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पकौड़ों की ठेली से आइएएस तक का सफर…. -

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दोनों पैर नहीं एक हाथ नहीं, जज्बे ने बनाया ऑफिसर

मैनपुरी | उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के कुरावली तहसील के गांव घर्नाजपुर के रहने वाले सूरज तिवारी ने 2022 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 971वीं रैंक हासिल की | उन्होंने यह उपलब्धि अपने पहले ही प्रयास में हासिल की लेकिन किस्मत ने उनका सबसे बड़ा इम्तिहान पहले ही ले लिया था | सूरज का साल 2017 में एक भयानक ट्रेन एक्सीडेंट हो गया था. जिसमें सूरज ने अपने दोनों पैर, दाहिना हाथ और बाएं हाथ की दो उंगलियां खो दीं थी | हादसे के बाद 9 महीने हॉस्पिटल में बिताने पड़े | एक्सीडेंट ने सूरज तिवारी की पूरी जिदंगी बदल दी. लेकिन उनका यूपीएससी क्रैक करने का सपना नहीं टूटा | उन्होंने अपनी पहली कोशिश में ही यूपीएससी एग्जाम पास कर लिया | सूरज ने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा बिना किसी कोचिंग के पास की | उन्होंने घर पर रहकर ही सेल्फ-स्टडी की और खुद पर भरोसा किया | उनके पास हाथ नहीं थे, लेकिन हौसला था | पैर नहीं थे, लेकिन सपनों को उड़ान देने का जज़्बा था | सूरज तिवारी की यह कहानी आज लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है | उन्होंने यह साबित कर दिया कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सबसे जरूरी चीज होती है हिम्मत, लगन और कभी न हार मानने वाला जज्बा |

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