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Saturday, September 5, 2026



नौकरानी से लेखिका तक का सफ़र जानिए ख़बर

बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाली बेबी का जीवन बड़े उतार चढ़ाव से भरा रहा है, बेबी का पूरा नाम बेबी हैल्डर है. जब वो मात्र 4 साल की थीं तो मां छोड़कर चली गईं. 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई. शादी की रात ही पति ने उनका रेप कर दिया. 25 साल तक पति से गालियां सुनने के बाद उन्होंने 2 बच्चों के साथ घर से भागने का फैसला लिया. वो ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर दिल्ली आ गईं. जहां उन्होंने प्रबोध कुमार से घरेलू मदद मांगी. जो रिटायर्ड मानव विज्ञान प्रोफेसर और महान लेखक प्रेमचंद के पोते हैं. प्रबोध कुमार के घर काम करते हुए उनकी जिंदगी में नया मोड़ आ गया. जब भी वो प्रबोध के घर साफ-सफाई किया करती तो बुक के शेल्फ को देखने लगतीं. बंगाली किताबों को खोलकर पढ़ने लगतीं. उन्होंने बेबी को बांग्लादेशी ऑथर तसलीमा नसरीन की किताब दी और पढ़ने को कहा. पूरी किताब पढ़ने के बाद प्रबोध ने उनको खाली नोटबुक दी और अपनी कहानी लिखने को कहा. पहले बेबी घबरा गई थीं क्योंकि उन्होंने सिर्फ 7वीं क्लास तक ही पढ़ा है. लेकिन जैसे ही वो किताब लिखने बैठीं तो उनमें अलग ही कॉन्फिडेंस आ गया. उन्होंने कहा- जब मैंने हाथ में पेन थामा तो घबरा गई थी. मैंने स्कूली दिनों के बाद कभी पेन नहीं थामा था. जैसे ही मैंने लिखना शुरू किया तो मुझमें नई ऊर्जा आ गई. किताब लिखना अच्छा एक्सपीरियंस रहा. जैसे ही प्रबोध कुमार ने उनकी फर्स्ट कॉपी पढ़ी तो उनके आंखों में आंसू थे. उन्होंने बेबी की किताब को हिंदी में ट्रांस्लेट किया. कुमार ने किताब को दोस्तों और परिचितों को दी. जिन्होंने प्रशंसा पत्र भेजा. जिसके बाद उन्होंने किताब को प्रकाशन में छपने भेजा. जैसे ही उन्होंने सबसे पहले किताब को देखा तो बेबी को यकीन नहीं हुआ कि उन्होंने इतना शानदार लिखा है. 2002 में उनकी पहली किताब ‘आलो आंधारी’ नाम से आई. इसी साल उनकी ये किताब अंग्रेजी में पब्लिश हुई थी. साहित्य की दुनिया में बेबी अब चर्चित नाम है. 24 भाषाओं में उनकी किताब ट्रांस्लेट हो चुकी हैं. बेबी 2002 से अब तक 4 किताबें लिख चुकी हैं.

 

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