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फुटपाथ पर रहने वाले बच्चे निकालते हैं अखबार, चार राज्यों में इनका है नेटवर्क

balaknama

यह खबर आप को चौका देगी लेकिन यह सत्य है साथ ही साथ आप कभी नहीं सुना होगा की बच्चे अपना खुद का अखबार भी चलाते हों? मगर ऐसा दिल्ली में कुछ बच्चे खुद रिपोर्टिंग कर अपना खुद का अखबार चलाते हैं. दिल्ली क गौतम नगर में कुछ बच्चे अपना खुद का अखबार ‘बालकनामा’ नामक नाम से चलाते है| विदित हो की यह अखबार पूरी तरह बच्चों के लिए ही है | इसकी शुरुआत सन 2003 में हुई थी | इससे आश्चर्य की बात यह है की इस अखबार की रिपोर्टर कोई खास बच्चे नहीं, बल्कि सड़कों पर काम करने वाले बच्चे ही करते है | ये वो बच्चे हैं जिनके मां-बाप मजदूरी करके अपना घर चलाते हैं. और ये बच्चे भी मजदूरी करके अपने मां-बाप का हाथ बंटाते थे | मगर अब ये बच्चे रिपोर्टर है. 8 पेज के इस अखबार की कीमत महज दो रुपये हैं. इसकी खास बात ये है की इसमें जिस भी रिपोर्टर की ऊम्र 18 साल से ज्यादा होती है, वो अखबार का सलाहकार बन जाता है | महीने भर की मेहनत के बाद अखबार की 8000 प्रतियां छापी जाती हैं, जो कि दिल्ली के कई अलग-अलग इलाकों में बांटी जाती हैं | ये बच्चे अपना ग्रुप बनाकर निकल पड़ते हैं अपना अखबार बांटने. कभी किसी होटल में तो कभी किसी पार्क में. कोई इस अखबार के बारे में नहीं जानता हैं, तो ये बच्चे खुद ही अपने अखबार के बारे में बतलाते है | यह भी है की इस अखबार को छापने के लिए चेतना नाम का एनजीओ इनकी मदद करता है |आज बालकनाम का नेटवर्क देश के चार राज्यों में फैला हुआ है जिनमे मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और हरियाणा है वर्तमान में बालकनामा से 10,000 बच्चे जुड़े हुए हैं |

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