देश की अर्थव्यवस्था मजबूत या मजबूर : सुशील सैनी
देहरादून | हमारे देश के कुछ भटके हुए नौजवान, मिडिया और कुछ बुजुर्ग भी खूब हो हल्ला मचा कर कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था 4 नंबर पर आ गई है और हमने जापान को भी पछाड़ दिया है, तो क्या ये सभी भटके हुए भेड़ बकरी ये नहीं जानते कि हम तमाम तरह के सुचकांक में हम 100 वे नंबर तक भी ढ़ूढने से नहीं मिलते हैं। जहां जापान की प्रति व्यक्ति आय 35000 हजार डॉलर से ज्यादा है और वहां की अर्थव्यवस्था का बंटवारा भी लगभग सभी में समान रूप से है दुसरी तरफ हमारे प्यारे भारत में 85% से ज्यादा लोगों की प्रति व्यक्ति आय 35 सौ डॉलर भी नहीं है और तो और आज भी तमाम लोग एक वक्त के खाने पर जिंदा है! दुसरी बात हमारे यहां लगभग 50% धन पर 1% लोग कुंडली मारकर बैठे हैं और टोटल 90% से ज्यादा पर 15% बैठे हैं बाकी सब पांच सात प्रतिशत में गुजारा कर रहे हैं तो सिर्फ ड्रामा चल रहा है देश में। ग्राउंड पर आओ और देखो लोगों से अपने घर और गाड़ी की किस्त तक नहीं भरी जा रही है बैंक डिफाल्टर घोषित कर दे रहे हैं और सिबिल स्कोर ध्वस्त हो गए हैं, एक किलो दूध की जगह आधे में काम चला रहे हैं और एक किलो प्याज लाने वाले आधा किलो में काम चला रहे हैं। बस विक्रित मिडिया को काम पर लगाकर अंडोलों को अंडे से बाहर नहीं झांकने दिया जा रहा है। शिक्षा स्वास्थ्य,महंगाई बेरोज़गारी, महिला सम्मान एवं सुरक्षा आदि तो सारे मुद्दे समाप्त कर दिये हैं हमारे जीनियस जिल्लेइलाही ने बड़ी जिल्लत के साथ। सोचो समझो और इस बलात्कारी नेताओं की जमात को हटाओ इस देश से बरना, आर्थिक असमानता देश को एक भयानक स्थिति में ला सकतीं हैं क्योंकि मेरा मानना है कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का सिर्फ हवाई दौरा कर जायजा लिया जा रहा है इसके अलावा जमीन पर कोई राहत नहीं मिल रही है।





















