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“आप” की जीत पर उत्तराखण्ड में आप कार्यकर्ताओें में खुशी की लहर

देहरादून । दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज करते हुए सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। वहीं कांग्रेस एक बार फिर अपना खाता नहीं खोल सकी है। दोबारा केजरीवाल को मिले जनाधार को उत्तराखण्ड  के आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता देश के लोकतंत्र की जीत बता रहे हैं। आठ फरवरी को हुए मतदान के बाद तमाम एक्जिट पोल के जो नतीजे दिखाये गये थे वही नतीजे कमोवेश मतगणना के समय भी देखने को मिले है। आप एक बार फिर 51 फीसदी मतों के साथ जबरदस्त जीत दर्ज करने में सफल रही है। बीते चुनाव में 30 फीसदी वोट प्रतिशत के साथ तीन सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार अपने वोट प्रतिशत में 9 फीसदी इजाफे के साथ दहाई के अंक के नीचे ही सिमटती दिख रही है और सत्ता में आने के उसके मंसूबे चूर चूर हो गये है। इस जीत के बाद आम आदमी पार्टी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे अपनी सरकार के काम की जीत और भाजपा की नफरत की राजनीति को हार बताया है। वहीं भाजपा इस हार को स्वीकार करने में भी हिचकती दिख रही है। दरअसल भाजपा को इस चुनाव के इस तरह के नतीजों की संभावनाएं कतई भी नहीं थी। भाजपा ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। उसने चुनाव प्रचार में न सिर्फ अपनी पूरी फौज उतारी थी। जिसमें 200 से अधिक सांसद व 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित खुद प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री तक शामिल थे। लेकिन इसके बावजूद भी उनके नारे-दावे तथा गाली और गोली पर अरविन्द केजरीवाल व उनकी सरकार का काम भारी पड़ा है। भाजपा ने दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल के मुकाबले न तो अपनी पार्टी का कोई मुख्यमंत्री चेहरा पेश किया था और न स्थानीय मुद्दों को कोई खास तव्वजो दी गयी थी। भाजपा राष्ट्रीय मुद्दों व मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ी थी जबकि आप ने अपने पांच सालों के काम काज को ही अपना चुनावी मुद्दा बनाया था।

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