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सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की मौत से जुड़ी जांच याचिकाएं खारिज की

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जज बृजभूषण हरकिशन लोया की मौत की जांच से जुड़ी याचिकाएं खारिज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. मौके पर चार जज मौजूद थे और उन जजों के बयान पर शक करने के लिए कोई ठोस वजह नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में याचिकाकर्ताओं पर तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट का कहना है कि जनहित याचिकाओं का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. इस याचिका के ज़रिये अदालत की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है. इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिस्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएम. खानविलकर कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई तथ्य नहीं है, सभी जज एक साथ शादी में गए थे और एक साथ ही रुके थे. जज लोया की मौत के वक्त चार जज उनके साथ मौजूद थे. ऐसी कोई वजह नहीं है कि हम उनके बयान पर यकीन ना करें. उनकी बातों पर शक करने के लिए हमें बहुत ठोस वजह की जरूरत है. बेंच ने कहा कि न्यायपालिका की अखंडता और आम जनमानस की हित में हम ये याचिका खारिज करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज लोया की मौत से जुड़े जो मेडिकल रिपोर्ट पेश किए गए हैं, उस आधार पर ये कहना होगा कि वो एक सामान्य मौत थी. कोर्ट ने कहा कि इस मामले के जरिये अदालत को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई. जजों पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए. कुछ लोग राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जनहित याचिका का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाखुश बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन का कहना है कि वह इसे चुनौती देने के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा. बता दें कि जज लोया की मौत 30 नवंबर 2014 की रात नागपूर में हुई थी, जब वह तीन अन्य जजों के साथ मुंबई से वहां एक शादी में गए थे. मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. लेकिन कुछ संगठन, राजनीतिक दल और समाजिक कार्यकर्ता इस मौत को संदिग्ध बता रहे थे. उनका आरोप था कि जज लोया पर सोहराबुद्दीन शेख एंकाउंटर मामले में दबाव बनाया जा रहा था. इस मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आरोपी थे.

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