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आइडिया के अनलिमिटेड रिचार्ज पर पाएं 3300 रूपये का कैशबैक -

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फेसबुक माध्यम से बजट के लिए लोगों से मांगे सुझाव -

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दर – दर भटक रही है अपने बच्चे के साथ यह महिला, जानिए खबर -

Thursday, January 18, 2018

बिग बॉस के इस प्रतिभागी का चेहरा सर्जरी से हुआ खराब, जानिए है कौन -

Thursday, January 18, 2018

प्रदेश में भू कानून में परिवर्तन की मांग को लेकर “हम” का धरना -

Thursday, January 18, 2018

शासकीय योजनाओं का हो व्यापक प्रचार-प्रसार : डाॅ.पंकज कुमार पाण्डेय -

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केंद्रीय वित्तमंत्री के समक्ष सीएम ने रखी ग्रीन बोनस की मांग -

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कांटों वाले बाबा को हर कोई देख है दंग … -

Wednesday, January 17, 2018

फिल्म पद्मावत फिर पहुंची एक बार कोर्ट, जानिए खबर -

Wednesday, January 17, 2018

बालिकाओ ने जूडो, बैडमिंटन, फुटबाल, वालीबाल, बाक्सिंग में दिखाई दम -

Wednesday, January 17, 2018

उत्तराखंड के उत्पादों का एक ही ब्रांड नेम होना चाहिए : उत्पल कुमार सिंह -

Wednesday, January 17, 2018

पर्वतीय राज्यों को मिले 2 प्रतिशत ग्रीन बोनस : सीएम -

Wednesday, January 17, 2018

सिर दर्द हो तो करे यह उपाय …. -

Monday, January 15, 2018

उत्तरायणी महोत्सव में रंगारंग कार्यक्रमों की धूम -

Monday, January 15, 2018

सौर ऊर्जा से चलने वाली कार का दिया प्रस्तुतीकरण -

Monday, January 15, 2018

महेश अब तक 472 बेटियों का कर चुके हैं कन्यादान

pehchan

एक ऐसे शख्स के बारे में आज हम आप को बताने जा रहे है जो दो-चार या छह दर्जन नहीं, सौ डेढ़ सौ भी नहीं पूरी 472 बेटियों का बाप है। और इनके अंदर यही नहीं रुका है बेटियां बढ़ाने की ललक। हर साल वो अपने कुनबे में बेटियां बढाता जा रहा है। बेटियों की संख्या बढ़ाने में उसकी पत्नी का योगदान सबसे ज्यादा है। जी, हां इस शख्स का नाम है महेश सावनी। बता दे की महेश सावनी की कुछ बेटियां हिंदु हैं को कुछ मुसलमान, कुनबा बढ़ाने में वो धर्म या मज़हब को आड़े नहीं आने देता। विदित…

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फुटपाथ पर भूखे सो रहे असहाय जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाने का कार्य कर रही अपने सपने

APNE-SAPNE

देहरादून। देहरादून में एक ऐसी संस्था जिनके सभी सदस्य अपने सपने को उन भूखे असहाय जरूरतमंद लोगो के लिए समर्पित कर दिया है | यह संस्था है अपने सपने जो भूख -‘हर पेट में रोटी’ अभियान के तहत संस्था सदस्य रात्रि में देहरादून के सड़कों पर स्थित फुटपाथ पर भूखे सो रहे असहाय जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाने का कार्य करती है। अपने सपने संस्था रेस्टोरेंट, घरों , वेडिंग पॉइंट से खाने को एकत्रित कर भूखे लोगों को खिलाती है। साथ ही साथ संस्था देहरादून के होटलो, रेस्टोरेंट, वेडिंग पॉइंट, और घरों से खाना न फेंकने की अपील भी कर…

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‘सरकार’ हो तो ऐसी

AAP

दिल्ली में दो साल के समय में परिवर्तन देखने को मिली है यह हम नही वहाँ की जनता दिल खोल कर केजरीवाल सरकार की प्रशंसा कर रही है | केजरीवाल सरकार को जनता द्वारा प्रशंसा ऐसे ही नही मिल रही है बल्कि सरकार द्वारा किये गए विकास इसके निगेबान है | जिस तरह से केजरीवाल सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की दशा प्राइवेट स्कूलों जैसी कर दी, वही जारी बजट से भी कम बजट में ब्रिज का निर्माण करना, भ्रस्टाचार पर नकेल कसना, स्वास्थ के क्षेत्र में मोहल्ला क्लिनिक बनाना , प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फ़ीस पर पूर्णत…

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बस्तर के आदिवासी किसान की बेटी सावित्री बनेगी IIT इंजीनियर

pehchan

हौसलों की उड़ान में कितनी भी बाधाएं क्यों न हो हौसलों के द्वारा उड़ान कायम रहती है | इस कथन को साबित किया है एक आदिवासी किसान की बेटी ने | कुरंदी बस्तर के आदिवासी किसान की बेटी सावित्री कश्यप ने जेईई एडवांस में 1135 वीं रैंक हासिल की है | संसाधन की कमी को दरकिनार कर सावित्री ने यह साबित कर दिया है मनुष्य जो भी ठान ले तो वह पूरा जरूर होता है | माना की सावित्री कश्यप का चयन कोटे के अनुसार हुआ है लेकिन इस वर्ग में भी पढ़ाई का जज्बा रखना संसाधनों का न हो…

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एक MLA ऐसे भी , आज न घर है न दो जून की रोटी

pehchan

कर्नाटक में MLA बनने से पहले जो सादगी दिखती थी, वही आज भी बरकरार है. डेढ़ साल तक विधायक रहने के बाद भी उन्होंने कभी दौलत की लालच नहीं की और उनकी ईमानदारी के परिणाम का नतीजा यह है कि आज उन्हें अपने परिवार का पेट भरने के लिए ‘दो जून की रोटी’ भी मुहैया नहीं हो पा रही है. इसके बावजूद उनके हौसले बुलंद हैं आप को बता दे की वह दिन की रोटी के लिए महज 40 रुपए कमाकर भी खुश हैं | विदित हो की हुकरम्पा 1983 में राजनीति में कदम रखा था कर्नाटक विधानसभा चुनाव में…

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साक्षी चौहान 38 किलोमीटर का सफर तय कर गरीब बच्चों को बना रही है शिक्षित

NEO

आज के समय में दूसरों के लिए सहायता तो दूर सोचने का भी वक्त नहीं रहता है लेकिन इस कथन को गलत साबित किया है ऋषिकेश की साक्षी चौहान | साक्षी चौहान २५ किलोमीटर का दूरी तय कर गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए ऋषिकेश से देहरादून आती है | देहरादून में स्थित नियो विजन फाउंडेशन एनजीओ के तहत बिना किसी स्वार्थ साक्षी चौहान गरीब बच्चों को गीत संगीत सिखाने के साथ साथ पढ़ाने का सामाजिक कार्य करती है | इस कार्य पर साक्षी चौहान के पिता विनोद चौहान और माता सुनैना देवी को अपने बेटी पर गर्व…

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स्कूल के मध्याह्न भोजन में मिलने वाले अंडे को छिपाकर लाता है बेटा ,खिलाता है बीमार मां को !

PAHAL

रांची/गोड्‌डा। झारखंड के गोड्‌डा जिला के पांडुबथान सरकारी विद्यालय की कक्षा तीन में पढ़ने वाले अमित कोड़ा को नहीं पता कि मदर्स डे क्या है। हां इतना जरूर जानता है कि यह 9 वर्ष का बच्चा की उसकी मां के लिए अंडे खाना सबसे ज्यादा जरूरी है। जानकारी अनुसार टीबी रोग की मरीज सावित्री की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि वह पौष्टिक आहार ले सके, जबकि डॉक्टरों ने इन्हें खाने को कहा है। मां की हालत ने उसे स्कूल में मध्याह्न भोजन में मिलने वाले अंडे को छिपाकर घर लाने की युक्ति सूझी। अमित हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार…

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आज हैं महाराष्ट्र के ब्रांड एम्बेस्डर जो कभी चाय बेचने को थे मजबूर …

good

हम अपने बचपन के दिनों में अपनी दादा-दादी से किस्से-कहानियां सुना करते थे कि फलां के पास किस तरह एक भी पैसे नहीं थे | फलां ने किस प्रकार रात-रात भर जाग कर पढ़ाई की थी. उसे किस तरह पैसे के अभाव में मजदूरी करनी पड़ी. किस प्रकार रिक्शा खींचना पड़ा और चाय की रेहड़ी तक लगानी पड़ी | महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में रहने वाले सोमनाथ गिरम के सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है | वे एक बेहद गरीब परिवार में जन्मे थे और कभी दो जून की रोटी के लिए भी संघर्ष किया करते थे…

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पूर्व मुख्य्मंत्री का परिवार मजदूरी करने को मजबूर

EX BIHAR CM

पूर्णिया | बिहार के इस दलित मुख्यमंत्री के परिवार से मिलिए जिन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. जी हाँ, यह भोला पासवान शास्त्री का परिवार है जो पूर्णिया जिले के काझा कोठी के पास बैरगाछी गांव में रहता है. तस्वीर में इनकी हालत साफ नजर आती है और बिहार के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्रियों से इनकी तुलना करेंगे तो जमीन आसमान का फर्क साफ नजर आएगा. हाल हाल तक यह परिवार मनरेगा के लिए मजदूरी करता रहा है ! बैरगाछी वैसे तो समृद्ध गांव लगता है, मगर शास्त्री जी का घर गांव के पिछवाड़े में है. जैसा कि अमूमन…

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दिव्यांग डिम्पी ने जीवन की दुश्वारियों को मजबूत इरादों से किया परास्त

dimpi

रुद्रप्रयाग | कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है अगस्त्यमुनि क्षेत्र की बालिकाओं ने। जिन्होंने विकट परिस्थितियों को मात देकर सफलता के झण्डे गाड़े हैं। उनकी इस सफलता पर उनके मां बाप तो गौरवान्वित महसूस कर ही रहे हैं, बल्कि पूरा क्षेत्र ही उनकी सफलता पर बधाई देते हुए गौरवान्वित हो रहा है। इसमें पहला नाम है डिम्पी बैंजवाल का, जिसने जीवन की दुश्वारियों को अपने मजबूत इरादों से परास्त किया है। उसने दिव्यांग होते हुए हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षा 62 प्रतिशत…

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