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पढ़े पूरी कहानी आप राष्ट्रिय परिषद के एक मेम्बर की जुबानी

aap volenteers

साथियो
आज आम आदमी पार्टी के इतिहास का काला दिन है
आज राष्ट्रिय कार्यकार्नी की मीटिंग हुयी जिसको मैं आपके सामने पुरे विस्तार से रखना चाहता हूँ
प्रातः 9 बजे साथियों को लाइन लगा कर सभागार में मेसज चेक करके लिया गया (जो साथी पहले से चिन्हित थे उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया)
तद्उपरांत अंदर लगे डेस्क पर सभी साथियों के मोबाइल और सामान जमा करा लिया गया (जो की पहले कभी किसी मीटिंग में नहीं हुआ)
9:35 पर सुधीर भरद्वाज और दिलीप पाण्डेय मुझे एक अलग कक्ष में ले गए मेरे साथ एक अन्य साथी जोकि ऐन सी मेंबर थे ले जाया गया मेरेआगे एक कागजरख दिया गया जिसपर सुधीर जी ने दस्तखत करे और मुझसे करने को कहा मेरे सामने प्रीतिशर्मा मेनन और गोपाल रॉय बैठे थे मैंने पड़ने की इच्छा जताई मुझे कहा गया क्या जरूरत है गोपाल रॉय जी ने कहा की हम पर भरोसा नहीं है क्या, मैंने फिर भी उसे पड़ा
उसपर लिखा था रेसोलुशन
प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, अजीत झा, प्रोफ आनंद कुमार को पार्टी की नेशनल ऐसेक्युटिव से निकाल दिया जाए – मैं चोंक गया मैंने तुरंत पूंछा ये क्या है मीटिंग से पहले रेसोलुशन पर दस्तखत कैसे लेसकते हैं आप
मैंने दस्तखत करने से मना कर दिया
औरबहार आ गया मेरेसाथ दूसरे साथी भी बाहर आ गए

उसकी बाद संजय जी को जैसे ही पता लगा किमैंने दस्तखत करने से मना कर दिया है तो शायद रायता फैलने के डर से मुझसे काफी देर शायद 15 मिनिट बात की पटाया भी और मेरीऔकाट क्या है कह कर धमकाया गया लालच दिया गया
उत्तर प्रदेश का संयोजक बनाने और मुरादाबाद से टिकट देने का लालच भी दिया
खैर मैंने कोई जवाब नहीं दिया, तो मीटिंग रूम में मेरेपीछे 3-4 बोउन्सर्स अलग से खड़े कर दिए गए

साथियों मीटिंग सुरु हुयी

अरविन्द जी ने अपना भाषण देना शरू करा दिल्ली जीत से शरू करके प्रशांत और योगेन्द्र पर ले आये फिर शांति भूषण जी का नाम लिए बगैर बोले किसी ने मुझे किरण बेदी अजय माकन से भी निचले पायदान पर रखा क्या उसे पार्टी में रहना चाँहिये – अकल्पनीय
मर्यादित दिखने वाले आप विधायक अचानक से खड़े हो गए और गद्दारो को बहार निकालो कहने लगे नारे लगाने लगे नितिन त्यागी, और कपिल मिश्र उन्हें लीड कर रहे थे, उठा कर बाहर फ़ेंक दो कह शांति जी की तरफ दोड़े नाटक जैसा करके बोउन्सर्स ने उन्हें रुकने का कोशिश किया और अरविन्द देखते रहे
अरविन्द ने बात आगे बड़ाई कहा की मैं इंके साथ काम नहीं कर सकता इसलिए या तो मुझे या इन लोगो को चुन ले
मैं अपना इस्तीफा पार्टी केसभी पदों सेदेता हूँ
और एक मीटिंग में जाने का कह कर तुरंत निकल गए
उनके जाते ही गोपाल राय ने अध्यक्षता ग्रहण की और मनीष जी ने बताया की yy pb aanand kumar ajit jha को नेशनल कौंसिल से निकाला जाये

तुरंत एक साथी जो मेरे करीब ही बैठे थे उठकर बोले की योया और प्रभु को भी सफाई देनेका मौका मिलना चाँहिए हम उन्हें सुनना चाहते है, अकल्पनीय उनके इतना कहते ही बगल में बैठे दुर्गेश ने बोउन्सर्स को इशारा किया और उन्होंने उन्हें जिनका नाम रेहमान चौधरी था उन्हें जबरदस्ती उठा कर बाहर ले गए
मैंने विरोध किया
बाहर लेजाकर उन्हें लात घुसे मारे गए और वहीँ बैठने को कहा गया योगेन्द्र पंकज पुष्कर मैं और आने साथी ने कहा की ये गलत है आप ऐसा नहीं कर सकते
उसके बाद उन्हें अंदर लिया गया
इस दौरान बिना सुने ( पूर्व में ही दस्तखत करे हुए पन्नों से ) रेसोलुशन लाया गया
साथियों वहां मौजूद बोउन्सर्स ने दो दोहाथ खड़े कर दिए और उनकी गिनती होने लगी विधायको ने हाथ खड़े कर दिए जबकि केवल फाउंडर मेंबर्स ही वोट देसक्ते थे, यह सब देखा न गया
विश्वास जानिये में अरविन्द के लिए वोट देने गया था लेकिन परिस्थितियों को देखकर मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा और अचानक मुझे योगेन्द्र और प्रशांत अजीत झ और आनंद कुमार बेहतर लगने लगे और में उनके साथ बाहर आगया
साथियों बहार आने वालो में हमारे mp डॉ गांधी और mla पंकज पुष्कर भी बाहर आगये
साथियो प्रश्न है की क्या सभी गलत है
mp और mla ka तो कोई लालच भी नहीं है

फैसले का शन है आपके लिए भी पार्टी नहीं छोड़नी है झाड़ू लेकर सफाई करनी है जो भी गलत है

ज़ोन संयोजक – रुहेलखण्ड ज़ोन
आम आदमी पार्टी

vishalsharmalathe@gmail.com

यह पोस्ट आप वोलेंटियर्स द्वारा लगातार सोसल मिडिया पर डाली जा रही है, जन्हा से सन्दर्भ लेकर “पहचान एक्सप्रेस” यह पोस्ट अपने पाठको के बीच शेयर कर रहा है |

 

Comments
5 Responses to “पढ़े पूरी कहानी आप राष्ट्रिय परिषद के एक मेम्बर की जुबानी”
  1. न खाता न बही, जो केजरू कहे वही सही!!!

  2. Anurag Rana says:

    बेवकूफ किसको बना रहा है 26 तारिख को पत्र लिखा और 28 की मीटिगं बता रहा है

  3. Vishaka says:

    Sharma Ji ……… do din pehle se he yeh likh rakha tha ……….. ??

  4. somnath tripathi says:

    लगभग 50 वर्ष के राजनीतिक जीवन में ऐसा दृश्य कभी न देखा ना सूना था। यह कैसा विकल्प राजनीती है। क्या गुंडई व अराजक माहौल बनाकर अलोकतांत्रिक निर्णय सुनाना स्वीकार किया जा सकता है? कथमपि नही। आंतरिक लोकतंत्र कायम करने के लिए हम आगे बढ़े- यही प्रतिकार होगा।

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