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पहचान : सड़क पर अचार बेचने वाली महिला, आज है अचार फैक्ट्री की मालकिन

 

 

बुलंदशहर |जीवन में संघर्ष हो तो हर कार्य मुमकिन है , भले ही किसी से सहारा न मिले अगर महिला कुछ करने का या कामयाबी हासिल करने का सोच ले तो एक दिन सफल जरूर होती है। वह अपने अंदर एक विश्वास लेके चलती है की वह जरूर कामयाब होगी। अगर इंसान के अंदर यदि कुछ करने के लिए जुनून और लगन हो तो उसे सफलता की बुलंदियों को छुने से कोई नहीं रोक सकता है। वह व्यक्ति जीवन की तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए भी जीवन में कामयाबी हासिल कर ही लेते हैं। एक महिला जिसने सभी चुनौतियों को झेलते हुए महज 500 रुपये से बिजनेस शुरु किया था और आज करोड़ों का टर्नओवर हो रहा है। सफलता की यह कहानी है उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर एक छोटे-से इलाके से सम्बंध रखनेवाली कृष्णा यादव की, जो अपनी 4 कम्पनियों की मालिक है जिसका टर्नओवर करोड़ों में होता है। कृष्णा और उनके पति किसान परिवार से सम्बंध रखते हैं ऐसे में उन्होंने जीवनयापन के लिए सब्जियां बेचनी शुरु की। इसके लिए उन्होंने किराए पर जमीन लेकर सब्जियां उगानी शुरु की और उसी सब्जियों में बाजार में बेचने लगे। इस तरह उन्हें जीवनयापन के लिए थोड़ी-बहुत कमाई होने लगी। उसके बाद उन्होंने साल 2001 में कृषि विज्ञान केंद्र से 3 महीने का खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लिया। फूड प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने आचार बनाने 2 अलग-अलग तरीके को सीखा। उसके बाद कृष्णा यादव ने आचार बनाकर बेचने का फैसला किया और 3 हजार रुपये की लागत से आचार बनाया जिसकी बिक्री करने के बाद उन्हें 5200 रुपये की आमदनी हुई। हालांकि, इतनी रकम कुछ अधिक नहीं है लेकिन जिस आर्थिक दौर से कृष्णा गुजर रहीं थीं उनके लिए यह एक अच्छी आमदनी थी। एक बार कमाई होने पर कृष्णा को यह एहसास हो गया था कि बाजार में आचार की काफी मांग है। ऐसे में यदि आचार का व्यवसाय शुरु किया जाए तो बेहतर आमदनी कमाई जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने आचार बनाना शुरु किया लेकिन अब था उसकी मार्केटिंग का जिसके लिए उनके पति ने घर-घर जाकर आचार बेचना शुरु किया। हालांकि यह काम थोड़ा कठिन था क्योंकि खुला आचार खरीदने से लोग हिचकते थे लेकिन अच्छी क्वालिटी होने के कारण लोगों का भरोसा बढ़ता गया और उनके आचार की बिक्री होने लगी। कृष्णा के लिए यह सब करना काफी कठिन था क्योंकि आचार बनाने के लिए मसाले पीसना और फिर आचार डालने तक का सभी काम खुद से ही करती थीं। धीरे-धीरे ही सही लेकीन उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें आचार के ऑर्डर्स मिलने लगे। इस प्रकार उन्होंने कुछ समय बाद अपनी खुद की कम्पनी स्थापित की जिसका नाम “श्री कृष्णा पिकल्स” है। ।कृष्णा और उनके पति ने साथ मिलकर इस कम्प्नी को खड़ा और आचार समेत अन्य चीजें भी बेचने लगे। वर्तमान में चार कंपनियों के मालिक हैं और चार करोड़ से अधिक का टर्नओवर हो रहा है।

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