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उत्तराखंड : सचिवालय ए ने जीता मोनाल कप 2025 का खिताब -

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पहचान : जहां करते थे चपरासी की नौकरी, अब हैं असिस्टेंट कमिश्नर -

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निशा 6 बार हुई असफल, नहीं हारी हिम्मत बनी आइएएस -

Thursday, December 11, 2025

उत्तराखंड : छोटे-छोटे अपराधों में कारावास की सजा के बजाए अब सिर्फ अर्थ दंड का प्रावधान -

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अंकित तिवारी ने अपने जन्मदिन पर दिया रक्तदान का संदेश, जानिए खबर -

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मोनाल कप : सेमीफाइनल में पहुंची सचिवालय ए और सचिवालय डेंजर्स की टीम -

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इनसे सीखे : गरीबी से लड़कर पवन बने आइएएस -

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राहुल की धूप, मिट्टी से सोशल मीडिया तक का सफर -

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मोनाल कप 2025 : हरिकेन और सचिवालय ईगल्स टीम की बड़ी जीत -

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रॉयल स्ट्राइकर्स और सचिवालय ए की टीम मोनाल कप प्रतियोगिता के अगले दौर में पहुंची -

Monday, December 8, 2025

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Saturday, December 6, 2025

दुःखद : ट्रैक्टर-ट्रॉली व बाइक की जोरदार भिड़ंत से गई दो लोगों की जान -

Saturday, December 6, 2025

मोनाल कप : मैच के अगले दौर में पहुँचे सचिवालय रॉयल स्ट्राइकर, सचिवालय ए , सचिवालय वॉरियर्स और सचिवालय पैंथर -

Saturday, December 6, 2025

नौसेना दिवस-2025 : राज्यपाल ने किया डॉक्यूमेंट्री का विमोचन, नौसेना की भूमिका की सराहना की -

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Friday, December 5, 2025



इनसे सीखे : कभी लगाता था बिरयानी का ठेला, आज हैं करोड़ों के रेस्टोरेंट का मालिक

चेन्नई | हम में से बहुत से लोग इस सिर्फ़ इसलिए आगे पढ़ाई जारी नहीं रख पाते क्योंकि उनके घर की मजबूरियाँ उनके आगे बाधा बनकर खड़ी हो जाती हैं। भले ही उनके अंदर पढ़ाई को लेकर कितनी भी लगन और मेहनत करने की क्षमता क्यों ना हो। लेकिन बहुत से लोग इन मजबूरियों के बाद भी अपना रास्ता बना ही लेते हैं। उन्हें ही ज़िन्दगी का असली सिकंदर कहा जाता है। ऐसी ही सच्ची कहानी है आसिफ है की । उस शख़्स को बचपन में आर्थिक तंगी के चलते पैसा कमाने के लिए घर से बाहर निकलना पड़ा। ताकि घर के हालात को संभाला जा सके। लेकिन घर संभालने के चक्कर में उसकी ज़िन्दगी कई बार डगमगा गई। परन्तु उसने हार नहीं मानी और आज वह कामयाबी की नई मिसाल बन कर खड़ा हो गया है। आसिफ अहमद चेन्नई के पल्लवरम में रहते है | पिता नौकरी में हटा दिए गए तो उनके परिवार की हालात और ख़बराब हो गए जिसकी वजह से आसिफ को 13 वर्ष की आयु में काम करना पड़ा | चमड़े के जूते का काम शुरू किया लेकिन वह अधिक दिन तक नही चल सका , फिर वह खाना बनाने का कार्य शुरू किया | पहले वह बिरयानी विशेषज्ञ वाले के यहां कुछ समय कार्य सीखे कुछ समय मे वह नौकरी भी चली गयी फिर मुंबई में नौकरी लगाने वाले एजेंट के झांसे में आ गया आसिफ इस झांसे में 35 हज़ार रुपये भी गंवा दिए फिर निराश होकर गांव वापस आ गया और फिर वह ठेले पर बिरयानी बेचने लगा | इसमें धंधा अच्छा चलने लगा धीरे धीरे वह एक किराए के दुकान में यह काम शुरू किया | वह अब aasife biriyani के नामसे 1500 वर्ग फुट में बड़ा सा आउटलेट खोला | आज आसिफ के दुकान में 30 से अधिक लोग कार्य करते है |

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