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लिट्टी -चोखा के साथ पूरबिया संस्कृति की झलक मिलेगी देखने को, जानिए खबर

हरिद्वार । पूरबिया व्यंजन लिट्टी -चोखा के साथ पूरबिया संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। पूर्वांचल उत्थान संस्था के तत्वाधान और निरंजनी अखाड़े के महंत आलोक गिरी के सानिध्य में आयोजित सदस्यता विस्तार कार्यक्रम पूरबिया लोगों का जमघट लगेगा। हालांकि हरिद्वार में करोना संक्रमण के दृष्टिगत कार्यक्रम को सूक्ष्म तौर पर आयोजित किया जायेगा। स्थिति सामान्य होने पर भविष्य में वृहद स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। वर्तमान में संस्था की ओर से सरस्वती पूजा और छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। आने वाले दिनों नवरात्र में दूर्गा पूजा सहित अन्य पूर्वांचल के पर्वो को भव्यता के साथ आयोजित किया जायेगा। रविवार, 4 अक्टूबर को श्री सिद्ध बलि हनुमान मंदिर में राजलोक विहार, फूटबाल ग्राउंड के निकट, जगजीतपुर में आयोजित होने कार्यक्रम में मंशा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी और हरेराम आश्रम कनखल के पीठाधीश्वर महंत महामंलेश्वर कपिल मुनि की गरिमामय उपस्थिति में संस्था के में शामिल होने वाले नये सदस्यों का स्वागत किया जायेगा। पूर्वांचल उत्थान संस्था के महासचिव सूर्य नारायण झा ने लोक संस्कृति और परंपरा ही भारत की पहचान है और इस पहचान को कायम रखने के लिए उनकी संस्था वर्षो से कार्य कर रही है। महंत आलोक गिरी की प्रेरणा से ही पूर्वांचल उत्थान संस्था का विस्तार करते हुए कनखल, ज्वालापुर, सहित अन्य क्षेत्रों में रहने वाले पूर्वांचल वासियों को एक मंच पर आने का मौका दिया जा रहा है।इस कार्य में संस्था के प्रचार सचिव विनय मिश्रा और संपर्क प्रमुख कृष्ण कुमार यादव मुख्य भूमिका निभा रहे है। महंत आलोक गिरी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सर्वप्रथम अपने परिवार को ही मजबूत करता है। इसके बाद ही समाज और देश की बारी आती है। समाजिक विघटन के इस दौर में पूर्वांचल के लोगों ने एकता की मिसाल कायम की है। परदेश में अपनों के साथ रहने का अलग ही आनंद है। उन्हें खुशी है कि पूर्वांचल के लोगों ने एक साथ संगठित होकर सदस्यता ग्रहण करने का निर्णय किया है। भविष्य में इसका नीश्चित लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति, परंपरा, वेशभूषा, रहन सहन, खान-पान से ही व्यक्ति की पहचान होती है। पाश्चात्य सभ्यता के रंग में रंगे लोग अपनी संस्कृति को भूल गये है। ऐसे में पूर्वांचल वासियों का प्रयास सराहनीय है। परदेश में रहते हुए भी ये लोग अपनी संस्कृति को बचाने का कार्य कर रहें है। इसके लिए सभी लोग बधाई के पात्र है। महंत आलोक गिरी ने विष्णुदेव शाह, विनोद शाह, काली प्रसाद शाह, रामसागर जायसवाल, रामसागर यादव, कामेश्वर यादव को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए महती भूमिका का निर्वहन करने के लिए बधाई दी।

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