रिक्शा चालक एवं मजदूर की बेटियां फुटबॉल की दुनिया में मनवा रहीं अपना लोहा
छपरा | एक ऐसी फुटबॉल टीम है जो छपरा की शान है | जिस जी हां टीम की कहानी बताने जा रहे है आप हैरान हो जाएंगे | इस फुटबॉल टीम में खेलने वाली 94% बेटियां रिक्शा चालक और मजदूर की हैं | जिनके खेलने के लिए मैदान भी नहीं है | वे खेत खलियान में खेल कर जिले और राज्य का नाम रोशन कर रही हैं | और आने वाली पीढ़ी के लिए एक नई लकीर खींच रही हैं | हम बात कर रहे हैं सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड अंतर्गत शेखपुरा गांव की, जहां गांव की बेटियां खेत खलियान में फुटबॉल खेलती हैं और कई राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर चुकी हैं | यहीं नहीं अब इस टीम में खेलने वाली लड़कियां खेल के माध्यम से नौकरी भी हासिल कर रही हैं. अभी तक तीन से चार लड़कियां बिहार पुलिस बीएसएफ और अन्य विभाग में नौकरी ले चुकी हैं.1993 से यहां फुटबॉल खेली जा रही है | लेकिन यहां पहले लड़के खेला करते थे | अब लड़कियां भी खेल रही हैं. जिन्हें सफलता भी मिल रही है | छपरा से प्रदीप कुमार आकर यहां लड़कियों को प्रशिक्षण देते हैं जिन्हें मोहम्मद अली के द्वारा भरपूर सहयोग किया जाता है और दोनों मिलकर गरीब मजदूर की बच्चियों को आसमान छूने में सहयोग कर रहे हैं |





















