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उत्तराखंड में हुआ 6359 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का आयातः मंच

देहरादून । पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कोरिया गणराज्य, अमेरिका इत्यादि देशों से भारत अप्रैल, 2018 से फरवरी 2019 के बीच प्लास्टिक के 99,545 मीट्रिक टन फ्लैक्स और 21,801 मीट्रिक टन प्लास्टिक के ढेले का आयात कर चुका है। अकेले उत्तराखंड की खूबसूरत घाटियों में, विभिन्न कंपनियों ने 4677मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा प्ला स्टिक के ढेलों के रूप में और 1682 मीट्रिक टन फ्लैक्स के रूप में आयातित किया है। एनजीओ ने प्लास्टिक कचरे को धोने और काटने से निर्मित प्लास्टिक के ढेलों और फ्लैक्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच के अध्यक्ष और स्वर्गीय दीनदयाल उपाध्याय के भतीजे विनोद शुक्ला इस अध्ययन पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, ’’भारतीय पुनर्चक्रणकर्ता और प्लास्टिक कंपनियां उपयोग में लाई जा चुकी पीईटी प्लास्टिक बोतलों के ढेर का आयात कर रही हैं, जबकि रोजाना पैदा हो रहा टनों प्लास्टिक कचरा संग्रह हुए बगैर समुद्रों और जमीन पर पड़ा रहता है। पुनर्चक्रणकर्ता, पुनर्चक्रित कचरे का आयात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर निर्मित होने वाले प्लास्टिक कचरे को संग्रह और पुनर्चक्रित करने से सस्ता पड़ता है। इस अनैतिक परंपरा के चलते हमारे देश को लाखों नौकरियों और राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिन्हेंय कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण उद्योग को प्रोत्साहन के जरिये जनरेट किया जा सकता है। यह परंपरा देश में प्लास्टिक कचरे के संग्रहण और पुनर्चक्रण किए जाने के सरकारी प्रयासों को भी नुकसान पहुंचा रही है।पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जी 19 अगस्त से प्लास्टिक कचरे पर प्रतिबंध लगाने की सरकार की योजना की घोषणा कर चुके हैं। हम उनसे प्लास्टिक कचरे से बनने वाले प्लास्टिक के अन्य रूपों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाने का निवेदन करते है। वर्तमान में ये समुद्र, वायु और सड़क मार्ग से आयातित हो रहे हैं। ’’वह आगे कहते हैं, ’’वैश्विक तौर पर पीईटी सर्वाधिक पुनर्चक्रित प्लास्टिक है और भारत में पुनर्चक्रित होने वाली पीईटी बोतलों की वर्तमान दर तकरीबन 80 फीसदी है। अगर प्लास्टिक कचरे का आयात बंद हो जाए तो इससे आयातकों व पुनर्चक्रणकर्ताओं पर पॉलीएस्टरध्वस्त्र फाइबर, शीट और अन्य उत्पादों के विनिर्माण के लिए कच्चा माल (प्लास्टिक कचरा) स्थानीय स्तर पर खरीदने का दबाव बनेगा। इससे उपयोग में लाई जा चुकी पीईटी बोतलों के संग्रह और पुनर्चक्रण की दर को 99 फीसदी तक पहुंचाने और 40 लाख कचरा बीनने वालों की नौकरी को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

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