Breaking News:

19 अप्रैल को दौड़ेगा उत्तराखंड, विजेताओं पर होगी 10 लाख की धनवर्षा -

Thursday, March 19, 2026

मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स द्वारा उत्तराखंड में ब्रांड का दूसरा शोरूम खुला -

Wednesday, March 18, 2026

“वैश्य एकता दिवस” पर हर्ष उल्लास, जानिए खबर -

Tuesday, March 17, 2026

सांख्य योग फाउंडेशन द्वारा देहरादून के विभिन्न विद्यालयों में अलमारी का किया वितरण -

Saturday, March 7, 2026

देहरादून : ओगल भट्टा में प्रेमी प्रेमिका ने एक दूसरे को चाकू मार किया घायल, जानिए खबर -

Saturday, March 7, 2026

अनिल नेगी बने सचिवालय क्रिकेट क्लब के नए अध्यक्ष -

Thursday, February 26, 2026

एक मार्च को अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन उत्तराखंड द्वारा होली मिलन कार्यक्रम होगा आयोजन -

Thursday, February 26, 2026

गर्व : उत्तराखंड के सोवेंद्र भंडारी और साहिल हुए भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम में शामिल -

Thursday, February 19, 2026

मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन ने जरुरतमंद बच्चों के चेहरे पर लाई मुस्कान, जानिए खबर -

Wednesday, February 18, 2026

चारधाम यात्रा की तैयारियाँ तेज, जानिए खबर -

Tuesday, February 17, 2026

बुजर्ग दम्पति को पुत्रों ने घर निकाला बाहर, डीएम देहरादून ने थामा हाथ, जानिए खबर -

Tuesday, February 17, 2026

देहरादून : कांग्रेस का प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल -

Tuesday, February 17, 2026

शेफाली ,अनुष्का और शीतल के संघर्ष ने पहुंचाया मुकाम तक -

Monday, February 16, 2026

वसूली एजेंटो के दुर्व्यवहार पर शिकंजा कसने के कदम स्वागत योग्य, जानिए खबर -

Friday, February 13, 2026

देहरादून : सिल्वर सिटी मॉल राजपुर रोड के पास बदमाशों ने एक को गोलियों से भूना, मौत -

Friday, February 13, 2026

निःशुल्क हेल्थ चैकअप कैम्प का आयोजन, जानिए खबर -

Wednesday, February 11, 2026

उद्घाटन समारोह : वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 -

Wednesday, February 11, 2026

डिजिटल धोखाधड़ी से ग्राहकों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सुझाव स्वागत योग्य : जितेंद्र कुमार डंडोना -

Wednesday, February 11, 2026

मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मेधावी छात्रों को किया पुरस्कृत -

Friday, February 6, 2026

पहचान : नरेश सिंह नयाल को नेशनल ब्लाइंड फुटबॉल टीम का चयनकर्ता और ट्रेनर का मिला जिम्मा -

Friday, February 6, 2026



मानसिक शिक्षा को प्रारंभिक शिक्षा से लागू किया जाए : डॉ प्रतिभा जवड़ा

 

मैंने प्रत्यक्ष रूप से बातचीत के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों में यह देखा है और पाया है कि अधिकतम नशे का शिकार वे पढ़े लिखे और बुद्धिजीवी व्यक्ति हैं जो पूर्णरूपेण शिक्षित और अनुभवी है। किंतु उनका मानसिक स्तर इतना कमजोर और विचलित है की वे लोग उच्च शैक्षिक स्तर पर पहुंचने के पश्चात भी मानसिक रूप से कमजोर है संघर्षों का सामना नहीं कर सकने की अक्षमता के कारण नशे का सेवन करते हैं।इससे एक बात स्पष्ट होती है कि उनका मानसिक स्तर इतना ज्यादा कमजोर है कि वे लोग संघर्षों का सामना कर पाने में मानसिक रूप से असक्षम है और उनसे बचने के लिए है क्षणिक सुख को पाने की लालसा में नशे का सेवन करने लग जाते हैं। अत्यंत दुख की बात तो यह है कि स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले बालकों को भी मैंने इस लत में लिप्त पाया है। बालकों के मन मस्तिष्क पर उनके आसपास के वातावरण का अत्यधिक प्रभाव पड़ रहा है।उनके परिवार और वे स्वयं इस समस्या से अत्यंत ग्रसित है। किंतु वे लोग मानसिक रूप से इतने कमजोर हैं कि उन्हें परिवार और स्वयं यह समस्या महसूस ही नहीं हो रही है। नशे की लत हमारे देश की सबसे बड़ी चुनौती है । जिससे अधिकतम परिवार ग्रसित है। नशा मुक्ति केंद्र जगह-जगह खोले गए हैं किंतु यह नशा मुक्ति का स्थाई उपाय नहीं है। नशा और आत्महत्या यह हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या है । यह समस्याएं इसलिए पैदा हो रही है क्योंकि लोगों का मानसिक स्तर अत्यंत कमजोर है उन्हें बचपन से ही मानसिक रूप से मजबूत नहीं बनाया जाता है। नशा और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं से मुक्त होने के लिए हमें समस्या की जड़ तक पहुंचना अति आवश्यक है। इसके लिए हमें स्कूल शिक्षा से ही बालक की मानसिक स्तर को मजबूत करने की आवश्यकता है यदि मानसिक स्तर मजबूत होगा तो इस तरह की समस्याएं बहुत हद तक नियंत्रण में रहेगी। इसके लिए सरकार एवं हम सबको मिलकर ठोस उपाय करने होंगे।न नशा मुक्ति केंद्र या काउंसलिंग सेंटर स्थाई उपाय नहीं है। अक्सर हमने देखा है कि नशा मुक्ति केंद्र से नशे से मुक्ति कुछ समय के लिए होती है और फिर समस्याओं के आने एवं बुरी संगत में पड़ने पर उन्हें व्यक्ति पुनः उसी विनाशकारी सुख की तरफ भागता है। अतः हम सभी को मिलकर इन समस्याओं का समाधान करना होगा।।सभी परिवारों से निवेदन है की अपने बच्चों को बचपन से ही मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए घर का माहौल सकारात्मक एवं ऊर्जावान बनाए रखें। एवं सरकार को भी ‌ऐसी समस्याओं को अनदेखा किए बिना इनका ठोस और स्थाई उपाय खोजने की आवश्यकता है। अतः सरकार से निवेदन है कि ऐसी भयानक समस्याओं के समाधान का एक ही स्थाई एवं ठोस उपाय यह है कि प्राथमिक शिक्षा से ही बच्चे के मानसिक स्तर को मजबूत बनाया जाए। मनोविज्ञान विषय को प्रारंभिक शिक्षा से ही लागू कर दिया जाए। ताकि बच्चा स्कूल से ही मानसिक शिक्षा ग्रहण करता रहे । बच्चा बचपन से ही सकारात्मक सोच से परिपूर्ण बने। ताकि समस्याओं से भागने या बचने के लिए शराब एवं आत्महत्या जैसे निंदनीय अपराध ना करें। हमारे देश को ऐसी समस्याओं एवं चुनौतियों से उबरना अति आवश्यक है।
एवं साथ ही बालकों के मानसिक स्तर को मजबूत करने की अति आवश्यकता है। ताकि उनके मन पर वातावरण का प्रभाव ना पड़े एवं नकारात्मक उर्जा उन पर हावी ना हो। वह हर एक समस्या का सामना करने में मानसिक रूप से तैयार रहें। बचपन से ही संघर्षों का सामना करने की क्षमता से परिपूर्ण रहे। उनका मनोबल मजबूत बने। मुझे पूर्ण आशा और विश्वास है कि यदि सरकार द्वारा इस तरह के मजबूत कदम उठाए जाएंगे तो परिणाम पूर्णतया सकारात्मक एवं संतोषपूर्वक होंगे । अतः हमें ऐसी समस्याओं से निजात मिल सकती है।

डॉ प्रतिभा जवड़ा
साइकोलॉजिस्ट एंड सोशल एक्टिविस्ट

Leave A Comment