Breaking News:

प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक समय धर्म, साधना और आत्मकल्याण के लिए देना चाहिए : आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी -

Thursday, July 30, 2026

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित देवदुर्लभ श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन -

Wednesday, July 29, 2026

पुल ध्वस्त होने की जवाबदेही किसकी ? : “आप” देहरादून कैंट -

Tuesday, July 28, 2026

भारत विकास परिषद द्रोणशाखा का बाल संस्कार शिविर का आयोजन -

Tuesday, July 28, 2026

मॉडल एवं अभिनेत्री वैष्णवी लोहनी बनीं ‘साईं सृजन पटल’ के सलाहकार मंडल की सदस्य -

Tuesday, July 28, 2026

इंडियन ब्लाइंड फुटबॉल प्रीमियर लीग : उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने किया कमाल -

Tuesday, July 28, 2026

शिक्षाविद एवं समाजसेवी जितेंद्र कुमार डंडोना विवेकानंद आदर्श रतन पुरस्कार से सम्मानित -

Tuesday, July 21, 2026

दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में देहरादून में उठी आवाज: ‘सांख्य योग फाउंडेशन’ ने दिया समर्थन -

Tuesday, July 21, 2026

देहरादून साइक्लिंग क्लब ने उठाए महत्वपूर्ण सुझाव, कहा लक्ष्य, समय-सीमा और जवाबदेही के बिना मास्टर प्लान अधूरा -

Tuesday, July 21, 2026

बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी मामला : सीसीटीवी की 32 दिन की रिकॉर्डिंग गायब -

Sunday, July 19, 2026

साहस : पिता की जान बचाने के लिए गुलदार से भिड़ गई बहादुर बेटी -

Sunday, July 19, 2026

बागेश्वर : बाबू ने चाकू से गोदकर की जीआईसी भटकोला के प्रधानाचार्य की हत्या -

Sunday, July 19, 2026

भनियावाला और ऋषिकेश मार्ग पर अब नहीं कटेंगे 3000 पेड़, सीएम धामी की रोक, आगे क्या… -

Sunday, July 19, 2026

गर्व : गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल -

Sunday, July 19, 2026

डॉ विरेन्द्र सिंह रावत फुटबाल कोच एवं खेल विशेषज्ञ द्वारा उत्तराखंड की खेल नीति पर सुझाव पत्र दिया गया, जानिए खबर -

Saturday, July 18, 2026

श्रद्धांजलि : पुण्य तिथि पर याद किए गए स्व. साईं दास तलवाड़ -

Saturday, July 18, 2026

हरेला पर्व के अवसर पर हुआ पौधारोपण, जानिए खबर -

Thursday, July 16, 2026

जरा हटके : सीएम को सौंपा ज्ञापन, शाम तक मिली सिलाई मशीन -

Sunday, July 12, 2026

दुःखद : चम्पावत में वाहन की टक्कर से स्कूटी सवार युवक की दर्दनाक मौत -

Sunday, July 12, 2026

उत्तराखंड : केदारनाथ यात्रा पर मौसम की मार, प्रशासन हाई अलर्ट -

Sunday, July 12, 2026



कपाड़िया का चपरासी से चीफ जस्टिस बनने तक का सफर

मुंबई | भारत के एक ऐसे चीफ जस्टिस भी रहे हैं, जो बहुत गरीब पृष्ठभूमि से इस शीर्ष पद तक पहुंचे. करियर की शुरुआत एक चपरासी के तौर पर की | फिर क्लर्क बने. साथ में कानून की पढ़ाई की, उनके पिता अनाथालय में बड़े हुए थे | वह अपनी मेहनत और इंटैलिजेंस के बल पर सुप्रीम कोर्ट के 16वें चीफ जस्टिस बने | उनके कई फैसले मिसाल की तरह लिये जाते हैं | उनका नाम था सरोश होमी कपाड़िया | बांबे के प्रतिष्ठित पारसियों के विपरीत उनके पिता सूरत के एक अनाथालय में पले-बढ़े थे | एक मामूली रक्षा क्लर्क के रूप में काम किया था | उनकी माँ कैटी एक गृहिणी थीं | परिवार मुश्किल से गुजारा कर पाता था | युवा सरोश ने तय कर लिया था कि वह अपना भाग्य खुद बनाएगा. वह जज बनना चाहता था और कुछ नहीं | शुरू से ही उनकी दिलचस्पी कानून से जुड़े पहलुओं में थी | कपाड़िया के क्लर्क से वकील बनने | फिर बांबे हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बनने की भी एक कहानी है| जो कहती है कि अगर आपमें प्रतिभा है और मेहनत करने के माद्दा के साथ दृढ इच्छाशक्ति है तो आप कहीं तक भी पहुंच सकते हैं | कपाड़िया 23 मार्च 1993 को बांबे हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए | 5 अगस्त 2003 को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने | 18 दिसंबर 2003 को सुप्रीम कोर्ट में जज बने | 12 मई 2010 को उन्हें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई. 29 सितंबर 2012 को सेवानिवृत्त हुए | उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के पद पर पहुंचने के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर एक भाषण में कहा, “मैं एक गरीब परिवार से आता हूं| मैंने अपना करियर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में शुरू किया | मेरे पास अकेली संपत्ति मेरी ईमानदारी है.”

Leave A Comment