उत्तराखण्ड का पौराणिक लोकपर्व हरेला : प्रकृति पूजन और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक
उत्तराखंड(अंकित तिवारी) | उत्तराखण्ड के पौराणिक लोकपर्व हरेला का महत्त्व सदियों से प्रदेशवासियों के जीवन में विशेष स्थान रखता है। हरियाली और सुख-समृद्धि का प्रतीक यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पर्यावरणीय महत्त्व को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हरेला के माध्यम से हम प्रकृति के साथ अपने जुड़ाव को न केवल महसूस करते हैं, बल्कि उसे सहेजने और संवारने का संकल्प भी लेते हैं। हरेला पर्व की शुरुआत विशेष रूप से उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में होती है। इस पर्व की तैयारी दस दिन पहले ही प्रारंभ हो जाती है। घर-घर में…
संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा हरेला पर्व पर किया गया पौधा रोपण
देहरादून | वन विभाग के मालदेवता क्षेत्र में आयोजित हरेला वृक्षारोपण अभियान में संयुक्त नागरिक संगठन के पर्यावरण प्रेमी वरिष्ठ नागरिकों ने भी पौधों को लगाकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया।इनमें कैप्टन आर एस कैनथुरा,लेफ्टिनेंट कर्नल बीएम थापा, ब्रिगेडियर केजी बहल, मनोज ध्यानी,चौधरी ओमवीर सिंह, विशंभरनाथ बजाज, गिरीशचंद्र भट्ट, सुशील त्यागी, ठाकुर शेरसिंह,मोहनसिंह खत्री, अवधेश शर्मा आदि थे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी वनमंत्री सुबोध उनियाल, सांसद नरेशबंसल,उमेश शर्मा,वन सचिव आरके सुधांशु,हाफ पद पर नियुक्त डॉक्टर धनंजय मोहन, राजीव धीमान,कहकहां नसीम, प्रशासनिक अधिकारी बीपी गुप्ता सहित भारी संख्या मे विभागीय अधिकारी और कार्मिक उपस्थित थे। स्थानीय ग्रामीणो,तथा छात्र छात्राओ ने भी…
किसान की बेटी ने पहले प्रयास में किया यूपीएससी क्रैक, जानिए खबर
बांदा | कभी-कभी परिवार की भलाई के लिए कड़े फैसले लेने पड़ते है और कभी-कभी कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है’,इस बात को पूरी तरह से सही साबित किया है बांदा जिले के पचनेही गांव के किसान अनिल अवस्थी ने, जिन्होंने आज से करीब 22 साल पहले अपनी बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव छोड़कर लखनऊ आने का फैसला किया था। एक किसान के लिए आसान नहीं था शहर जाकर अपने बच्चों की परवरिश करना लेकिन फिर भी अनिल अवस्थी ने अपने चारों बच्चों के भविष्य के लिए ये बड़ा कदम उठाया और आज कुदरत ने उन्हें उनके…
कपाड़िया का चपरासी से चीफ जस्टिस बनने तक का सफर
मुंबई | भारत के एक ऐसे चीफ जस्टिस भी रहे हैं, जो बहुत गरीब पृष्ठभूमि से इस शीर्ष पद तक पहुंचे. करियर की शुरुआत एक चपरासी के तौर पर की | फिर क्लर्क बने. साथ में कानून की पढ़ाई की, उनके पिता अनाथालय में बड़े हुए थे | वह अपनी मेहनत और इंटैलिजेंस के बल पर सुप्रीम कोर्ट के 16वें चीफ जस्टिस बने | उनके कई फैसले मिसाल की तरह लिये जाते हैं | उनका नाम था सरोश होमी कपाड़िया | बांबे के प्रतिष्ठित पारसियों के विपरीत उनके पिता सूरत के एक अनाथालय में पले-बढ़े थे | एक मामूली रक्षा…
जनपग प्रेरणा ट्रस्ट द्वारा बच्चों क़े लिये पुल पार्टी का आयोजन, जानिए खबर
देहरादून | जनपग प्रेरणा ट्रस्ट द्वारा बच्चों क़े लिये पुल पार्टी का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों ने नाहते हुए फ़्रूट्स ओर जूस का आनंद लिया इस पार्टी में बच्चों को पानी तथा पर्यावरण से उसके संबंध के बारे में खेलते खेलते समझया गया इस अवसर पर ट्रस्ट की अध्यक्ष सोनिया बेनीवाल, समाजसेवी अभिषेक परमार, सुभाष रावत, दीपक राणा, पूजा अग्रवाल, मंजु फ़रत्याल, माधुरी, संतोष कक्कड़. मीनू राव तथा बहुत से बच्चे मोज़ुद रहे सभी ने इस अवसर पर संस्था की इस थीम को लोगो द्वारा सराहा गया |
देशभर में मात्र 25 साल के उम्र के यह चार बने सांसद, जानिए खबर
देहरादून | इस बार 25 साल के कई उम्मीदवार मैदान में थे जिन्होंने जीत हासिल कर राजनैतिक को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। पुष्पेंद्र सरोज और प्रिया सरोज समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े, जबकि शांभवी चौधरी और संजना जाटव को क्रमशः लोक जनशक्ति पार्टी और कांग्रेस ने मैदान में उतारा, इन सभी उम्मीदवारों की उम्र महज 25 साल के आस-पास है। ऐसे में जीतकर यह कम उम्र के सांसद बनने जा रहे हैं जो संसद में बैठेंगे।
बढे चलो बढ़े चलो ……
हताशाओं का द्वार छोड़ कुंठाओ का जाल तोड़ उदासियों से मुख को मोड़ तेरे मन की भी यही पुकार बढे चलो बढ़े चलो…. तू ठोकरों से गिर संभल तू पत्थरों से प्राण खींच ये ठोकरें सिखाएगी बढ़े चलो बढ़े चलो…. कर संघर्षों का सामना तू हालातों से हार मत क्षणिक समय का फेर है है वक्त की यही पुकार बढ़े चलो बढ़े चलो… लक्ष्य का संज्ञान कर शुभ कर्मो का संधान कर कल्याण का आह्वान कर परिणाम तेरी मुट्ठी में बढ़े चलो बढ़े चलो… दे सांत्वना निज मन को तू दे आत्मा को बल भी तू सकारात्मकता सींच तू तेरी…
पैरा एथलीट खिलाड़ी सौरभ शर्मा ने स्विट्जरलैंड में जीता दो स्वर्ण पदक, बढ़ाया मान
कोच नरेश सिंह नयाल ने कहा सौरभ शर्मा पर गर्व देहरादून | हमीरपुर हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं और तत्कालीन समय में उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित संस्थान राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में शिक्षारत हैं।सौरभ ने अपना खेल सफर छोटी उम्र से ही शुरू कर दिया था।आज उन्होंने अपना भारत को रिप्रेजेंट करने का सपना भी सच कर लिया है और वो भी दो स्वर्ण पदकों के साथ। दरअसल सौरभ इस समय स्विट्जरलैंड के नॉटविल शहर में चल रही वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में 5000 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत लिए है।…
पहचान : देहरादून का चमकता सितारा नरेश सिंह नयाल
देहरादून । राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में स्पोर्ट्स टीचर के पद पर कार्यरत नरेश सिंह नयाल जो कि इंडियन ब्लाइंड फुटबॉल टीम के सहायक कोच और गोल गाइड हैं अब 6 से 9 जून तक होने वाले नॉर्थ सेंट्रल जोन ब्लाइंड फुटबॉल चैंपियनशिप में नए कोच और गोलगाइड को इस खेल के गुर सिखाते नजर आएंगे।ये जिम्मेदारी औपचारिक रूप से इंडियन ब्लाइंड फुटबॉल फेडरेशन ने उन्हें उनके अनुभव पर दी है।उन्हें कल ही ऑफिशियल मेल प्राप्त हुई है।उनके नाम अब तक 90 गोल हैं(गोलगाइड के रूप में)।जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों शामिल हैं।नरेश सिंह नयाल उत्तराखंड ब्लाइंड फुटबॉल टीम…
मेहनत से हारी गरीबी , सिक्योरिटी गार्ड की बेटी बनी जज
मोहाली | मोहाली के खरड़ कैरो गांव की रहने वाली परमिंदर कौर ने वह कर दिखाया है जिससे ना सिर्फ परिवार को बल्कि पूरे गांव को बेटी पर गर्व है | परमिंदर कौर पंजाब में ज्यूडिशरी एग्जाम पास कर जज बन गई हैं | परमिंदर कौर बहुत ही गरीब परिवार से आती हैं | उनके पिता सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं जबकि माता मनरेगा में मजदूरी करती हैं | परमिंदर ने एक न्यूज़ पत्रकार से कहा कि उन्होंने भी कभी ऐसा सपना नहीं देखा था कि वह एक दिन जज बन जाएंगी हालांकि वह शुरू से ही पढ़ाई…






























