दस साल के कठोर कारावास की सजा, जुर्माना भी लगाया
नैनीताल। जिला जज एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर सुबीर कुमार की कोर्ट ने तिहरे हत्याकांड में सजायाफ्ता अभियुक्त प्रीतम सिंह को उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा-तीन के तहत दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं दस हजार के अर्थदंड से दंडित किया है।
अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगेगा। इस मामले में दूसरे अभियुक्त विशाल सिंह के अपराध स्वीकारोक्ति के प्रार्थना पत्र का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने दो वर्ष के कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार, 15 अक्टूबर 2018 को चंपावत के तत्कालीन कोतवाली प्रभारी सलाउद्दीन खान ने हत्याभियुक्त प्रीतम सिंह निवासी थाना तामली, जिला चंपावत के विरुद्ध हत्या सहित अन्य अपराध का गैंग चार्ट तैयार किया। एसपी व जिलाधिकारी से अनुमोदन कराया।
कोतवाल ने बयान किया कि थाना क्षेत्र के अभियुक्त प्रीतम सिंह पुत्र हुकुम सिंह निवासी ग्राम ठुलाकोट रमैला, थाना मंच जनपद चंपावत द्वारा एक संगठित गिरोह बनाया गया है। इस गैंग का लीडर प्रीतम स्वयं है।
इस गैंग ने जनपद चांचडी के तोक गांव (उदाली) में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या कर घर में लूटपाट की, जिससे आम जनता में दहशत व्याप्त है। इस गैंग का सदस्य विशाल पुत्र प्रेम सिंह निवासी हरिपुर कला, थाना रायवाला, जनपद देहरादून का निवासी है। गैंग लीडर प्रीतम सिंह द्वारा अपने गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह बनाकर हत्या लूट जैसे अपराध कर भौतिक व आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। इस मामले में संयुक्त निदेशक विधि हीरा सिंह व अभियोजन अधिकारी श्रद्धा रावत की ओर से 12 गवाह पेश किए गए। बताया कि अभियुक्त ने तमाम संगीन वारदातों को अंजाम दिया और उसके विरुद्ध चंपावत, टनकपुर व अन्य थानों में मुकदमे दर्ज हैं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि अभियुक्त को गलत फंसाया गया है और अभियुक्त ने कोई गिरोह नहीं बनाया है। इस मामले में अभियुक्त की ओर से पैरवी के लिए कोर्ट ने न्यायमित्र मोहम्मद तैयब की नियुक्ति की थी।





















