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Saturday, October 20, 2018

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Friday, October 19, 2018

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Thursday, October 18, 2018

अपने जन्मदिन के दिन विकास पुरुष एनडी तिवारी ने ली अंतिम सांस -

Thursday, October 18, 2018

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Thursday, October 18, 2018

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Thursday, October 18, 2018

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Wednesday, October 17, 2018

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Tuesday, October 16, 2018

गरीबी में हुई थी देश को तिरंगा देने वाले की मौत, जानिए खबर….

Tiranga-Flag

ध्वज का आरंभिक स्वरूप गांधीजी के सामने पेश करने से पहले करीब 30 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों का विश्लेषण किया था राष्ट्रीय ध्वज की कल्पना करने वाले पिंगली वेंकैया ने आप जानते हैं कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का निर्माता कौन था? आज जो तिरंगा भारत काराष्ट्रीय ध्वज है उसका सफर 1921 में आजादी से पहले शुरू हुआ था। उससे पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अलग-अलग मौकों पर भिन्न-भिन्न झंडों का प्रयोग करते थे। 1921 में आंध्र प्रदेश के रहने वाले पिंगली वेंकैया ने अखिल भारतीय कांग्रेस कार्य समिति के बेजवाड़ा ह्अब विजयवाड़ा सत्र में महात्मा गांधी के सामने भारत के राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर लाल और हरे रंग का झंडा प्रस्तुत किया। देश को तिरंगा देने वाले पिंगली वेंकैया का जन्म दो अगस्त 1876 को वर्तमान आंध्र प्रदेश में हुआ था। पिंगली वेंकैया भूविज्ञान और कृषि क्षेत्र से विशेष लगाव था। वो हीरे की खदानों के विशेषज्ञ थे इसलिए उन्हें ‘डायमंड वेंकैया’ भी कहा जाता था। वेंकैया 1906 से 1911 तक अपने जीवन का बड़ा हिस्सा कपास की विभिन्न किस्मों पर शोध में व्यतीत किया था इसलिए उन्हें ‘पट्टी ह्कपास वेंकैया’ भी कहा जाता था। उन्होंने कंबोडियाई कपास की एक किस्म पर अपना शोध पत्र भी प्रकाशित करवाया था। माना जाता है कि पिंगली वेंकैया ने ध्वज का आरंभिक स्वरूप गांधीजी के सामने पेश करने से पहले करीब 30 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों का विश्लेषण किया था। भारत को आजादी मिलने से पहले संविधान सभा ने जून 1947 में राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति को भारत के राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी। मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू, सी राजागोपालचारी, केएम मुंशी और बीआर आंबेडकर इस समिति के सदस्य थे। समिति ने सुझाव दिया कि कांग्रेस के झंडे को ही कुछ बदलाव के साथ भारतीय के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए। गांधीवादी वेंकैया ने पूरा जीवन सादगी से गुजारा। चार जुलाई 1963 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में एक झोपड़ी में उनका निधन हो गया। आजादी के बाद चार दशकों तक वेंकैया सरकारी उपेक्षा के शिकार रहे। साल 2009 में भारत सरकार ने उनकी सुध लेते हुए उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया। साल 2015 में विजयवाड़ा के आल इंडिया रेडियो भवन के बाहर केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने पिंगली वेंकैया की प्रतिमा का अनावरण किया। हालांकि देश को तिरंगा देने वाले वेंकेया के बारे में सरकार का रुख इस बात से भी बता चलता है कि भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए fiतिरंगे के इतिहासfl में पिंगली वेंकैया का नाम तक नहीं है। उन्हें बस आंध्र प्रदेश का एक युवक बताया गया है।

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