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पहचान : देहरादून की अल्प दृष्टि दिव्यांग शेफाली रावत ने किया नाग टिब्बा ट्रैक फतह

देहरादून | जब बात साहसिक खेलों की आती है तो ज्यादातर बार दिव्यांगों को उनसे ज्यादा रूबरू नहीं करवाया जाता और जब वे करते हैं तो फिर कुछ भी मुश्किल नहीं बल्कि सब मुमकिन कर देते हैं।ऐसे बहुत सारे उदाहरण हमारे समाज में तलाशने पर मिल जाया करते हैं।ऐसे ही एक साहसिक प्रयास में देहरादून की शेफाली रावत एडवेंथरिल के संस्थापक विजय प्रताप सिंह के साथ 6 सितंबर को देहरादून से पंतवाड़ी के लिए निकली जहां पर बैकपैकर्स के होम स्टे में ठहरे।मौसम जरा खराब था और आजकल बारिश के कारण रास्ते भी टूटे फूटे हैं।लेकिन शेफाली जो कि अंतरराष्ट्रीय ब्लाइंड फुटबॉल खिलाड़ी हैं उनके इरादे मजबूत थे और उन्होंने विजय प्रताप से कहा “सर हम कल ट्रैक करेंगे”।विजय ने मौसम और रास्तों की दिक्कतों को समझते हुए खुद ही ट्रैक लीडर बनना ज्यादा सही समझा।हालाकि उनके लिए भी यह पहला अनुभव था पर शेफाली के कोच नरेश सिंह नयाल ने विजय प्रताप सिंह को सारी बातें और बारीकियां बता दी थी।अब सुबह का इंतजार था।यह ट्रैक पंतवाड़ी से नाग टिब्बा पूरा पैदल काम से काम दस से बारह किलोमीटर का है।लगभग पूरे रास्ते भर पगडंडियां और जंगल हैं।अगले दिन यानी 7 सितंबर को सुबह सात बजे शुरू कर के शाम छह बजे तक वापस पहुंच गए थे।शेफाली ने बताया “रास्ते में दिक्कतें तो आ रही थी पर मुझे करना था और विजय सर काफी आराम से करवा रहे थे क्योंकि मेरी दृष्टि दिव्यांग होने कोई कोच ने उनको बता दिया था।ऊपर चढ़ने की बजाय नीचे उतरने में ज्यादा मुश्किल हो रहा था।पर टॉप पर जाकर एक सुकून और जीत का अहसास था।”इस ट्रैक में पूरा सहयोग एडवेंथरिल का था।अब शायद शेफाली के इस प्रयास से और भी दृष्टि दिव्यांग लड़कियां साहसिक खेलों में आगे आएंगी।नाग टिब्बा फतह करने वाली शेफाली रावत पहली दिव्यांग लड़की हैं।वे अपनी इस सफलता से बहुत खुस हैं और आगे भी नए नए प्रयास करते रहना चाहती हैं।उनके परिवारजनों और कोच ने उसको इस सफलता के लिए ढेरों बधाइयां और शुभकामनाएं दी।

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