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सफाई कार्मिकों को किया पुरस्कृत, जानिए खबर -

Tuesday, April 7, 2020

फूल उगाने वाले किसानों के चेहरे मुरझाए, जानिए खबर -

Tuesday, April 7, 2020

हेल्प मी वेलफेयर सोसायटी ने गरीबों की मदद किये -

Tuesday, April 7, 2020

उत्तराखंड में पांच और कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए, संक्रमित मरीजों की संख्या हुई 31 -

Monday, April 6, 2020

सीएम ने उत्तराखंड के जवानों की शहादत को नमन किया -

Monday, April 6, 2020

उत्तराखंड : मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में बेहतर समन्वय के लिए बनाया गया कंट्रोल रूम -

Monday, April 6, 2020

पौड़ी : पाबौ में चट्टान से गिरने से महिला की मौत -

Monday, April 6, 2020

जुबिन नौटियाल ने ऑनलाइन शो से कोरोना फाइटर्स को कहा थैंक्यू -

Monday, April 6, 2020

अनूप नौटियाल व डा. दिनेश चौहान रहे कोरोना वाॅरियर -

Monday, April 6, 2020

पहल : देहरादून में 7745 भोजन पैकेट वितरित किये गये -

Sunday, April 5, 2020

सीएम त्रिवेन्द्र ने परिवार संग दीप जला कर हौसला बढाने का दिया सन्देश -

Sunday, April 5, 2020

उत्तराखंड में चार और कोरोना पाॅजीटिव मामले सामने आए, संख्या 26 हुई -

Sunday, April 5, 2020

दुःखद : जंगल की आग में जिंदा जली दो महिलाएं -

Sunday, April 5, 2020

आम आदमी की रसोईः जरूरतमंदों को दे रही भोजन और राशन -

Sunday, April 5, 2020

5 अप्रैल को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए अपने घरों में लाईट बंद कर दीपक जलाए : सीएम त्रिवेंद्र -

Saturday, April 4, 2020

लापता व्यक्ति का शव पाषाण देवी के मंदिर पास झील से बरामद हुआ -

Saturday, April 4, 2020

देहरादून : स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 9482 भोजन पैकेट वितरित किये गये -

Saturday, April 4, 2020

उत्तराखंड में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या हुई 22 -

Saturday, April 4, 2020

सोशियल पॉलीगोन ग्रुप ऑफ कंपनी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख का चेक दिया -

Saturday, April 4, 2020

लॉकडाउन : रचायी जा रही शादी पुलिस ने रुकवाई, 15 लोगों पर मुकदमा दर्ज -

Friday, April 3, 2020

पहले मजदूर और अब अरबो का विशाल साम्राज्य, जानिए एक मजदूर की कहानी

कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने सिद्ध कर दिया कि ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक बड़ी सोच, उद्देश्य-पूर्ति के लिए पक्का इरादा और कभी न हार मानने वाले जज़्बे की आवश्यकता होती है। 16 साल के इस बच्चे के पास अपने दोस्तों के द्वारा दिए गए मुंबई जाकर काम ढूंढने के सुझाव के अलावा और कुछ नहीं था। जेब में बिना फूटी कौड़ी के खाली पेट रहना और मुंबई के दादर स्टेशन पर सोने से ज्यादा तकलीफदेह अपने पिता और भाई के कुछ दिनों पहले हुई मौत के सदमें से बाहर आना था | पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से संबंध रखने वाले इस बच्चे के पिता आर्मी में थे। 1971 की जंग में गोलियां लगने के बाद से वो दुर्बल हो गए थे। ऐसी स्थिति में बड़ा भाई ही परिवार के लिए उम्मीद की किरण था। यह उम्मीद भी तब खत्म हुई जब आर्थिक तंगी के चलते परिवार बड़े भाई का इलाज़ न करवा सका और उनकी मृत्यु हो गई। बच्चे के पिता बड़े भाई की मौत के सदमें में चल बसे। अपनी लाचार माँ उस बच्चे के लिए भावनात्मक सहारा जरुर थी पर अपने चार भाई-बहनों के जितनी एक बड़ी जिम्मेदारी भी थी। दोस्तों के द्वारा दिया गया सुझाव तब सही साबित हुआ जब उस बच्चे को 15 रूपये की नौकरी और सोने के लिए एक जगह मिली। सोने की जगह एक ऐसे कमरे में थी जहाँ 20 मजदूर रहते थे। कमरा इतना छोटा था कि सोते वक़्त भी वहां हिलने की जगह नहीं थी। यह बच्चा, सुदीप दत्ता, हर दिन मीरा रोड स्थित अपने घर से जोगेश्वरी स्थित अपनी फैक्ट्री तक और वापस 40 किलोमीटर चलता। तकलीफ़ भरी जिंदगी में एक यही उपलब्धि थी कि इससे बचाया हुआ पैसा वो अपनी माँ को भेज पाता। दो साल की मजदूरी के बाद नया मोड़ तब आया जब नुकसान के चलते उसके मालिकों ने फैक्ट्री बंद करने का निर्णय ले लिया। ऐसी कठिन परिस्थियों में सुदीप ने नई नौकरी ढूंढने के बजाय फैक्ट्री ख़ुद चलाने का निर्णय लिया। अपनी अबतक की बचाई हुई पूंजी और एक दोस्त से उधार लेकर 16000 रूपये इकठ्ठा किये।19 साल का सुदीप जिसके लिए ख़ुद का पेट भरना एक चुनौती थी, उसने सात अन्य म जदूर के परिवारों को चलाने की जिम्मेदारी ली थी। फैक्ट्री खरीदने के लिए 16000 की राशि बहुत कम थी पर सुदीप ने दो साल मुनाफ़ा बांटने का वादा कर अपने मालिकों को मना लिया। सुदीप उसी फैक्ट्री का मालिक बन चुका था जहाँ वह कल तक मजदूर था।

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