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पहचान : जहां करते थे चपरासी की नौकरी, अब हैं असिस्टेंट कमिश्नर -

Thursday, December 11, 2025

निशा 6 बार हुई असफल, नहीं हारी हिम्मत बनी आइएएस -

Thursday, December 11, 2025

उत्तराखंड : छोटे-छोटे अपराधों में कारावास की सजा के बजाए अब सिर्फ अर्थ दंड का प्रावधान -

Thursday, December 11, 2025

अंकित तिवारी ने अपने जन्मदिन पर दिया रक्तदान का संदेश, जानिए खबर -

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मोनाल कप : सेमीफाइनल में पहुंची सचिवालय ए और सचिवालय डेंजर्स की टीम -

Wednesday, December 10, 2025

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Wednesday, December 10, 2025

राहुल की धूप, मिट्टी से सोशल मीडिया तक का सफर -

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डॉ विरेन्द्र सिंह रावत को मिला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2025 -

Tuesday, December 9, 2025

मोनाल कप 2025 : हरिकेन और सचिवालय ईगल्स टीम की बड़ी जीत -

Tuesday, December 9, 2025

रॉयल स्ट्राइकर्स और सचिवालय ए की टीम मोनाल कप प्रतियोगिता के अगले दौर में पहुंची -

Monday, December 8, 2025

पुष्प वर्षा योग समिति के द्वारा यूनीफॉर्म का हुआ वितरण -

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इंडिगो फ्लाइट्स रद्द होने से शहर-शहर परेशान यात्री -

Saturday, December 6, 2025

दुःखद : ट्रैक्टर-ट्रॉली व बाइक की जोरदार भिड़ंत से गई दो लोगों की जान -

Saturday, December 6, 2025

मोनाल कप : मैच के अगले दौर में पहुँचे सचिवालय रॉयल स्ट्राइकर, सचिवालय ए , सचिवालय वॉरियर्स और सचिवालय पैंथर -

Saturday, December 6, 2025

नौसेना दिवस-2025 : राज्यपाल ने किया डॉक्यूमेंट्री का विमोचन, नौसेना की भूमिका की सराहना की -

Friday, December 5, 2025

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Friday, December 5, 2025



नौकरानी से लेखिका तक का सफ़र जानिए ख़बर

बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाली बेबी का जीवन बड़े उतार चढ़ाव से भरा रहा है, बेबी का पूरा नाम बेबी हैल्डर है. जब वो मात्र 4 साल की थीं तो मां छोड़कर चली गईं. 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई. शादी की रात ही पति ने उनका रेप कर दिया. 25 साल तक पति से गालियां सुनने के बाद उन्होंने 2 बच्चों के साथ घर से भागने का फैसला लिया. वो ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर दिल्ली आ गईं. जहां उन्होंने प्रबोध कुमार से घरेलू मदद मांगी. जो रिटायर्ड मानव विज्ञान प्रोफेसर और महान लेखक प्रेमचंद के पोते हैं. प्रबोध कुमार के घर काम करते हुए उनकी जिंदगी में नया मोड़ आ गया. जब भी वो प्रबोध के घर साफ-सफाई किया करती तो बुक के शेल्फ को देखने लगतीं. बंगाली किताबों को खोलकर पढ़ने लगतीं. उन्होंने बेबी को बांग्लादेशी ऑथर तसलीमा नसरीन की किताब दी और पढ़ने को कहा. पूरी किताब पढ़ने के बाद प्रबोध ने उनको खाली नोटबुक दी और अपनी कहानी लिखने को कहा. पहले बेबी घबरा गई थीं क्योंकि उन्होंने सिर्फ 7वीं क्लास तक ही पढ़ा है. लेकिन जैसे ही वो किताब लिखने बैठीं तो उनमें अलग ही कॉन्फिडेंस आ गया. उन्होंने कहा- जब मैंने हाथ में पेन थामा तो घबरा गई थी. मैंने स्कूली दिनों के बाद कभी पेन नहीं थामा था. जैसे ही मैंने लिखना शुरू किया तो मुझमें नई ऊर्जा आ गई. किताब लिखना अच्छा एक्सपीरियंस रहा. जैसे ही प्रबोध कुमार ने उनकी फर्स्ट कॉपी पढ़ी तो उनके आंखों में आंसू थे. उन्होंने बेबी की किताब को हिंदी में ट्रांस्लेट किया. कुमार ने किताब को दोस्तों और परिचितों को दी. जिन्होंने प्रशंसा पत्र भेजा. जिसके बाद उन्होंने किताब को प्रकाशन में छपने भेजा. जैसे ही उन्होंने सबसे पहले किताब को देखा तो बेबी को यकीन नहीं हुआ कि उन्होंने इतना शानदार लिखा है. 2002 में उनकी पहली किताब ‘आलो आंधारी’ नाम से आई. इसी साल उनकी ये किताब अंग्रेजी में पब्लिश हुई थी. साहित्य की दुनिया में बेबी अब चर्चित नाम है. 24 भाषाओं में उनकी किताब ट्रांस्लेट हो चुकी हैं. बेबी 2002 से अब तक 4 किताबें लिख चुकी हैं.

 

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