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उत्तराखण्ड में दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या चिंता का विषयः डॉ. संजय

देहरादून। संजय ऑर्थोपीडिक स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर, सेवा सोसाइटी एवं बी. जे. पी. महिला मोर्चा, मसूरी मंडल के द्वारा शिशु विद्या मंदिर, मसूरी में निःशुल्क हड्डी एवं जोड़ रोगों एवं स्त्री एवं प्रसूति के मरीजों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत एक व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि एवं वक्ता पद्मश्री से सम्मानित ऑर्थोपीडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. बी. के. एस. संजय, मंडल अध्यक्ष मोहन पेटवाल, ओ. पी. उनियाल पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, बी. जे. पी. महिला मोर्चा, मसूरी मंडल की अध्यक्षा पुष्पा पडियार, मदन मोहन शर्मा नगर पालिका नामित सदस्य एवं कोषाध्यक्ष नमिता कुमाई ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। डॉ. बी. के. एस. संजय के एक शोध ने दर्शाया कि 90 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण चालक है तथा इन दुर्घटनाओं में ओवर लोडिंग, ओवर स्पीड़िग, ओवर टेकिंग, नींद का अभाव एवं सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण है। मैं यहां पर बताना चाहूँगा कि रात के समय शरीर की थकान को कम करने के लिए शराब का सेवन करना भारत में एक आम बात है लेकिन यह ड्राइवरों और पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक आम है जिससे दुर्घटना की संभावना और दुर्घटना की गंभीरता बढ़ जाती है जिसको हाल ही में उत्तराखण्ड़ के टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चम्पावत, चकराता आदि में हुई दुर्घटनाऐं भली-भाँति दर्शाती हैं। डॉ. बी. के. एस. संजय ने बताया कि हाल ही में प्रदेश में हुई बढ़ती हुई सड़क दुर्घटनाऐं चिंता का विषय हैं। इस महामारी के कारणों का आंकलन प्रदेश के शासन, प्रशासन, पुलिस, यातायात से जुड़े हुए सभी लोगो को इस महामारी के कारणों का आंकलन करना चाहिए और इनको रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
डॉ. गौरव संजय ने ऑडियो-विजुअल प्रेजेन्टेशन के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले दुष्परिणामों को आए हुए लोगों को बताया और लोगों से अनुरोध किया कि लोग अपने और जनहित में यातायात के नियमों को सीखें तथा मानें। प्रदेश के भौगोलिक स्थिति को देखते हुए लोग रात में सड़क यात्राऐं ना करें, शराब पीकर गाड़ी ना चलाऐं, वाहन चलाते समय सीट बेल्ट और हेल्मेट को हमेशा पहनें। वर्तमान में उत्तराखण्ड में स्कूलों में ग्रीष्म अवकाश, शादियों एवं चार धाम यात्रा के चलते वाहनों एवं यात्रियों की संख्या भी बढ़ जाती है जिससे दुर्घटनाओं की संभावना अधिक बढ़ जाती हैं। देश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए और मानसून के समय में इन दुर्घटनाओं की संख्या ज्यादा हो जाती है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के कारण सड़कों में फिसलन, सड़कों का कटाव तथा धुंध का होना आम बात हो जाती है, जिससे वाहनों का अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होना एक आम बात है। जिससे दुर्घटना कि सम्भावना भी बढ़ जाती है तथा दुर्घटना से होने वाली क्षति भी बढ़ जाती है।

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