जब मन की पवित्रता होगी तो ही संसार, देह और भोगों से विरहिक होगी :आचार्य सौरभ सागर
देहरादून | परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्तोत्र उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में आज दसलक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म एव भगवान पुष्पदंत स्वामी का निर्वांण कल्याणक मनाया गया। जिसमे प्रातः जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की गयी। शांतिधारा करने का सौभाग्य अभिषेक जैन मनन जैन को प्राप्त हुआ। भगवान् को 9 किलो का निर्वांण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य राजीव जैन सात्विक जैन को प्राप्त हुआ।
पूज्य आचार्य श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि
“बाहा शुद्धता शौच धर्म नहीं बल्कि मन की पवित्रता ही शौच धर्म है।” जब मन की पवित्रता होगी तो ही संसार, देह और भोगों से विरहिक होगी। शौच धर्म का दूसरा नाम संवेग धर्म है।जब इंसान के अंदर लालच जन्म लेता है तभी उसके सुख और संतुष्टि को खत्म कर देता है।
शौच धर्म कहता है कि वस्तु को जानो देखो पर ग्रहण करने का भाव मत करो।यही लोभ का त्याग हममें शौच धर्म को प्रकट कर देगा। जो वस्तु तुम्हारी नहीं थी, है नहीं, और कभी होगी नहीं उसका त्याग करो, शौच धर्म प्रकट हो जाएगा।
अपना-अपने काम आ जाए, वहीं शौच धर्म है। तुम किसी के दास (आधीन) नहीं रहना चाहते तो किसी के दास (आधीन) नहीं बनाऊंगा-तो शौच धर्म जीवन में आ जाएगा।आज दोपहर श्री वर्णी जैन विद्यालय में श्री मिट्ठन लाल सुरेश चंद वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका विषय:- “प्रसारण मीडिया अपनी विश्वनियता खो रहा है” रहा।संध्याकालीन बेला में महिला जैन मिलन द्वारा ‘भरत बाहुबली’ नाटिका का सुंदर मंचन किया गया।
महापर्व के चौथे दिन,उत्तम शौच धर्म का पालन करते हुए संस्कार प्रेरणा ज्ञान योगी आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में भारतीय जैन मिलन की शाखा “महिला जैन मिलन” की वीरांगनाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की बेला में बहुत ही सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर, महावीर प्रार्थना व मंगलाचरण से किया गया। तत्पश्चात महिला जैन मिलन की वीरांगनाओं द्वारा भव्य नाटिका ऋषभ देव के पुत्र *भरत- बाहुबली* बहुत ही सुंदर प्रस्तुति दी गई। इस नाटिका में दर्शाया गया है, राजा ऋषभदेव को नृत्य करती हुई अप्सरा नीलांजना की मृत्यु देखकर वैराग्य हो गया और उन्होंने अपने पुत्रों को राज्य सौंप दिया। कुछ समय पश्चात उनके दो पुत्रों के बीच युद्ध होता है।भरत और बाहुबली के बीच हुए तीन द्वंदयुद्धों के बाद बाहुबली ने तीनों युद्धों में भरत को हराकर विजय प्राप्त की। इस युद्ध के बाद बाहुबली को वैराग्य हो गया वह सब कुछ छोड़कर मुनि बन गए। उन्होंने कठोर तपस्या की और केवल ज्ञान प्राप्त किया। महिला जैन मिलन की वीरांगनाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने व सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग किया। कार्यक्रम में संगीता जैन, स्वाति जैन,मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु सचिन जैन पायल जैन, प्रीति जैन, मंजू जैन, ज्योति जैन, मुकेश जैन ,पूनम जैन, बच्चों में विदुषी , रिद्धि ,अन्यया, आदि, वीर, आराध्या, तनिष्क इन सभी की प्रस्तुति सराहनीय रही। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रियंका जैन द्वारा किया गया। 31वाॅ पुष्प वर्षा योग समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ, जिसके लिए वह सभी बधाई के पात्र हैं। निर्णायक मंडल सिखा थपियल, उमाकांत डबराल, शैलेश कंडवाल रही, कार्यक्रम में संदीप जैन ,अंकुर जैन, अमित जैन, मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु सचिन जैन, रचना जैन ,मीनू जैन ,साधना जैन, लोकेश जैन संदीप जैन सुखमल नरेश चंद जैन अनूप कपूर आदि मौजूद रहे।






















