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राजनीति : स्थाई राजधानी को लेकर फिर राजनीतिक घमासान

 

देहरादून। तीन साल बाद गैरसैंण में सरकार बजट सत्र का आयोजन करने जा रही है। 13 मार्च से शुरू होने वाले इस बजट सत्र से पूर्व एक बार फिर राजधानी के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमा रहा है, मुद्दा है गैरसैंण की उपेक्षा का। भाजपा ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी तो घोषित कर दिया लेकिन सालों तक यहां सत्र का आयोजन न कराने और विकास कार्य न कराने को लेकर विपक्ष भाजपा सरकार पर निशाना साध रहा है, वही पहाड़ के लोगों में सरकार के इस रवैया को लेकर नाराजगी है। भाजपा नेताओं के बयानों से इस तरह के संकेत जरूर मिल रहे हैं कि इस बार सीएम धामी गैरसैंण राजधानी को लेकर कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। यह घोषणा क्या होगी? यह समय ही बताएगा। लेकिन कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि भाजपा घोषणाओं की राजनीति बंद करें और गैरसैंण को राज्य की स्थाई राजधानी घोषित करें तथा यहीं से सरकार के सर्वकालिक कार्यों का संचालन करें जैसे अब तक देहरादून से होते आए हैं। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह का कहना है कि घोषणाएं तो पहले भी होती रही हैं, ग्रीष्मकालीन राजधानी और कमिश्नरी बनाने की घोषणा भाजपा ने ही की थी। ऐसी ग्रीष्मकालीन राजधानी का क्या फायदा जहां सालों से विधानसभा भवन में ताले लटके हुए हैं। यूं तो राजधानी गैरसैंण का नाम राज्य गठन से पूर्व ही चर्चाओं के केंद्र में आ गया था लेकिन दो दशक तक राज्य का राजकाज अस्थाई राजधानी देहरादून से ही संचालित होता रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने गैरसैंण में भूमि पूजन कर गैरसैंण राजधानी की नींव तो रख दी गयी थी, लेकिन बीते 10 सालों में यह भवन निर्माण और चंद दिनों के कुछ गिनती के विधानसभा सत्रों के आयोजनों की महज एक औपचारिकता ही पूरी की जाती रही है। जिसे लेकर पहाड़ के लोगों की नाराजगी स्वाभाविक ही है। लोग चाहते हैं कि प्रतीक और दिखावे की राजनीति जो गैरसैंण राजधानी को लेकर अब तक होती रही है वह बंद होनी चाहिए और सरकार कोई ठोस फैसला करें।

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