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मानसिक शिक्षा को प्रारंभिक शिक्षा से लागू किया जाए : डॉ प्रतिभा जवड़ा

 

मैंने प्रत्यक्ष रूप से बातचीत के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों में यह देखा है और पाया है कि अधिकतम नशे का शिकार वे पढ़े लिखे और बुद्धिजीवी व्यक्ति हैं जो पूर्णरूपेण शिक्षित और अनुभवी है। किंतु उनका मानसिक स्तर इतना कमजोर और विचलित है की वे लोग उच्च शैक्षिक स्तर पर पहुंचने के पश्चात भी मानसिक रूप से कमजोर है संघर्षों का सामना नहीं कर सकने की अक्षमता के कारण नशे का सेवन करते हैं।इससे एक बात स्पष्ट होती है कि उनका मानसिक स्तर इतना ज्यादा कमजोर है कि वे लोग संघर्षों का सामना कर पाने में मानसिक रूप से असक्षम है और उनसे बचने के लिए है क्षणिक सुख को पाने की लालसा में नशे का सेवन करने लग जाते हैं। अत्यंत दुख की बात तो यह है कि स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले बालकों को भी मैंने इस लत में लिप्त पाया है। बालकों के मन मस्तिष्क पर उनके आसपास के वातावरण का अत्यधिक प्रभाव पड़ रहा है।उनके परिवार और वे स्वयं इस समस्या से अत्यंत ग्रसित है। किंतु वे लोग मानसिक रूप से इतने कमजोर हैं कि उन्हें परिवार और स्वयं यह समस्या महसूस ही नहीं हो रही है। नशे की लत हमारे देश की सबसे बड़ी चुनौती है । जिससे अधिकतम परिवार ग्रसित है। नशा मुक्ति केंद्र जगह-जगह खोले गए हैं किंतु यह नशा मुक्ति का स्थाई उपाय नहीं है। नशा और आत्महत्या यह हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या है । यह समस्याएं इसलिए पैदा हो रही है क्योंकि लोगों का मानसिक स्तर अत्यंत कमजोर है उन्हें बचपन से ही मानसिक रूप से मजबूत नहीं बनाया जाता है। नशा और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं से मुक्त होने के लिए हमें समस्या की जड़ तक पहुंचना अति आवश्यक है। इसके लिए हमें स्कूल शिक्षा से ही बालक की मानसिक स्तर को मजबूत करने की आवश्यकता है यदि मानसिक स्तर मजबूत होगा तो इस तरह की समस्याएं बहुत हद तक नियंत्रण में रहेगी। इसके लिए सरकार एवं हम सबको मिलकर ठोस उपाय करने होंगे।न नशा मुक्ति केंद्र या काउंसलिंग सेंटर स्थाई उपाय नहीं है। अक्सर हमने देखा है कि नशा मुक्ति केंद्र से नशे से मुक्ति कुछ समय के लिए होती है और फिर समस्याओं के आने एवं बुरी संगत में पड़ने पर उन्हें व्यक्ति पुनः उसी विनाशकारी सुख की तरफ भागता है। अतः हम सभी को मिलकर इन समस्याओं का समाधान करना होगा।।सभी परिवारों से निवेदन है की अपने बच्चों को बचपन से ही मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए घर का माहौल सकारात्मक एवं ऊर्जावान बनाए रखें। एवं सरकार को भी ‌ऐसी समस्याओं को अनदेखा किए बिना इनका ठोस और स्थाई उपाय खोजने की आवश्यकता है। अतः सरकार से निवेदन है कि ऐसी भयानक समस्याओं के समाधान का एक ही स्थाई एवं ठोस उपाय यह है कि प्राथमिक शिक्षा से ही बच्चे के मानसिक स्तर को मजबूत बनाया जाए। मनोविज्ञान विषय को प्रारंभिक शिक्षा से ही लागू कर दिया जाए। ताकि बच्चा स्कूल से ही मानसिक शिक्षा ग्रहण करता रहे । बच्चा बचपन से ही सकारात्मक सोच से परिपूर्ण बने। ताकि समस्याओं से भागने या बचने के लिए शराब एवं आत्महत्या जैसे निंदनीय अपराध ना करें। हमारे देश को ऐसी समस्याओं एवं चुनौतियों से उबरना अति आवश्यक है।
एवं साथ ही बालकों के मानसिक स्तर को मजबूत करने की अति आवश्यकता है। ताकि उनके मन पर वातावरण का प्रभाव ना पड़े एवं नकारात्मक उर्जा उन पर हावी ना हो। वह हर एक समस्या का सामना करने में मानसिक रूप से तैयार रहें। बचपन से ही संघर्षों का सामना करने की क्षमता से परिपूर्ण रहे। उनका मनोबल मजबूत बने। मुझे पूर्ण आशा और विश्वास है कि यदि सरकार द्वारा इस तरह के मजबूत कदम उठाए जाएंगे तो परिणाम पूर्णतया सकारात्मक एवं संतोषपूर्वक होंगे । अतः हमें ऐसी समस्याओं से निजात मिल सकती है।

डॉ प्रतिभा जवड़ा
साइकोलॉजिस्ट एंड सोशल एक्टिविस्ट

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