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दो स्टूडेंट्स ने बनाई 17,000 बच्चों की पढ़ाई की राह

e-waste

मुंबई | एक प्रतियोगिता से शुरू हुआ एक आइडिया अब गोरेगांव के एक स्कूल में पढ़ने वाले दो स्टूडेंट्स के लिए मुहिम बन गया है। दरअसल, इस साल की शुरुआत में दोनों ने राष्ट्रीय स्तर की एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उन्हें कोई मुद्दा लेकर उसका समाधान निकालना था। पिछले दो महीने में सूर्या बालासुब्रमण्यम और त्रिशा भट्टाचार्य ने स्कूलों और लोगों से 380 किलो ई-वेस्ट इकट्ठा किया और उसे एक NGO (नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन) को डोनेट कर दिया। इसके तहत ई-वेस्ट के बेहतर डिस्पोजल को लेकर वे दोनों एक अभियान चला रहे हैं। इसके जरिये उन्होंने झुग्गी में रहने वाले 17,000 बच्चों की पढ़ाई में मदद दी। सूर्या ने बताया, ‘हमारा स्कूल (विबग्योर हाई स्कूल) पहले ही कई अभियान चला रहा था और हम इस प्रतियोगिता में उन पर काम करने की उम्मीद कर रहे थे। इनमें से ई-वेस्ट पर चल रहे अभियान को मोमेंटम नहीं मिला पा रहा था। इसलिए हमने प्रतियोगिता में उस पर काम करने के बारे में सोचा।’ प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल करने के बाद उन लोगों ने इस पर कम जारी रखा। सूर्या और त्रिशा ने अपने स्कूलमेट्स से अपने-अपने घरों से ई-वेस्ट लाने को कहा। क्योंकि किसी को पता नहीं होता कि उनका करना है क्या। त्रिशा ने बताया, ‘ज्यादातर घरों में खराब फोन, चार्जर आदि पड़े रहते हैं हमें इंडिया डिवेलपमेंट फाउंडेशन मिला जो ई-वेस्ट इकट्ठा कर रीसाइकलिंग कंपनी को देता है। उससे मिले पैसे से 17,000 से ज्यादा वंचित बच्चों को पढ़ाया जाता है। उन्होंने अपने स्कूल से 180 किलो ई-वेस्ट इकट्ठा किया। इसके बाद वे बाहर निकले और हाउसिंग सोसायटीज से ई-वेस्ट इकट्ठा किया। उन्हें वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, चार्जर जैसी चीजें मिलीं। अब ये दोनों अपनी मुहिम में और भी लोगों की जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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