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Wednesday, November 13, 2019

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Tuesday, November 12, 2019

बचपन की कुछ बातें और उनसे जुडी कुछ यादें….. -

Tuesday, November 12, 2019

प्रकाशपर्व: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने मत्था टेक प्रदेश की खुशहाली की कामना की -

Tuesday, November 12, 2019

उत्तराखण्ड: सीएम को फोन पर धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार -

Monday, November 11, 2019

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पौड़ी के विकास में सीता माता सर्किट होगा मील का पत्थर साबित : सीएम -

Monday, November 11, 2019

सिन्मिट कम्युनिकेशन्स द्वारा मिस टैलेंटेड का आयोजन -

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सीएम त्रिवेंद्र 550वें प्रकाश उत्सव एवं कार्तिक पूर्णिमा पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं -

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शहर के इस हालात पर अवैध टैक्सी स्टैंड जिम्मेदार, जानिए खबर -

Sunday, November 10, 2019

एक दिसम्बर को केंद्रीय कूर्मांचल परिषद का द्विवार्षिक चुनाव -

Sunday, November 10, 2019

सीएम त्रिवेंद्र ने फिल्म “शुभ निकाह” का मुहूर्त शॉट लिया -

Sunday, November 10, 2019

बिहार : सियासी घमासान पहुंचा हाईकोर्ट, याचिका दायर

पटना। बिहार का सियासी घमासान अब कोर्ट तक पहुंच चुका है। सर्वाधिक विधायकों वाली पार्टी राजद को सरकार बनाने का मौका नहीं दिए जाने के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में दो अलग-अलग लोकहित याचिका दायर की गई है। अब आज को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ तय करेगी कि याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए या नहीं? पहली याचिका बड़हरा से राष्ट्रीय जनता दल विधायक सरोज यादव व अन्य ने दायर की है जबकि दूसरी याचिका नौबतपुर के समाजवादी नेता जितेन्द्र कुमार की तरफ से दायर की गई है। याचिका में राज्यपाल के फैसले पर हैरानी जाहिर की गई है। कहा गया है कि नियमतरू सबसे पहले सबसे ज्यादा विधायकों वाली पार्टी राजद को सरकार बनाने का न्योता दिया जाना चाहिए था। नीतीश कुमार को आमंत्रित कर राज्यपाल ने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआर बोमई केस में साफ कर दिया था कि ऐसी स्थिति में राज्यपाल एवं केन्द्र सरकार को क्या करना चाहिए। गाइडलाइन होने के बावजूद ऐसा कदम उठाया गया। इसके साथ साथ सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में रामेश्वर प्रसाद एवं भारत सरकार के मामले में भी व्यवस्था दी थी कि अधिक विधायक वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए न्योता दिया जाना चाहिए। उसके इंकार करने पर ही दूसरी बड़ी पार्टी बुलाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील जगन्नाथ सिंह ने बताया कि पूरा घटनाक्रम गैर संवैधानिक तरीके से हुआ। इसमें हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए। दूसरी ओर अधिवक्ता दिनेश कुमार खुरपीवाला ने दायर याचिका में कहा है कि पहले तेजस्वी यादव को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए था। क्योंकि राजद बड़ी पार्टी थी। ऐसा नहीं कर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163,164 एवं अनुच्छेद 174 का खुला उल्लंघन किया गया है।

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