आपदा रूपी संकट में “संकटमोचन” बनती आ रही है टिहरी बाँध
बड़े बांध आपदा और बाढ़ के वक्त विनाशकारी साबित होंगे यह विरोध होते आ रहे है पर जिस तरह से टिहरी बांध परियोजना के तहत टिहरी बांध ने एक बार फिर संकटमोचन साबित हुआ है जिससे विरोध स्वर अब निरंकुश साबित होगी | विदित हो कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान पानी रोककर टिहरी बांध न मैदानी क्षेत्र में बड़ी तबाही टालने में महत्वपूर्व भूमिका निभाई थी।अब चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद एक बार फिर से टिहरी बांध ने जान- माल की सुरक्षा में अपना अहम योगदान दिया है , टिहरी में भागीरथी नदी पर बनाई गई बांध परियोजना को लेकर भी अक्सर सवाल उठाए जाते हैं लेकिन आज यही बाँध विकराल आपदा को अपने अंदर समाहित कर लेती है |





















