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केदारघाटी: गरीबों की मदद में जुटे हैं डाॅ. यादव

रुद्रप्रयाग।। चन्द्रापुरी के गिंवाला गांव में स्वास्थ्य एवं नैदानिक केन्द्र में प्रतिदिन डॉक्टर रंग लाल यादव की ओर से पचास से ज्यादा मरीजों को देखा जा रहा है। लकवा, कमर दर्द, कंधे में दर्द, मस्कुलर पेन को फिजियोथेरेपी के माध्यम से कई मरीज स्वस्थ होकर चलने लगे हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारघाटी में हेल्प एज इंडिया संस्था की मदद से विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों का निःशुल्क इलाज किया गया। साथ ही संस्था के माध्यम से उन्हें दवाइयां भी वितरित की गई। स्वास्थ्य एवं नैदानिक केंद्र के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर रंग लाल यादव प्रतिदिन दस घंटे मरीजों के बीच में बिताकर उन्हें स्वस्थ करने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। इस केंद्र में अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट के साथ ही आधुनिक उपकरण सीपीएम आईएफटी, माइक्रोवेव थेरेपी, ट्रेक्शन के माध्यम से मरीजों का परीक्षण के साथ-साथ इलाज किया जा रहा है।  डॉ यादव की ओर से इन सात वर्षों में एक हजार से अधिक मरीजों को न केवल जीवनदान ही दिया है, बल्कि हर रविवार को दूरस्थ गांव में भी शिविर के माध्यम से मरीजों का ट्रीटमेंट करते हैं। लकवा, चेहरे का लकवा, चक्कर आना, हाथ, पैरों में झनझनाहट तथा सुन्नपन, बैलेंस बनाने में कठिनाई सिर दर्द, स्पाइनल, इंजरी, ब्रेन इंजरी, पार्किसन, शरीर के किसी भी भाग में मस्कुलर पेन उसका निदान डॉक्टर यादव के पास है। केदारघाटी में देवतुल्य बने डॉक्टर यादव न केवल गरीब आश्रितों के मसीहा हैं, बल्कि उपहार समिति के माध्यम से भी अनाथ और गरीब बेटियों की शादी में भरपूर मदद कर रहे हैं। डॉ यादव का कहना है कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उन्हें केवल दो वर्ष के लिए केदारघाटी भेजा गया था, लेकिन इस घाटी से उन्हें इतना लगाव हो गया कि अब उम्र भर इसी घाटी में रहकर लोगों की सेवा और उपचार करने में जीवन के अंतिम क्षण तक रहने का विचार है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के पास इलाज कराने को पर्याप्त पैंसा नहीं है। कई लोग तो अपने इलाज के लिए अपने खेत और गहने तक बेच देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य एवं निदान केंद्र गिंवाला चंद्रापुरी में निःशुल्क मरीजों का परीक्षण और इलाज किया जा रहा है, जिस कारण लगभग एक हजार से अधिक मरीज आज स्वस्थ हो चुके हैं। ल्वारा  गांव के शिवराज शाह का कहना है कि उनका बेटा देशराज पांच माह पूर्व अचानक बैलेंस खो चुका था, जिसके ट्रीटमेंट के लिए देश के कई नामी-गिरामी अस्पताल में ले जाया गया है। जहां पर लगभग पांच लाख के करीब धनराशि चिकित्सकों द्वारा ली गई, लेकिन बेटे की बीमारी का पता ही नहीं चला। ऐसे में ऐसे में उन्हें किसी ने फिजियोथेरेपिस्ट डॉ यादव के बारे में बताया कि वह महज डेढ़ माह पूर्व इस केंद्र में आए थे। उन्होंने कहा कि उनका बेटा आज नब्बे फीसद स्वस्थ हो गया है। वह अब अपने पैरों पर बैशाखी के सहारे चलने भी लगा है और उसके हाथों में भी मूवमेंट होने लगी है। उन्होंने सारा श्रेय डॉ यादव को देते हुए कहा कि इनका न केवल व्यवहार ही मधुर है, अपितु हर मरीज के साथ एक साथ व्यवहार कर उन्हें अच्छा ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

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