखी है…

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नेशनल खिलाड़ियो को भी मिले पेंशन

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अरुण कुमार यादव (संपादक) देश में जहां क्रिकेट मैच को जनता एक पर्व के रूप में मनाती वही इस खेल के खिलाड़ियो पर रुपयों की बरसात होती रहती है | यदि अन्य खेल और उस खेल के खिलाड़ियो की तरफ नज़र डाला जाए तो उनकी दशा और दिशा दयनीय नज़र आती है | तैराक , कुश्ती , निशानेबाज़ी, साइकिलिंग, दौड़ आदि खेलो के खिलाडी जो नेशनल स्तर पर खेल चुके है पर आज उनकी दशा आर्थिक रूप से इतनी कमजोर है की अपने परिवार का भरण पोषण तक करने में असमर्थ है | जो खिलाड़ी अपना पूरा जीवन देश का…

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जनता को परेशान करके माँग उठाना सही या गलत

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देश में हड़ताल , चक्का जाम , प्रदर्शन करके अनेक गैर सरकारी संगठन और सरकारी संगठन अपनी माँगो को पूरा कराने के लिए ऐसे रास्तो पर चलते है लेकिन क्या अपनी माँगो को पूरा कराने के लिए हड़ताल , चक्काजाम , सड़को पर प्रदर्शन करके प्राप्त करना सही है | इन चक्काजाम में परेशानी आखिर आप जैसे लोग आम जनता की ही होती है चक्काजाम के पीछे न जाने कितने लोगो की जान गवानी पड़ती है जब एम्बुलेंस सही वक्त पर अस्पताल नही पहुँचती है | न जाने कितने छात्र छात्राओ की परीक्षाएं छूट जाती है |क्या सरकार से ऐसे…

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जाती नही आर्थिक आधार पर हो आरक्षण

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देश को अंग्रेजो से आज हुए इतने सालो बाद भी उनके सिद्धांतओ की बू आज भी विद्यमान है | बात हो रही है बटने और बाटने की | इसका सबसे बड़ा विकराल रूप जातिगत आरक्षण में मिलता है | आरक्षण और जाती एक दूसरे के पूरक होने के कारण आज देश जाती और आरक्षण में फ़सा है | आरक्षण की पहली कमजोर कड़ी जाती है इस क्रम में शिक्षा में आज एक समान्य वर्ग का मेधावी छात्र उस छात्र से पिछड़ जाता है जहा उस छात्र की विद्वांता को आरक्षण प्रश्न चिन्ह लगा देती है | शिक्षा में आरक्षण उस…

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दबंग छात्र नेता बनाम कालेज चुनाव

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अरुण कुमार यादव (संपादक) शिक्षा का मन्दिर स्कूल और कॉलेजो का आज के दौर में यह वाक्यांश सटीक बैठता है या नही आप समझ सकते है | उत्तराखंड में इनदिनों कॉलेजो में चुनाव का दौर शुरू हो गए है सभी छात्र संगठन अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए कॉलेजो में एड़ी चोटी एक कर रहे है | लेकिन आज के दौर के छात्र नेता जिस तरह से चुनाव लड़ते है वह कॉलेजो के छात्रो के हित में शून्य है | आज के दौर में कालेजो के मुद्दे और छात्र हित पर छात्र नेताओ के रास्ते बदलता हुआ नज़र आ…

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तबादले के बाद ना हो योजनाओ के तबादले

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  अरुण कुमार यादव (संपादक) केंद्र सरकार की योजनाए हो या राज्य सरकार की सभी योजनाओ का शुभारम्भ भी गाजे -बाजे यानी प्रचार -प्रसार के माध्यम से होता है लेकिन समय दर समय इसमें सुस्ती आना प्रारम्भ होने लगता है कारण अधिकारियो की धीमी चाल और कही न कही सरकार और अधिकारियो में परिवर्तन | जहाँ योजनाओ को धरातल पर लाने के लिए प्राइवेट और गैर सरकारी संगठनो का सहारा लिया जाता है यह काबिले तारीफ है परन्तु सरकार के परिवर्तित होने पर या अधिकारियो के तबादले होने पर इन योजनाओ का हस्र वही पर आकर समाप्त हो जाता है…

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तब की स्वतंत्रता दिवस और अब की स्वतंत्रता दिवस

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देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद देश के लोग उस पल को गर्व से संजोने के लिए हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते है | बीस साल पहले स्वतंत्रता दिवस के मायने और वर्तमान समय में स्वतंत्रता दिवस के मायने में अन्तर साफ दिखाई पड रहा है | पहले समय में स्कूलो-कालेजो के साथ साथ सरकारी दफ्तरों में स्वतंत्रता दिवस के दिन से एक माह पहले ही आजादी मनाने के लिए तैयारिया जोरो शोरो से शुरू हो जाया करती थी |जहां स्कूलों में छात्र – छात्राए प्रातः काल में ही ड्रेस की तैयारी कर के स्कूलों द्वारा निकलने…

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