बौद्धिक संपदा अधिकार उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को देते है बढ़ावा : प्रो. प्रवीण वर्मा
श्रीनगर गढ़वाल/ देहरादून | उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार की संस्कृति को विकसित करने के लिए शोध कार्यों की सुरक्षा बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से अत्यंत आवश्यक है। यह विचार मुख्य अतिथि प्रो. प्रवीण कुमार वर्मा, फेलो ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज , पूर्व निदेशक, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने व्यक्त किए। उन्होंने आज वर्चुअल माध्यम से आरंभ हुए “बौद्धिक संपदा अधिकार: नवाचार और उद्यमिता के प्रेरक” विषय पर एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसे मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया है। प्रो. वर्मा ने भारत सरकार की कई महत्त्वपूर्ण पहलों—जैसे अटल इनोवेशन मिशन, स्टार्ट-अप इंडिया, तथा IITs और IIMs में स्थापित इनक्यूबेशन सेंटर—का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी कदम देश में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका में आए परिवर्तनकारी बदलाव पर बल देते हुए कहा कि अब इन संस्थानों को केवल अकादमिक प्रकाशनों तक सीमित न रहकर उद्यमिता, नवाचार और क्षेत्रीय ज्ञान संवर्द्धन की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. राहुल कुँवर सिंह, निदेशक ने कहा कि IPR साक्षरता अब वैकल्पिक नहीं रही, बल्कि यह शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि बौद्धिक संपदा प्रयोगशाला से बाजार तक पहुँचने वाला एक महत्त्वपूर्ण सेतु है। पाठ्यक्रम का अवलोकन एवं ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के महत्व को कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सौरभ यादव ने प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि देश के 15 राज्यों से कुल 67 प्रतिभागी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। सत्र का संचालन एवं मुख्य अतिथि का परिचय डॉ. सोमेश थपलियाल, सहायक निदेशक, MMTTC ने किया, जबकि डॉ. कविता भट्ट, कार्यक्रम कार्यकारी अधिकारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे सप्ताह चलेगा, जिसमें व्याख्यान, संवाद और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से IPR की समझ तथा नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।





















