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एनपीसीआईएल और फ्रांस की अरेवा के बीच जैतापुर नाभिकीय ऊर्जा परियोजना के लिए पूर्व-अभियांत्रिकी समझौता

भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्‍यूक्लियर पॉवर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और फ्रांस की मैसर्स अरेवा ने प्रस्‍तावित जैतापुर नाभिकीय ऊर्जा परियोजना के संबंध में 10 अप्रैल, 2015 को एक पूर्व-अभियांत्रिकी समझौता (पीईए) किया है। इस समझौते के तहत फ्रांस के सहयोग से 1650 एमडब्‍ल्‍यूई प्रत्‍येक के दो ईपीआर (ईवोल्‍यूशनल प्रेशराइज्‍ड रियेक्‍टर) की स्‍थापना की जाएगी।

pm in france

यह पीईए मुख्‍य रूप से भारतीय कानूनों, संहिताओं, निर्देशावलियों, नियमावलियों, विनियमनों, प्रचलनों एवं आम स्‍वीकृति के तहत ईपीआर परियोजना को लाइसेंस दिए जाने की योग्‍यता के आकलन एवं खुद ईपीआर प्रौद्योगिकी की बेहतर समझ से संबंधित है।

पीईए एनपीसीआईएल को ईपीआर प्रौद्योगिकी के विवरणों को प्राप्‍त करने, संयंत्र के ए‍क विस्‍तृत सुरक्षा आकलन करने एवं जैसे ही जैतापुर नाभकीय ऊर्जा परियोजना का क्रियान्‍वयन प्रारंभ होगा, परमाणु ऊर्जा नियमन बोर्ड (एईआरबी) के साथ लाइसेंस प्राप्‍त करने की प्रक्रिया को सुगम बनाएगा।

पीईए परियोजना के क्रियान्‍वयन के लिए सर्वाधिक कुशल एवं किफायती तरीकों की खोज करने एवं बिजली संयंत्र के विभिन्‍न अवययों के स्‍थानीयकरण की अधिकतम संभावना की खोज में भी योगदान देगा। इसका उद्देश्‍य न केवल परियोजना को लाभप्रद बनाना है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के अनुरूप भारत की घरेलू क्षमताओं को भी बढ़ाना है।

जब भी जैतापुर नाभिकीय ऊर्जा परियोजना का काम शुरू होगा, पहले से तैयारी वाले ये कदम बेशकीमती समय की बचत करेंगे और परियोजना के क्रियान्‍वयन में लागत बचायेंगे।

ईपीआर एक उन्‍नत हल्‍का जल रियेक्‍टर (एलडब्‍ल्‍यूआर) प्रौद्योगिकी है। इस प्रौद्योगिकी की बारीकियों को समझना भी हमारे लिए लाभदायक होगा, क्‍योंकि एनपीसीआईएल एलडब्‍ल्‍यूआर क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास करती है।

अरेवा के साथ पीईए समझौता नागरिक नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र में फ्रांस के साथ साझेदारी की भारत की स्‍थायी इच्‍छा का एक महत्‍वपूर्ण प्रतिबिंब है।

परमाणु ऊर्जा विभाग भारत में ईपीआर नाभिकीय रियेक्‍टरों के लिए अधिकतम स्‍थानीयकरण में सहयोग के लिए भारतीय कंपनी एल एंड टी और फ्रांस की मैसर्स अरेवा के बीच सहमति पत्र (एमओयू) का भी स्‍वागत करता है, जिस पर 10 अप्रैल, 2015 को हस्‍ताक्षर किए गए।

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