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Sunday, June 24, 2018

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पौधारोपण के क्षेत्र में मैती आंदोलन के प्रयास सराहनीय : सीएम त्रिवेन्द्र -

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अनुसूचित जाति व जनजाति में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने पर फोकस : सीएम त्रिवेंद्र -

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अमित शाह 24 जून को दून दौरे पर, जानिए ख़बर -

Saturday, June 23, 2018

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Saturday, June 23, 2018

साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर रोक के फैसले का अध्ययन किया जा रहा : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र -

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हाईकोर्ट ने गंगा में राफ्टिंग सहित सभी वॉटर स्पोर्ट्स पर लगया बैन जानिए ख़बर -

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सीएम ने की अनेक विभागो के कार्यो की जनपदवार समीक्षा , जानिए ख़बर -

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पति ने पत्नी को पीटने की मांगी इजाजत जानिए ख़बर -

Friday, June 22, 2018

देश की रक्षा के लिए उत्तराखंड का एक और लाल शहीद -

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जम्मू कश्मीर में एनएसजी कमांडो तैनात, करेंगे आतंकियों का सफाया -

Friday, June 22, 2018

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Thursday, June 21, 2018

भूख की सत्यता …

hungry

भूख एक ऐसा तत्त्व है जिसका अहसास हमें हमारे जीवन के जन्म के साथ ही होता है l नवजात शिशु को भय , प्यार गुस्सा आदि का ज्ञान नही होता है , पर भूख का होता है I क्या हमने कभी शिशु को गुस्सा करते देखा है ? नहीं , लेकिन जब उसे भूख लगती है वो रो कर अपनी माँ को संकेत देता है कि भूख लग गयी है उसके लिए सबसे प्यारी चीज माँ का ढूध है , तभी हम देखते है कि बचा तब थोड़ा बड़ा होता है तो उसके सामने कोई भी चीज आने पर वह मुह में डालता है I जब चिड़िया के बचे छोटे होते है तो माँ उनके लिए भोजन लाती है , यहाँ तक कि खूंखार शेरनी भी शिकार कर बच्चो को देती है , गाये के बछड़े की पुकार सुन कर गाये को पता लग जाता है कि वे भूख है , यह है भूख I कहते है भूख वह पेट कि आग है जिसके लिए इंसान चोरी , डकैती करता है I गर्भवती माँ के पेट में भी शिशु को भोजन कि भी जरुरत होती है और जन्म के बाद उसे माँ स्तन पान कराती है I शिशु का अच्छे से पेट भरने के लिए माँ कि भी भूख मिटनी चाहिए ताकि ढूध सही आये , पर गरीबो को ये नही मिलता l कहते है दाने दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है , कहते है ऊपर वाला भूख जरूर उठाता है पर भूखा नही सुलाता , ये बाते सिर्फ कहने मात्र रह गयी है I सोने कि चिड़िया कहलाने वाला देश जिसमें सुख सम्पदा कि कोई कमी नही थी , आज कितने गाँवों और शहरो में लोंगो को भर पेट तो दूर की बात है अच्छा खाना देखने को भी नही मिलता है l आज भी छोटे बच्चे कूड़ेदान से किसी की झूठन उठा कर खाते है l एक और जहां ऐसी दशा है वही दूसरी ओर अमीर लोग सिर्फ एक कप चाय के लिए पांच सितारा होटल में पांच सौ रुपये देने में अपनी शान समझते हैं , कितने क्लब , बार में और महिलाएं पार्लर में १०-१५ हजार रुपये उड़ाती हैं और लोग भोग विलास में पैसा बर्बाद करते हैं l कपडे-जूते हर चीज ब्रांडेड पहनते हैं लेकिन यदि कोई बिखरी उनसे कहे कि कल से कुछ खाया नही तो उनकी करुणा रहित दिल का क्या कहे ? कुछ लोग तो एक-दो रुपये देते हैं और कुछ इंसानियत के मारे होते हैं जो सिर्फ धित्कारते हैं l दिए गए एक-दो रूपये में होगा क्या ? इन एक-दो रुपये में तो अब बिस्कुट भी नही आते हैं जिससे कि भूख शांत हो जाये तो रोटी तो दूर कि बात हैं l लगता हैं लोगों कि आज इंसानियत मर चुकी हैं l हमसे जितनी हो सके मदद करनी चाहिए उन लोगों कि जो रोटी , कपडा , माकन से वंचित हैं l हाँ हम मक्कन नही दे सकते हैं , परंतु रोटी और शिक्षा दे सकते हैं l क्या पता हमें उनकी दुआएं किस मुश्किल से बचाये ? इनकी दुआएं करोड़ो से भी कीमती हैं क्योंकि पैसा-दौलत हमारे साथ जायेगा , जायेंगे तो अच्छे कर्म l

– हिना आज़मी मॉस कम्युनिकेशन साई इंस्टिट्यूट देहरादून

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