Breaking News:

गर्व : उत्तराखंड के सोवेंद्र भंडारी और साहिल हुए भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम में शामिल -

Thursday, February 19, 2026

मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन ने जरुरतमंद बच्चों के चेहरे पर लाई मुस्कान, जानिए खबर -

Wednesday, February 18, 2026

चारधाम यात्रा की तैयारियाँ तेज, जानिए खबर -

Tuesday, February 17, 2026

बुजर्ग दम्पति को पुत्रों ने घर निकाला बाहर, डीएम देहरादून ने थामा हाथ, जानिए खबर -

Tuesday, February 17, 2026

देहरादून : कांग्रेस का प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल -

Tuesday, February 17, 2026

शेफाली ,अनुष्का और शीतल के संघर्ष ने पहुंचाया मुकाम तक -

Monday, February 16, 2026

वसूली एजेंटो के दुर्व्यवहार पर शिकंजा कसने के कदम स्वागत योग्य, जानिए खबर -

Friday, February 13, 2026

देहरादून : सिल्वर सिटी मॉल राजपुर रोड के पास बदमाशों ने एक को गोलियों से भूना, मौत -

Friday, February 13, 2026

निःशुल्क हेल्थ चैकअप कैम्प का आयोजन, जानिए खबर -

Wednesday, February 11, 2026

उद्घाटन समारोह : वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 -

Wednesday, February 11, 2026

डिजिटल धोखाधड़ी से ग्राहकों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सुझाव स्वागत योग्य : जितेंद्र कुमार डंडोना -

Wednesday, February 11, 2026

मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मेधावी छात्रों को किया पुरस्कृत -

Friday, February 6, 2026

पहचान : नरेश सिंह नयाल को नेशनल ब्लाइंड फुटबॉल टीम का चयनकर्ता और ट्रेनर का मिला जिम्मा -

Friday, February 6, 2026

रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को दी बड़ी राहत, जानिए खबर -

Friday, February 6, 2026

साईं सृजन पटल के 18वें अंक का हुआ विमोचन -

Monday, February 2, 2026

क्लेमेंट टाउन सुभाष नगर में भव्य वार्षिक रथयात्रा का बैंडबाजे के साथ आयोजन -

Monday, February 2, 2026

बजट विश्लेषण 2026, जितेंद्र कुमार डंडोना पूर्व निवेश सलाहकार भारतीय स्टेट बैंक द्वारा, जानिए खबर -

Monday, February 2, 2026

देहरादून : पलटन बाजार में युवती की चापड़ से गला रेतकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार -

Monday, February 2, 2026

जौनपुर : पिंकी माली के शोक में केराकत तहसील का भैंसा गांव, जानिए खबर -

Thursday, January 29, 2026

देहरादून सिटीजन फोरम ने की नई पहल, जानिए खबर -

Wednesday, January 21, 2026



नेत्रदान के लिए गांव ने फैलाई जागरूकता, जानिए खबर

कन्याकुमारी | मडठट्टूविलई गांव कन्याकुमारी का जिला है | अगर इस गांव में किसी की मौत हो जाती है तो सबसे पहले चर्च के पादरी को उसकी सूचना दी जाती है। उसके बाद घंटा बजाया जाता है और मौत का ऐलान किया जाता है। इसके साथ ही गांव के युवाओं को यह संदेश मिल जाता है कि मृतक के परिवार को नेत्रदान के लिए तैयार करें। जब परिवार निधन की सूचना देने में व्यस्त होता है तो नेत्र चिकित्सालय की एक टीम गांव में जाकर आंखें निकालकर उनकी जगह आर्टिफिशल आंखें लगा देती है जो बिलकुल असली आंखों सी लगती हैं। इस गांव में 11 साल में 229 लोग आंखें दान कर चुके हैं। यह गांव नेत्रदान के बारे में जागरूकता फैलाने के मामले में मिसाल बन गया है। हालांकि, यह सफर आसान नहीं था क्योंकि 2007 तक लोग नेत्रदान के लिए कोई तैयार नहीं होता था। चर्च के यूथ ग्रुप के प्रेसिडेंट एफएक्स अरुणो जेवियर ने बताया है कि गांव के बड़े-बुजुर्ग नेत्रदान नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि आंखों के बिना वे मृत्यु के बाद भगवान को नहीं देख सकेंगे। नेत्रदान की अहमियत समझते हुए सेंट सबैस्टियन चर्च के युवाओं ने 2004 से इस बारे में जागरूकता फैलाना शुरू किया। पहले परिवार को नेत्रदान के लिए मनाने में उन्हें तीन साल का वक्त लग गया। उन्होंने बताया कि करीब 1500 लोगों ने एनरोलमेंट कराया जिनमें से ज्यादा लोग युवा थे जबकि जरूरत बुजुर्गों की थी। तब पादरी डॉमिनिक एमके दास और सूजन कुमार ने अपने उपदेशों में इसके बारे में बात करना शुरू किया। सबसे पहली बार जून 2007 में टी मारिया सबैस्टियन (52) ने सबसे पहले नेत्रदान के लिए हामी भरी। उसी साल 8 नेत्रदान दर्ज किए गए। अब चर्च की ओर से बनाई गई होली फैमिली फेडरेशन नेत्रदान को हैंडल करती है। फेडरेशन के सेक्रटरी वी ऑज्लिन ने बताया कि पहले एक प्राइवेट हॉस्पिटल को आंखें दान की जाती थीं लेकिन उनका स्टाफ आनाकानी करने लगा। उसके बाद हमने तिरुनेवली हॉस्पिटल में दान करना शुरू किया। अब मरने वाले लोगों में से 95% लोग आंखें दान करते हैं। गांव के सबसे युवा सदस्य जे जेफ्लिन इन्फेंसी सिलीसिया और जे जोलिन स्टेफी थे, जिनकी मौत 2014 और 2015 में हो गई थी। उस वक्त वे 15 और 14 साल के थे। पूरे जिले में यह पहला गांव बन गया है जहां से पूरा शरीर दान किया गया है। आसपास के गांवों से भी करीब 17 लोग नेत्रदान के लिए प्रेरित हुए हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके एक से ज्यादा सदस्य नेत्रदान कर चुके हैं।

Leave A Comment